अपनी जिप्सी से ही शवों को श्मशान पहुंचा रहे हैं लखनऊ के रंजीत, बोले- कोरोना से डरना नहीं है, लड़ना है

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लखनऊ. कोरोना संक्रमण (COVID -19) ने चारों तरफ तबाही मचा रखी है. रोज कई लोग अपनों को खो दे रहे हैं. भय का माहौल ऐसा है कि शवों (Deadbodies) के अंतिम संस्कार का संकट खड़ा हो गया है. लोग अपनों की ही मौत पर खड़े होने से कतरा रहे हैं. घर से श्मशान तक शव पहुंचाने के लिए गाड़ियां नहीं मिल रही हैं. जो मिल भी रही हैं, वो मुंह मांगी कीमतें मांग रही हैं. ऐसे दौर में एक पूर्व पार्षद अकेले दम पर लखनऊवासियों को मदद पहुंचाने निकल पड़ा है. हम बात कर रहे हैं मनकामेश्वर वार्ड के पूर्व सभासद रंजीत सिंह (Former Corporator)  की. कोरोना पॉजिटिव होने के बाद रंजीत सिंह ने पहले घर पर रहकर आत्मबल से कोरोना को मात दी. फिर  रिपोर्ट निगेटिव आते ही वह लखनऊ की सड़कों पर सेवा करने के लिए निकल पड़े. रंजीत ने सेवा के लिए वो काम चुना, जो किसी प्रेरणा से कम नहीं है. रंजीत सिंह ने अपनी जिप्सी गाड़ी को ही शव वाहन (Hearse) बना दिया और अब वो एक कॉल पर, किसी सूचना पर किसी भी गरीब के घर पहुंच जाते हैं और नि:शुल्क ही शवों को घरों से श्मशान तक पहुंचाते हैं. अपने फेसबुक लाइव के माध्यम से रंजीत सिंह लोगों को ये संदेश भी देते हैं कि कोरोना से डरना नहीं है, लड़ना है और जो अपने हमें छोड़कर जा रहे हैं, उनका पूरे नियमों के साथ पालन करते हुए अंतिम समय में साथ भी देना है. लॉकडाउन में भी सुबह से रात तक कर रहे सेवा उत्तर प्रदेश में हर हफ्ते 3 दिन का लॉकडाउन चल रहा है, अब इसकी मियाद दो दिन और बढ़ा दी गई है. लेकिन रंजीत सिंह रुके नहीं है, वो लगातार सुबह से लेकर रात तक सेवा में जुटे हैं. वो शवों को श्मशान तक पहुंचा रहे हैं. रंजीत कहते हैं कि लोग हिम्मत करें और अपनों की मदद के लिए आगे आएं. वो कोविड गाइडलाइन का पूरा पालन करते हुए, मास्क, सैनेटाइजर और अगर उपलब्ध है तो पीपीई किट पहन कर सेवा करें. इससे बढ़कर और कोई काम नहीं.

अपने क्षेत्र में जुझारू इंसान की छवि बता दें रंजीत की पत्नी फिलहाल मनकामेश्वर वार्ड से सभासद हैं. अपने क्षेत्र में रंजीत सिंह जुझारू और जनता के लिए हमेशा खड़े रहने वाले शख्स की पहचान रखते हैं. चाहे वह हर हफ्ते गोमती की सफाई का सेवा कार्य हो या त्यौहारों के बाद यहां-वहां फेंकी गई भगवान की मूर्तियों को खुद उठाकर उनका निस्तारण करना हो, रंजीत सिंह अकेले दम पर लखनऊवासियों के लिए प्रेरणा की नई इबारत लिख रहे हैं.
खुद ही सेवा में जुटे रहते हैं

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लखनऊ: कोरोना की रिपोर्ट निगेटिव आते ही क्षेत्र में खुद ही सैनेटाइजेशन कराने में जुट गए रंजीत.

कैसे आया जिप्सी को शव वाहन बनाने का ख्याल? रंजीत बताते हैं कि 3 अप्रैल को उनकी कोविड रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी. वो लगातार आइसोलेशन में रहे और नियमों का पूरे अनुशासन से पालन किया. रंजीत बताते हैं कि आइसोलेशन के दौरान उन्होंने अखबारों में और तमाम सोशल मीडिया व अन्य माध्यमों से परिस्थितियां देखीं. जलती चिताओं की तस्वीरें देख उनका मन द्रवित हो गया. वो सो नहीं पाते थे. इस बीच 14 अप्रैल को उनकी रिपोर्ट निगेटिव आ गई. उन्होंने अगले ही दिन से अपने इलाके में सैनेटाइजेशन शुरू कर दिया. साथ ही अपनी जिप्सी गाड़ी में थोड़ा बदलाव कर उसे शव वाहन के रूप में उतार दिया. रंजीत बताते हैं कि वह ऐसे गरीबों और मजबूर लोगों की मदद कर रहे हैं, जो अपने किसी सगे की कोविड से मौत के बाद श्मशान तक शव नहीं ले जा पा रहे हैं. उनके पास शव वाहनों के लिए हजारों रूपए नहीं हैं. हम नि:शुल्क उनकी मदद कर रहे हैं.

शव वाहन बनाने के लिए जिप्सी को खुद ही किया मॉडिफाई

लखनऊ: रजीत सिंह ने शव वाहन बनाने के लिए जिप्सी को खुद ही किया मॉडिफाई

रंजीत का साथ निभा रहे हैं डॉ सैयद रिजवान अहमद रंजीत कहते हैं कि इस कार्य में उनकी मदद डॉ सैयद रिजवान अहमद जी कर रहे हैं. इस कार्य को देखते हुए कई और लोगों से मदद की बात कही लेकिन उन्होंने किसी से मदद नहीं ली है. अपने सामर्थ्य से ही वो पूरा काम कर रहे हैं, किसी की हेल्प नहीं ले रहे हैं. रंजीत बताते हैं कि लोगों को समझना होगा कि कोविड से मरने वाला भी इंसान ही है. अगर आप उससे दूर हो जाएंगे तो कल को आपके साथ भी तो ऐसा ही हो सकता है. इसलिए कोविड से डरें नहीं, पूरी सावधानी के साथ हिम्मत से लड़ें. कोविड के शव को कोविड गाइडलाइन का पालन करते हुए कोई भी छू और उठा सकता है. वो भी ऐसा ही कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि लोग अपनों के शव को छोड़ दे रहे हैं, ऐसा न करें, हिम्मत दिखाएं. हमें साथ लड़ना है.



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