अब डोली से अस्पताल जाएंगी ग्रामीण इलाकों की गर्भवती महिलाएं, सरकार ने की शुरुआत

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(फोटो क्रेडिट- AP News)

नैनीताल (NainiTaal News) जिले के पहाड़ी इलाकों से निकटवर्ती अस्पताल तक पहुंचने के लिए पैदल रास्ता तय करने वाली गर्भवती महिलाओं की विवशता देखते हुए प्रशासन ने उनके लिए डोली सेवा की शुरुआत की है.

  • News18Hindi

  • Last Updated:
    December 7, 2020, 8:57 AM IST

नैनीताल. उत्तराखंड स्थित नैनीताल (NainiTaal News) जिले के पहाड़ी इलाकों से निकटवर्ती अस्पताल तक पहुंचने के लिए मीलों का सफर पैदल तय करने की गर्भवती महिलाओं की विवशता को देखते हुए प्रशासन ने उनके लिए डोली सेवा की शुरुआत की है. नैनीताल के जिलाधिकारी सविन बंसल ने हाल में मुख्य चिकित्सा अधिकारी को पहाड़ी क्षेत्रों की गर्भवती महिलाओं को प्रसव के लिए निकटवर्ती सड़क या अस्पताल तक पहुंचाने के लिए 500 डोलियों की व्यवस्था करने की खातिर 10 लाख रुपये की राशि जारी की.

डोलियों की व्यवस्था खासतौर पर नैनीताल जिले के पहाड़ी विकास खंडों-धारी, रामगढ़, ओखलकांडा, बेतालघाट और भीमताल के लिए की गई है. इसी नई शुरुआत से नैनीताल उत्तराखंड का ऐसा पहला जिला बन गया है, जहां ग्रामीण महिलाओं की परेशानी का हल निकालने के लिए ऐसा कदम उठाया गया है.

किन गांवों के लिए लागू होगा नियम?
जिलाधिकारी बंसल अक्सर जिले के दूरस्थ क्षेत्रों में पैदल चलकर जाते हैं और मेडिकल आपात स्थिति के समय ग्रामीणों की असुविधा के बारे में भली-भांति समझते हैं. बंसल ने कहा कि अस्पताल में कुछ धनराशि हमेशा अलग से रखी जाएगी और गर्भवती महिला को डोली में अस्पताल तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाने वाले व्यक्ति को दो हजार रूपये भी दिए जाएंगे. डोली सेवा उन गांवों में उपलब्ध होगी जो निकटवर्ती सड़क से एक किलोमीटर से ज्यादा दूर होंगे.क्या है राज्य में शिशु और मातृ मृत्यु दर

उत्तराखंड चिकित्सा स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के अनुसार, राज्य में शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) 32 है, मातृ मृत्यु दर 165 है और संस्थागत यानी अस्पतालों में कराए जाने वाले प्रसव 87 प्रतिशत है.

अब डोली से अस्पताल जाएंगी ग्रामीण इलाकों की गर्भवती महिलाएं, सरकार ने की शुरुआत

साल 2016-18 की अवधि में भारत में रजिस्ट्रार जनरल (आरजीआई) के कार्यालय द्वारा जारी अवधि में मातृ मृत्यु दर पर एक विशेष बुलेटिन के अनुसार, राष्ट्रीय मातृ मृत्यु अनुपात बीते साल (एमएमआर) 113 हो गया था. 2015-17 में यह आंकड़ा 122 था. उस रिपोर्ट के अनुसार 2016-18 उत्तराखंड में MMR 99 और मातृ मृत्यु दर में 6.4 थी. मई में आरजीआई द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 2018 में राष्ट्रीय शिशु मृत्यु दर 32 थी, जबकि इसी अवधि में उत्तराखंड का आंकड़ा 31 था.


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