असम में मतदान का काम पूरा, बीजेपी को भरोसा कि महाजोत से कांग्रेस को होगा नुकसान

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गुवाहाटी. 6 अपैल को असम में आखिरी चरण का मतदान था. सुबह से मैं दक्षिणी गुवाहाटी की जालुकबारी विधानसभा सीट पर रिपोर्टिंग कर रहा था. वोटिंग 7 बजे शुरू होनी थी, लेकिन यहां के रेलवे बंगाली स्कूल में मतदाताओं का हुजूम 6 बजे से उमड़ने लगा था. ऐसा लग रहा था कि यहां किसी बड़ी रैली का आयोजन होने वाला है. लेकिन ये भीड़ अनियंत्रित नहीं हुई और न ही ईवीएम में कोई शिकायत आयी. चुनाव आयोग ने वाकई मतदान की तस्वीर बदल दी है. ये भी साफ है कि हिंसा और घुसपैठियों का प्रकोप झेलने के बाद असम अब बदलने लगा है. युवा और पहली बार वोट डालने वाले मतदाताओं से बात की तो जवाब आया कि जो विकास की राह पर ले जाए उसे वोट देना है, महिला प्रधान समाज वाले असम में महिला वोटर्स भी इसी राह पर चल रही हैं.

असम के आखिरी चरण के मतदान में कुल 40 सीटों पर जंग थी. इनमें माना ये जाता है कि मुस्लिम मतदाता के पास सत्ता की चाबी होती है यानी 40 में 25 सीटों पर मुस्लिम निर्णायक भूमिका में होते हैं. इस बार BJP गठबंधन के 8 मुस्लिम उम्मीदवार मैदान में हैं. लेकिन मुश्किल ये कि कांग्रेस ने बदरुद्दीन अजमल की एआईयूडीएफ से गठबंधन कर लिया है. राजनीतिक पंडित मानते हैं कि इससे गैर बीजेपी वोटों को एकजुट करने में कांग्रेस सफल रही है.

महाजोत से कांग्रेस बेनकाब हुई

बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और असम के चुनावों के मीडिया प्रभारी के के शर्मा पिछले 2 महीने से गुवाहाटी में डेरा डाले हुए हैं. उनका मानना है कि यह महाजोत नहीं महाखोट है, जिसका सिर्फ एक ही एजेंडा है कि किसी भी तरह से सत्ता में काबिज हों. ये विचारधारा का गठबंधन नहीं है, जिसे असम के वोटर ठगबंधन के रूप में देख रहे है. उस गठबंधन में बदरुद्दीन अजमल की पार्टी के आने से कांग्रेस ही बेनकाब हुई है. इसका खामियाजा कांग्रेस को ही भुगतना पड़ेगा.2016 में BJP गठबंधन को 15 सीटें, 30% वोट मिले थे. 2019 लोकसभा चुनाव में 12 विधानसभा क्षेत्रों में BJP को बढ़त मिली थी, जबकि 2016 में कांग्रेस, AIUDF, BPF अलग अलग लड़े थे और उन्हें 52% वोट मिले थे. इसलिए लोअर असम की इन 40 सीटों पर कांटे की टक्कर मानी जा रही है. लेकिन चुनाव प्रभारी और केंद्रीय मंत्री नरेंद्र तोमर ने बताया कि अजमल के बयान और महाजोत कांग्रेस को ज्यादा नुकसान पहुंचाएंगे.

35 बार असम पहुंचे पीएम मोदी 

बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और असम के प्रभारी बैजयंत पांडा का दावा है कि अपर असम में वो खासा बेहतर तो करेंगे ही, लेकिन पहले दो चरणों में वो सरकार बनाने के करीब पहुंच जाएंगे. ये पीएम मोदी के पूर्वोत्तर के राज्यों को उनके विजन और मोदी-सोनोवाल सरकार के काम का नतीजा है कि इस बार सत्तारूढ़ दल के पक्ष में लहर है. पांडा कहते हैं कि खुद पीएम मोदी अब तक करीब 35 बार असम आ चुके हैं, जबकि अब तक किसी पीएम ने ऐसा नहीं किया था.

एक और विवाद जो बीजेपी को घेर रहा था कि मुख्यमंत्री पद को लेकर टकराव पार्टी की सीटें कम कर रहा है. लेकिन पांडा कहते हैं कि एक मुख्यमंत्री के नेतृत्व में पहले से ही सरकार चली है. पार्टी आलाकमान सही नेता चुन लेगा. उल्टे पांडा ये सवाल उठा रहे हैं कि अगर बदरुद्दीन अजमल की पार्टी को ज्यादा सीट्स आयी तो मुख्यमंत्री कांग्रेस का होगा या अजमल की पार्टी का.

कांग्रेस की जिम्मेदारी भूपेश बघेल को

उधर कांग्रेस आलाकमान ने भी प्रचार की खानापूर्ति ही की. गाँधी परिवार से प्रियंका गांधी चाय बागान तो पहुंची लेकिन पलटकर दोबारा नहीं आईं. राहुल गांधी भी केरल में ही व्यस्त रहे. एकाध बार असम में नजर आए. जिम्मा सौंपा गया था छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल को. उन्होंने ताकत तो झोंकी पर शायद कैडर और नेतृत्व का बहुत समर्थन नहीं मिल पाया. लेकिन, एक बात तो साफ रही कि उन्होंने कांग्रेस को एक सम्मानजनक स्थिति में आने की राह पर डाल दिया.

बहरहाल उम्मीदवारों और पार्टियों की किस्मत ईवीएम में बंद हो चुकी हैं. तीसरे चरण के मतदान ही तय करेंगे कि दोनों गठबंधनों के सरकार बनाने का मार्जिन क्या होगा. लेकिन, असम की सुरक्षा, समृद्धि और संस्कृति की रक्षा की बात करने वाली बीजेपी का पलड़ा भारी जरूर नजर आ रहा है.





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