आजादी के वक्त से मशहूर तिरंगी बर्फी बनेगी बनारस की बौदिक संपदा, मिलेगा जीआई टैग

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हाइलाइट्स

अब ये तिरंगी बर्फी बनारस की बौदिक संपदा भी बनने जा रही है.
बर्फी का आजादी के आंदोलन से जुड़ाव रहा है और अब अमृत महोत्सव पर जीआई टैग दिलवाया जा रहा.
सबसे पहले जम्मू डिवीजन की बसोहली पश्मीना का आवेदन हुआ.

वाराणसी. पूरी दुनिया में बनारस के घाट, पान और यहां का खानपान मशहूर है. बनारसी मिठाई की दीवानगी तो देश विदेश के लोगों पर सिर चढ़कर बोलती है. बनारस की मिठाई केवल अपनी खास मिठास के लिए भी विख्यात नहीं है बल्कि इसका ताल्लुक आजादी की लड़ाई से भी है. जी हां, बनारस ही दुनिया में एकलौता शहर होगा, जहां तिरंगे झंडे के रंग की बर्फी मिलती है और नाम है इसका तिरंगी.

आजादी के आंदोलन से अस्तित्व में आई इस बर्फी के जरिए लोगों में देशप्रेम का तब जज्बा जगाया गया. आजादी के बाद बदस्तूर आज भी शहर की सैकड़ों साल पुरानी दुकानों पर आपको पूरे साल ये बर्फी सजी मिल जाएगी. अब ये तिरंगी बर्फी बनारस की बौदिक संपदा भी बनने जा रही है. आजादी के अमृत महोत्सव के तहत इस बर्फी को भी जीआई रजिस्ट्रेशन के लिए भेजा गया है.

130 साल पुराने मिठाई विक्रेता देशबंधु ने जताई खुशी
यूं तो इसकी कवायद पांच अगस्त 2021 से शुरू हो गई थी. सबसे पहले जम्मू डिवीजन की बसोहली पश्मीना का आवेदन हुआ. उसके बाद अलग-अलग पड़ाव से गुजरते हुए वाराणसी से जब आवेदन हुआ तो ह्यूमन वेलफेयर एसोसिएशन इस कोशिश को आगे बढ़ाया. हालांकि आवेदन महानगर उद्योग समिति ने किया है. काशी की करीब 130 साल पुराने मिठाई विक्रेता देशबंधु के मैनेजर बद्रीप्रसाद मौर्य ने बताया कि अब हमारी तिरंगी बर्फी को जीआई टैग मिलेगा, ये खबर हमारे लिए बेहद खुशी की है. इस बर्फी का आजादी के आंदोलन से जुड़ाव रहा है और आजादी के अमृत महोत्सव पर ये खबर डबल खुशी देने वाली है.

बनारस के 18 उत्पादों को मिल चुका है जीआई टैग
वाराणसी के जीआई विशेषज्ञ और पदमश्री डाॅ रजनीकांत ने बताया कि आजादी के 75वें वर्ष में 75 जीआई आवेदन भेजने का लक्ष्य किया गया था. अब तक वाराणसी और पूर्वांचल के दूसरे जिलों के 18 उद्योगों को जीआई का टैग मिल चुका है. बनारस के नए 12 उत्पाद आवेदन के बाद प्रक्रिया में है. इसमें तिरंगी बर्फी  साथ शहनाई, तबला, लालपेड़ा और लंगड़ा आम शामिल हैं.

Tags: Banaras news, UP news, Varanasi news



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