अयोध्या के इस सिद्ध पीठ को क्यों कहते हैं अशर्फी भवन, क्या है मंदिर निर्माण से पहले भंडारा करवाने की कहानी?

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रिपोर्ट- सर्वेश श्रीवास्तव

अयोध्या: सरयू तट पर बसी प्रभु श्रीराम की नगरी अयोध्या मंदिर और मूर्तियों के लिए पूरे विश्व में विख्यात है. रामनगरी में लगभग 8 हजार मठ-मंदिर हैं. ऐसे कई मठ-मंदिर हैं, जहां की अपनी अलग परंपरा है. उसी परंपरा का निर्वहन आज भी अयोध्या के मठ-मंदिरों में देखने को मिल रहा है. हम आपको आज एक ऐसे मंदिर से रूबरू कराएंगे और बताएंगे कि कैसे उसकी नींव की खुदाई में मिले अवशेषों के नाम पर ही उसका नाम रखा गया. जी हां हम बात कर रहे हैं राम नगरी अयोध्या के प्रमुख सिद्ध पीठों में से एक अशर्फी भवन सिद्ध पीठ की. अशर्फी भवन पीठ में भगवान लक्ष्मी नारायण विराजमान हैं. बजरंगबली हनुमान जी विराजमान हैं. लड्डू गोपाल विराजमान हैं. इस भवन को सीता राम विलास भवन के नाम से भी जाना जाता है, जिसका निर्माण करीब 100 वर्ष पूर्व हुआ था.

जानिए कैसे पड़ा अशर्फी भवन नाम?
मंदिर के महंत स्वामी श्री धराचार्य बताते हैं कि जब मंदिर बनाने के लिए नींव की खुदाई हो रही थी, तब नींव की खुदाई के नीचे ढेर सारी अशरफियां मिलीं. पहले तो काम करने वाले मजदूरों ने उन अशरफियों को अपने घर उठाकर ले गए. लेकिन अस्वस्थ होने के कारण उन्होंने यह अशर्फियां मंदिर को लौटा दीं. मंदिर निर्माण के वक्त मिले अशर्फियों की वजह से इसका नाम अशर्फी भवन पड़ा. आज रामनगरी अयोध्या में अशर्फी भवन अपने आप में एक प्रसिद्ध जगह है.

देश के प्रसिद्ध मंदिरों में हुआ था भंडारा
स्वामी श्री धराचार्य बताते हैं कि जब मजदूरों ने अशर्फियां मंदिर को समर्पित कीं, तब मंदिर के मौजूदा संस्थापक की ओर से अशर्फी को बेचकर अयोध्या, वृंदावन, मथुरा और काशी समेत देशभर की प्रसिद्ध जगहों पर वरिष्ठ संतों की मदद से भंडारा करवाया गया था. अशर्फियां तो भंडारे में प्रयुक्त हो गईं, पर इस संयोग को आराध्य की कृपा मानकर मधुसूदन आचार्य लक्ष्मी नारायण ने मंदिर को अशर्फी भवन का नाम दे दिया.

जानिए कहां स्थित है अशर्फी भवन पीठ?
नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके आप अशर्फी भवन पीठ आसानी से पहुंच सकते हैं
Asharfi Bhawan089488 01554https://maps.app.goo.gl/whUynAdx4ow3dB1P6

Tags: Ayodhya News, Uttar pradesh news



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