आखिर बाहुबली मुख्तार अंसारी की जेल में कोई सुपरिटेंडेंट क्यों नहीं टिकता? अब भी खाली है पद

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लखनऊ: ऐसा कहा जाता है कि मुख्तार अंसारी जिस जेल में रहता है, वहां कोई सुपरिटेंडेंट नहीं टिकता है. या तो वह लंबी छुट्टी पर टला जाता है या फिर उसकी तबीयत खराब हो जाती है. दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 7 अप्रैल 2021 को मुख्तार अंसारी पंजाब से बांदा जेल में शिफ्ट हुआ. बांदा को प्रदेश की सबसे हाई सिक्योरिटी जेल माना जाता है. यहां जेल और बंदियों की निगरानी के लिए तमाम मशीनों के इंतज़ाम हैं लेकिन मुख्तार अंसारी के आने के वक्त भी बांदा जेल में कोई सुपरिटेंडेंट नहीं था और अब भी नहीं है. माना जाता है कि मुख्तार अंसारी के बांदा जेल में बंद होने के बाद से कोई अधीक्षक यहां काम को राजी नहीं है.

दरअसल, बांदा जेल मंडल स्तर की जेल है, जिसका हेड सीनियर जेल सुपरिटेंडेंट होता है. बावजूद इसके हमीरपुर जेल से प्रमोद त्रिपाठी जेलर के तौर पर बांदा जेल संबद्ध किए गए. पंजाब जेल जाने से पहले भी जब मुख्तार अंसारी बांदा जेल में बंद था, तब भी जेल में कोई सुपरिटेंडेंट नहीं था. मुख्तार अंसारी की बांदा जेल में वापसी के साथ ही वहां की सुरक्षा को अहमियत देते हुए उन्नाव जेल के सुपरिटेंडेंट अरुण कुमार सिंह को 17 मई 2021 को बांदा जेल का सुपरिटेंडेंट नियुक्त किया गया. चंद महीने बाद ही 16 अक्टूबर 2021 से अरुण सिंह अर्न लीव पर चले गए. अर्न लीव के दौरान ही 1 नवंबर 2021 को अरुण सिंह ने अपना मेडिकल विभाग को भेजा और बताया कि उनकी तबीयत खराब है. 11 नवंबर 2021 को अरुण सिंह को संपूर्णानंद कारागार प्रशिक्षण संस्थान लखनऊ से संबद्ध कर दिया गया ताकि वह अपना इलाज करवा सकें.

इसी दिन बरेली जेल के सुपरिटेंडेंट विजय विक्रम सिंह को बांदा जेल का सुपरिटेंडेंट बनाया गया लेकिन विजय विक्रम सिंह ने बांदा जेल आकर अपनी जिम्मेदारी नहीं संभाली. कारागार विभाग की ओर से इनको चेतावनी भी दी गई लेकिन विजय विक्रम नहीं माने. लिहाजा 10 दिन बाद विजय विक्रम सिंह सस्पेंड कर दिए गए, तब से प्रमोद त्रिपाठी ही जेलर के तौर पर बांदा जेल की जिम्मेदारी संभालते रहे लेकिन बांदा जेल की अहमियत के बावजूद यहां कोई सुपरिटेंडेंट नहीं आया.

बताया जाता है कि कुछ दिन बाद प्रमोद त्रिपाठी ने बांदा जेल की सुरक्षा को लेकर अपने हाथ खड़े कर दिए. तब 8 जनवरी 2022 को ललितपुर जेल के जेलर वीरेंद्र वर्मा को बांदा का जेलर बनाकर भेजा गया और प्रमोद त्रिपाठी को ललितपुर. 8 जनवरी से वीरेंद्र वर्मा ही बांदा जेल के जेलर हैं. इस दौरान भी बांदा जेल को कोई सुपरिटेंडेंट नहीं मिला. 30 जून 2022 को लखीमपुर जेल के सीनियर सुपरीटेंडेंट पी पी सिंह को बांदा जेल का सुपरिटेंडेंट बनाने का आदेश जारी हुआ लेकिन पी पी सिंह ने भी बांदा जेल का चार्ज नहीं लिया. बताया जाता है कि विभाग में अपनी बड़ी पहुंच के चलते 2 जुलाई को ही पी पी सिंह बाराबंकी जेल के सुपरिटेंडेंट बन गए.

हालांकि पी.पी सिंह सीनियर जेल सुपरिटेंडेंट है लेकिन अपने पद से कमतर बाराबंकी जेल के सुपरिटेंडेंट का पद पी पी सिंह को भाया. कारागार प्रशासन ने बांदा जेल की संवेदनशीलता को देखते हुए कई बार बांदा जेल के लिए सुपरिटेंडेंट नियुक्त करने का प्रस्ताव भेजा लेकिन मुख्तार के आने के बाद से ही बांदा जेल को कोई सुपरिटेंडेंट नहीं मिला. माना जाता है कि मुख्तार अंसारी की वजह से कोई अधिकारी इस जेल में नहीं रुकना चाहता. यहां के सुपरिटेंडेंट मुख्तार के अपराध में सक्रिय होने की वजह से अपनी सुरक्षा को भी खतरा महसूस करते हैं.

Tags: Banda News, Mukhtar ansari, Uttar pradesh news



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