उत्तराखंडः मेदांता से कोरोना को हराकर घर लौटीं नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश, 8 तक रहेंगी क्वारंटाइन

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इंदिरा सोमवार को अपने बेटे सुमित हृदयेश के साथ हल्द्वानी लौट आईं. घर लौटने पर इंदिरा के समर्थकों ने उनका स्वागत किया.

देहरादून के मैक्स अस्पताल में पांच घंटे तक इंतजार के बाद भी नेता प्रतिपक्ष को बेड नहीं मिला था. तब उन्हें मेदांता ले जाया गया था.

हल्द्वानी. कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश कोरोना से ठीक होकर घर लौट गई हैं जिससे कांग्रेस कार्यकर्ताओं और इंदिरा के समर्थकों में खासा उत्साह है. इंदिरा 20 सितंबर से गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती थीं जहां चेस्ट डिपार्टमेंट के डॉक्टरों की देखभाल में उनका इलाज चला. इंदिरा को कोरोना के साथ ही निमोनिया की भी शिकायत थी. अस्पताल में भर्ती होने के बाद से ही उनके स्वास्थ्य में सुधार हो रहा था. रविवार को इंदिरा की दोबारा कोरोना जांच की गई जिसमें उनकी रिपोर्ट निगेटिव आई. इसके बाद मेदांता अस्पताल के डॉक्टरों ने उन्हें डिस्चार्ज करने की निर्णय लिया. इंदिरा सोमवार को अपने बेटे सुमित हृदयेश के साथ हल्द्वानी लौट आईं. घर लौटने पर इंदिरा के समर्थकों ने उनका स्वागत किया.

8 अक्टूबर तक रहेंगी क्वारंटाइन

इंदिरा हृदयेश 8 अक्टूबर तक सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूर रहेंगी. इंदिरा को डॉक्टरों ने 8 अक्टूबर तक क्वारंटाइन रहने की सलाह दी है इसलिए वह लोगों और सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूर रहेंगी. इंदिरा ने सोशल नेटवर्किंग साइट पर खुद की घर वापसी की खबर अपने समर्थकों से साझा की और शुक्रिया अदा किया.

इंदिरा को 16 सितंबर को बुखार आया था. 18 सितंबर को उन्हें हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां कोरोना के साथ निमोनिया होने की पुष्टि हुई थी. इसके बाद इंदिरा को देहरादून के मैक्स अस्पताल ले जाने का निर्णय लिया गया.20 सितंबर को इंदिरा को एयरलिफ्ट कर देहरादून ले जाया गया. मैक्स अस्पताल में पांच घंटे तक इंतजार के बाद भी नेता प्रतिपक्ष को बेड नहीं मिला जिसके बाद वह तीन घंटे के लिए दूसरे प्राइवेट अस्पताल में भर्ती हुई. हालांकि बाद में इंदिरा को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल ले जाया गया.

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बेड न मिलने पर उठे थे सवाल

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देहरादून में इलाज के लिए पहुंची इंदिरा हृदयेश को इलाज नहीं मिला था. जिसके बाद सरकार के इंतजाम पर सवाल उठ रहे हैं क्योंकि सीएम के बाद नेता प्रतिपक्ष प्रदेश में राजनीति के लिहाज से दूसरा बड़ा पद होता है. ऐसे में अगर उन्हें ही प्रदेश के अस्पताल में इलाज नहीं मिला तो आम आदमी के इलाज का क्या हाल होगा इस पर सवाल हैं.





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