आखिर BJP ने विधानसभा स्पीकर पद पर दांव खेल ही लिया, आखिर कौन हैं ये पूर्व कम्युनिस्ट गिरीश?

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गिरीश गौतम मप्र विधानसभा में बिना किसी विरोध स्पीकर चुन लिए गए.

BJP के एक्स कम्युनिस्ट गिरीश गौतम विधानसभा के निर्विरोध स्पीकर चुन लिए गए. कलनाथ ने भी उनका साथ दिया. गिरीश गौतम वही हैं, जिन्होंने कांग्रेस के दिग्गज श्रीनिवास तिवारी को हराकर इतिहास बदला था.

  • News18Hindi

  • Last Updated:
    February 22, 2021, 4:39 PM IST

भोपाल. मध्यप्रदेश में BJP के वरिष्ठ नेता और 4 बार विधायक रह चुके गिरीश गौतम निर्विरोध विधानसभा के अध्यक्ष चुने गए हैं. वो क्यों चुने गए इसके पीछे भी बड़ी वजह है. दरअसल गिरीश गौतम प्रदेश के वो नेता हैं, जो सीधे जमीन से जुड़े हैं. 28 मार्च 1953 को ग्राम करौदी, जिला- रीवा में जन्में गिरीश ने 1972 से ही छात्र राजनीति शुरू कर दी थी. उनका निर्वाचन क्षेत्र देवतालाब रहा. उन्होंने ललिता गौतम से विवाह किया और उनका  एक बेटा और दो बेटियां हैं.

कृषि व्यवसाय करने वाले मप्र विधानसभा के नए अध्यक्ष बीएससी और एलएलबी पासआउट हैं. बताया जाता है कि 1972 से ही वे गरीबों और किसानों के लिए संघर्ष करते रहे. साइकल पर चलते थे और जरूरतमंदों से कभी वकालत की फीस नहीं लेते थे. ये जानकार आश्चर्य होगा कि गिरीश गौतम कम्युनिस्ट विचारधारा से प्रभावित रहे हैं. सालों पहले उन्हें भगवे ने अपनी ओर आकर्षित किया और वे भाजपाई हो गए.

CPI की ओर से लड़े दो चुनाव

गौरतलब है कि गिरीश गौतम ने राजनीति की शुरुआत भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (Communist Party of India) से की थी. उन्होंने CPI की ओर से 1993 और 1998 में चुनाव लड़ा. राजनीतिक पंडितों का ध्यान उनकी तरफ उस वक्त गया जब 1998 में गिरीश ने मनगंवा विधानसभा सीट पर श्रीनिवास तिवारी की जीत 196 वोट पर लाकर टिका दी.अपने समय के दिग्गज श्रीनिवास तिवारी को हराया

इसके बाद इतिहास पलटा और वर्ष 2003 में गिरीश ने न केवल अपने समय के दिग्गज नेता श्रीनिवास तिवारी को हराया, बल्कि उनकी जीत का अंतर 28 हजार वोट था. बता दें, श्रीनिवास तिवारी लगातार 10 साल तक विधानसभा अध्यक्ष रहे. विंध्य अंचल में उनकी समांतर सरकार चलती थी.

इसीलिए बदलनी पड़ी सीट

जानकारी के मुताबिक, साल 2008 में मनगंवा सीट आरक्षित हो गई. जब BJP को कुछ और नहीं सूझा तो पार्टी ने गिरीश को पड़ोसी सीट देवतालाब भेजा. यहां से गिरीश 2008, 2013 और 2018 में लगातार जीते. इसके बाद 22 फरवरी को उन्हें निर्विरोध मप्र विधानसभा का अध्यक्ष चुन लिया गया.






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