उत्तराखंड राशन घोटाले में बड़ी कार्रवाई: 5 अधिकारी और कर्मचारियों से 1.44 करोड़ रिकवरी का आदेश

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देहरादून. उत्तराखंड (Uttarakhand) में गरीबों के हिस्से का 11 हजार कटटों से अधिक राशन चट कर दिया गया. इसमें घोटाला करने वाले फूड एंड नागरिक आपूर्ति विभाग के पांच अधिकारी और कर्मचारियों पर एक करोड़ 44 लाख पचास हजार की रिकवरी के आदेश जारी कर दिए गए हैं. ये आदेश घोटाला सामने आने के करीब दो साल बाद हुए हैं. मामले में मुख्य रूप से दोषी पाए गए तत्कालीन केंद्र प्रभारी अब रिटायर भी हो गए हैं.

राजधानी देहरादून के ट्रांसपोर्टनगर में स्थित सरकारी खाद्यान्न गोदाम से साल 2018 में जरूरतमंदों के हिस्से के चावल के 8180 कटटे चावल, 2317 गेहूं व कुछ चीनी के कटटे गायब मिले थे. शासन ने तत्काल 22 नवंबर 2018 को इस गोदाम का चार्ज देख रहे केंद्र प्रभारी कैलाश चंद्र पांडेय को सस्पेंड कर वित्त नियंत्रक, खाद्य और मुख्य विपणन अधिकारी खाद्य की संयुक्त जांच टीम बना दी. जांच टीम की रिपोर्ट के आधार पर 26 दिसंबर 2018 को मुख्य आरोपी केंद्र प्रभारी कैलाश चंद्र पांडेय को आरोप पत्र सौंपा गया. इस पूरी प्रक्रिया में पूरा एक साल गुजार दिया गया. आरोप पत्र में पांडेय ने जो जवाब दिया वो संतोषजनक नहीं पाए जाने पर एक साल बाद 22 दिसंबर 2019 को संभागीय खाद्य नियंत्रक कुमाऊं ललित मोहन रयाल को मामले की जांच सौंपी गई.

रयाल ने जब अपनी रिपेार्ट सौंपी तो आरोपी पांडेय ने विभागीय अधिकारियों पर कूटरचित षडयंत्र करने का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रकरण की जांच किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी या डीएम से कराई जाए. इस पर डीएम देहरादून को पूरे प्रकरण की जांच सौंपी गई. डीएम देहरादून ने चार नवंबर 2020 को शासन को अपनी रिपोर्ट सौंपी. रिपोर्ट में एक बार फिर तत्कालीन केंद्र प्रभारी कैलाश चंद्र पांडेय को मुख्य रूप से दोषी पाया गया. जांच रिपोर्ट में कहा गया कि इससे राजकोष को 1 करोड़ 44 लाख 54 हजार की हानि हुई. तीन-तीन जांचों के बाद भी मामले को करीब आठ महीने तक लटकाया गया. न्यूज 18 ने जब विभागीय मंत्री बंशीधर भगत से इस मामले में सवाल किए तो उन्होंने फाइल तलब की और फिर जाकर मामले में एक्शन होना शुरू हुआ.

गुरुवार को रिटायर हो चुके तत्कालीन केंद्र प्रभारी कैलाश चंद्र पांडेय के अलावा विपणन निरीक्षक लियाकत हुसैन, इशरत अजीम, विपणन सहायक दिनेश लाल समेत चार कर्मचारियों से एक करोड़ 44 लाख पचास हजार की धनराशि के रिकवरी आदेश जारी कर दिए गए. आदेश के अनुसार पूरी धनराशि की पचास फीसदी रकम मुख्य रूप से दोषी रिटायर हो चुके तत्कालीन केंद्र प्रभारी कैलाश चंद्र पांडेय से वसूली जाएगी. शेष पचास फीसदी धनराशि की भरपाई चारों कर्मचारियों से की जाएगी.

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