उत्तराखंड: कई किलोमीटर पहाड़ पर चलने के बाद बुजुर्गों को मिल रही कोरोना वैक्सीन, तस्वीरें कर देंगीं हैरान

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उत्तराखंड: कई किलोमीटर पहाड़ पर चलने के बाद बुजुर्गों को मिल रही कोरोना वैक्सीन

उत्तराखंड में बुजुर्ग लोग पहाड़ों के कटीले और खतरनाक रास्तों पर चलकर वैक्सीन की डोज लेने कई किलोमीटर का सफर तय कर रहे हैं. ये तस्वीरें कोरोना से जंग लडऩे की मजबूरी को बयां करती है. कोरोना वैक्सीन लगवाने के बाद वह इन्हीं दुर्गम इलाकों से पैदल वापस लौटने को भी मजबूर हैं.

देहरादून. उत्तराखंड ( Uttarakhand) के ग्रामीण इलाकों से कोरोना वैक्सीनेशन ( Corona Vaccination) की चौंकाने वाली तस्वीरें सामने आ रही हैं. यहां बुजुर्ग लोग ( Elderly people) पहाड़ों के कटीले और खतरनाक रास्तों पर चलकर वैक्सीन की डोज लेने के लिए कई किलोमीटर का सफर तय कर रहे हैं. ये तस्वीरें कोरोना से जंग लडऩे की मजबूरी को बयां करती है. कोरोना वैक्सीन लगवाने के लिए यहां के लोगों को कई दुर्गम इलाकों से गुजरना पड़ रहा है. वैक्सिनेशन के लिए लोग आठ-आठ किलोमीटर यानि लगभग 16 किलोमीटर पैदल चल रहे हैं और प्रशासनिक इंतजाम फेल साबित हो रहे हैं.

ऊबड़-खाबड़ रास्तों, नदी नालों को पार कर एक दूसरे के सहारे जोखिम उठाकर चलते हुए कई बुजर्गों को देख जा रहा है. ये तस्वीरें सीमांत उत्तरकाशी की पुरोला तहसील के सर बडियार क्षेत्र की हैं. सरबडियार क्षेत्र में आठ गांव आते हैं. ये पूरा क्षेत्र विकास से कोसों दूर है. यहां न सडक़ है न ठीक से पैदल रास्ते. गाड़ गदेरों पर पुलों का भी अभाव है. गांव के युवा कैलाश बताते हैं कि बीमार होने पर लोगों को कंधे पर या फिर डोली में बैठाकर सडक़ मार्ग तक लाना पड़ता है. कई बार बीमार व्यक्ति रास्ते में ही दम तोड़ देता है.

इन दिनों कोरोना वैक्सीन लगाई जा रही है. मुख्यमंत्री के आदेश हैं कि सुदूर गांवों तक सबसे पहले बुजर्गों को वैक्सीन लगाई जाए. इसी को लेकर लोग वैक्सीन लगवाने के लिए स्वास्थ्य केन्द्रों की ओर जा रहे हैं. बुर्जग आठ किलोमीटर पैदल दूरी तय कर नौगांव ब्लॉक के सरनौल में वैक्सीन लगाने जा रहे हैं. इनको इन्हीं उबड़ खाबड़ रास्तों से होते हुए वापस गांव भी आना है. कम से कम इसमें आठ से नौ घंटे जाया होंगे. ये अलग बात है कि सरकारी फाइलों में इन्हीं के गांव में बनाए गए उपकेंद्र सरबडियार में वैक्सीनेशन होना दिखाया गया है.

उत्तरकाशी जिले के सीएमओ डीपी जोशी ने भारत सरकार की गाइड लाइन का हवाला दिया. सीएमओ के अनुसार गाइड लाइन में लिखा गया है कि वैक्सिनेशन सेंटर के आसपास आधा किलोमीटर परिधि में एंबुलेंस होनी चाहिए, ताकि रिएक्शन की दशा में तत्काल हॉस्पिटल भेजा जा सके. चूंकि सरबडियार में सडक़ नहीं जाती इसलिए वहां वैक्सीनेशन कराना संभव नहीं है.दूसरी ओर सामान्य तौर पर देखें वैक्सिनेशन में आधा घण्टा ऑब्जर्वेशन में रखने के बाद तक तो व्यक्ति सामान्य रह रहा है. लेकिन, बाद में उसे फीवर की शिकायत हो रही है. ये फीवर 102, 105 डिग्री तक भी जा रहा है. ऐसी हालत में कोई बुजर्ग आदमी कैसे पहाड़ के उबड़ खाबड़, पथरीले रास्तों पर सफर तय करेगा. हालांकि, सीएमओ डीपी जोशी का कहना है कि इस संम्बंध में शासन को अवगत करा दिया गया है. यदि गाइड लाइन में कुछ चेंज होता है, तो गांव-गांव में जाकर वैक्सिनेशन किया जाएगा.

पहाड़ के सैकडों गांव सडक़ से मीलों दूर हैं. अगर उत्तरकाशी की सरबडियार घाटी का उदाहरण लें, तो फिर दूर दराज के इन इलाकों में  कैसे वैक्सिनेशन हो पाएगा. मतलब साफ है न बुर्जग मीलों पैदल चल पाएंगे और न स्वास्थ्य विभाग पैदल गांव पहुंच पाएगा. तो फिर कैंसे होगा वैक्सीनेशन.



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