आर्य समाज के विवाह प्रमाण पत्र को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट का अहम फैसला, कहा- वैध शादी का सबूत नहीं

0
15


हाइलाइट्स

आर्य समाज द्वारा जारी विवाह प्रमाणपत्र का कोई वैधानिक प्रभाव नहीं
शादी परंपरागत दोनों पक्षों की सहमति समारोह में होनी चाहिए
शादी के वैध सबूत के बगैर धारा-9 की अर्जी मंजूर नहीं की जा सकती

प्रयागराज. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि विवाह पंजीकरण वैध‌ विवाह का सबूत नहीं है. केवल इसे साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है. कोर्ट ने यह भी कहा कि आर्य समाज द्वारा जारी विवाह प्रमाणपत्र का कोई वैधानिक प्रभाव नहीं है. शादी परंपरागत दोनों पक्षों की सहमति समारोह में होनी चाहिए, जिसमें सप्तपदी की रश्म पूरी हुई हो. कोर्ट ने कहा कि जब शादी ही वैध नहीं तो हिन्दू विवाह अधिनियम की धारा-9 के तहत विवाह पुनर्स्थापन की अर्जी परिवार अदालत द्वारा स्वीकार न करना कानूनन सही है. शादी के वैध सबूत के बगैर धारा-9 की अर्जी मंजूर नहीं की जा सकती. कोर्ट ने परिवार अदालत सहारनपुर के धारा-9 की अर्जी खारिज करने के फैसले के खिलाफ प्रथम अपील खारिज कर दी है. यह आदेश जस्टिस एसपी केसरवानी और जस्टिस राजेन्द्र कुमार की खंडपीठ ने आशीष मौर्य की अपील पर दिया है.

याची आशीष मौर्य का कहना था कि अनामिका धीमान उसकी पत्नी है. विवाह पुनर्स्थापित करने की परिवार अदालत में अर्जी दी. बाद में समझौते के आधार पर वापस ले ली, किंतु कुछ दिन बाद दुबारा अर्जी दाखिल की. कथित पत्नी ने शादी होने से इनकार कर दिया और कहा कि झूठी शादी की गई है. उसे ब्लैकमेल करने के लिए आर्य समाज से विवाह प्रमाणपत्र लिया गया है.

फैमिली कोर्ट के फैसले को शै माना
इसी मामले में थाना सदर बाजार, सहारनपुर में एफआईआर दर्ज कराई गई है. पुलिस ने चार्जशीट भी दाखिल कर दी है. कोर्ट ने कहा सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 11 नियम 2 के तहत बिना शादी हुए पुनर्स्थापन अर्जी दाखिल की जा सकती है. ऐसी अर्जी प्रतिबंधित मानने के परिवार अदालत के फैसले को हाईकोर्ट ने सही माना और कहा आर्य समाज का शादी प्रमाणपत्र शादी की वैधता का सबूत नहीं है.

आपके शहर से (इलाहाबाद)

उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश

Tags: Allahabad high court, Allahabad news



Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here