इस मामले में बेहद सख्त हैं CM नीतीश! 7 कार्यकाल में 6 मंत्रियों से ले चुके हैं इस्तीफा

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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (फाइल फोटो)

राजद सांसद मनोज झा (RJD MP Manoj Jha) ने कहा, एक भ्रष्ट मंत्री को हटाने का निर्णय बीजेपी (BJP) ने लिया यह दुःख की बात है. नीतीश कुमार (Nitish Kumar)अपनी प्रतिछाया बन कर रह गए हैं.

  • News18Hindi

  • Last Updated:
    November 21, 2020, 2:23 PM IST

पटना. भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे डॉ. मेवालाल चौधरी(Dr. Mewalal Chaudhary) को शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा तो आरजेडी (RJD) ने इसे अपने दबाव का नतीजा बताया. एक हद तक इस बात को सही माना जा सकता है कि यह मामला सुर्खियों में इसलिए अधिक आया क्योंकि तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) ने लगातार इसको लेकर सीएम नीतीश पर हमला बोला. हालांकि आरजेडी सांसद मनोज झा (RJD MP Manoj Jha) ने इसका क्रेडिट बीजेपी को देने की कोशिश की.

मनोज झा (RJD MP Manoj Jha) ने कहा, एक भ्रष्ट मंत्री को हटाने का निर्णय बीजेपी ने लिया यह दुःख की बात है. नीतीश कुमार अपनी प्रतिछाया बन कर रह गए हैं. लेकिन, इस बात में अधिक दम इसलिए नहीं लगता क्योंकि नीतीश कुमार तीन ‘सी’ क्राइम, करप्शन व कम्यूनिलिज्म से समझौता नहीं करने वाले मुख्यमंत्री के रूप में जाने जाते हैं.

यही नहीं, बीते कई उदाहरण हमारे सामने हैं जब विभिन्न आरोपों की वजह से उनके मंत्रिमंडल में शामिल आधा दर्जन मंत्रियों को इस्तीफा देना पड़ा है. अपनी पहली सरकार में ही उन्होंने मंत्री बनाने के 24 घंटे के भीतर जीतनराम मांझी का इस्तीफा लिया. फिर रामानंद सिंह को पद छोड़ना पड़ा. 19 मई 2011 को कोर्ट द्वारा फरार घोषित होने के बाद सहकारिता मंत्री रामाधार सिंह ने इस्तीफा दिया.

अक्टूबर, 2015 में स्टिंग ऑपरेशन में 4 लाख घूस लेते पकड़ाए निबंधन उत्पाद मंत्री अवधेश कुशवाहा ने इस्तीफा दिया था. बालिकागृह कांड के बाद सीबीआई की तलाशी के दौरान ससुराल से कारतूस बरामद होने पर 2018 में तत्कालीन समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा से इस्तीफा ले लिया गया. इस कड़ी में महज तीन दिन के मंत्री मेवालाल चौधरी का नाम भी जुड़ गया है.इसी मुद्दे को लेकर न्यूज 18 ने डॉ. मेवालाल से बात की तो उन्होंने साफ किया कि उन्होंने सीएम नीतीश की छवि को बचाने के लिए ऐसा किया. शिक्षा मंत्री का पदभार ग्रहण करते ही इस्तीफा देने वाले डॉ. मेवालाल चौधरी ने कहा कि नीतीश कुमार के सच्चे सिपाही होने के नाते उनके छवि पर किसी तरह का आंच न लगे, इसलिए मैंने खुद इस्तीफे की पेशकश की. मेवालाल ने कहा कि वो जब तक पाक-साफ साबित नहीं हो जाते वो इस पद पर नहीं रहेंगे.

बता दें कि बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) के कुलपति रहते समय मेवालाल चौधरी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे और उन पर एफआईआर भी दर्ज हुई थी. इसके बाद जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) से उन्हें निलंबित कर दिया गया था. यही वजह है कि विपक्ष लगातार नीतीश सरकार को टारगेट पर ले रही थी.



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