इंसेफेलाइटिस के खिलाफ जंग में बड़ी कामयाबी, गोरखपुर में इस साल अब तक नहीं मिला एक भी मरीज

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मोहम्मद अली
गोरखपुर. पूर्वी उत्तर प्रदेश में इंसेफेलाइटिस के खिलाफ जंग में बड़ी कामयाबी हासिल हुई है. गोरखपुर जिले में इस साल में अब तक किसी भी अस्पतालों पर जेई व एईएस (जापानी इंसेफेलाइटिस और एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम) का कोई मरीज नहीं मिला है. जिले के सभी पीकू और ईटीसी सेंटरों पर अबतक जेई-एईएस का कोई मरीज नहीं आया है. इसके पहले मार्च के अंतिम सप्ताह से ही एईएस के मरीजों की आमद शुरू हो जाती थी और जिले के सभी पीकू और ईटीसी सेंटरों पर मरीज ही मरीज दिखाई देते थे, लेकिन इस साल अबतक जेई-एईएस का कोई मरीज नहीं पहुंचा है.

इस बीमारी को खत्म करने में सबसे बड़ा योगदान यूपी के सीएम योगी आदित्यानाथ का है. यह उनके अथक प्रयासों का ही नतीजा है कि यहां इस गंभीर बीमारी से निजात मिलती दिख रही है. योगी आदित्यनाथ ने वर्ष 2017 में सीएम बनने के बाद इंसेफेलाइटिस को खत्म करने पर काम करना शुरू कर दिए. सीएम योगी ने इस बीमारी का कारण ढूंढकर स्वास्थ्य विभाग, पंचायती राज, जलनिगम, पशुपालन विभाग, शिक्षा विभाग समेत कुल ग्यारह विभागों को जोड़कर अभियान चलावाया.

सीएम योगी की पहल से मिली कामयाबी
सीएम योगी की पहल पर स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा घर-घर जाकर लोगों को जागरूक किया गया. इसके साथ-साथ जिले के सीएचसी पर पीकू सेंटर और पीएचसी पर ईटीसी सेंटर बनाए गए और वहां पहुंचने वाले जेई-एईएस के मरीजों के इलाज के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों और दवाओं के बेहतर इंतेजाम किए गए. इंसेफेलाइटिस के मरीजों के इलाज के लिए पीएचसी, सीएचसी से लेकर जिला अस्पताल और बीआरडी मेडिकल कॉलेज तक बेहतर इंतेजाम किए गए हैं, जिससे जेईएईएस के मरीजों के इलाज में किसी भी प्रकार की कोई असुविधा न होने पाए.

‘2017 के बाद से इस बीमारी में लगातार गिरावट’
सीएम योगी के इस कामयाब फॉर्मूले की वरिष्ठ चिकित्सक भी खूब तारीफ कर रहे हैं. गोरखपुर के सीएमओ डॉ. आशुतोष कुमार दुबे कहते हैं, ‘हम लोग चिकित्सक होकर भी जिस बीमारी को नहीं कंट्रोल नहीं कर पा रहे थे. योगी आदित्यनाथ के सीएम बनने के बाद उनके मैनेजमेंट स्किल की वजह से इस बीमारी पर विजय प्राप्त कर ली गई. यही वजह है कि वर्ष 2017 के बाद से लगातार इस बीमारी में गिरावट आती गई और जेई-एईएस से होने वाली मृत्यु दर में भी साकारात्मक कमी हुई.’

गोरखपुर में आंकडों की बात करें तो वर्ष 2022 में अबतक कोई भी मृत्यु नहीं हुई है. 2021 में मात्र चार मृत्यु हुई थी और 15 मरीज भर्ती हुए थे. वहीं इससे पहले वर्ष 2020 में 1, 2019 में तीन, 2018 में 13 लोगों की मृत्यु हुई थी, जबकि वर्ष 2017 में यहां स्थिति काफी भयावह थी.

Tags: Encephalitis Control, Encephalitis Disease, Gorakhpur news, Yogi adityanath



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