कांग्रेस नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम का बड़ा बयान, बोले- 2022 में किसी ब्राह्मण को मिले यूपी सीएम की कुर्सी

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कांग्रेस नेता एवं कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम. (फाइल फोटो)

कांग्रेस नेता एवं कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम (Acharya Pramod Krishnam) ने मेरठ में भगवान परशुराम की प्रतिमा के अनावरण के अवसर ब्राह्मण कार्ड खेलने नहीं चूके. उन्‍होंने कहा,’ वो चाहते हैं कि 2022 में उत्तर प्रदेश का होने वाला मुख्यमंत्री ब्राह्मण हो.

मेरठ. भगवान परशुराम की प्रतिमा के अनावरण के अवसर पर भी कांग्रेस नेता एवं कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम (Acharya Pramod Krishnam) ब्राह्मण कार्ड खेलने से बाज नहीं आए. मेरठ के हस्तिनापुर में आज 21 फीट ऊंची परशुराम की प्रतिमा का अनावरण (Parshuram Statue Unveiled) किया गया. इस कार्यक्रम में कई दलों के नेता पहुंचे. इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जेडीयू के केसी त्यागी (KC Tyagi), कांग्रेस के आचार्य प्रमोद कृष्णम, बीजेपी के राज्यमंत्री सुनील भराला और समाजवादी पार्टी के नेता सन्तोष पाण्डेय शामिल हुए. इस बीच कांग्रेस से जुड़े आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि पिछले सालों से यूपी में कोई ब्राह्मण मुख्यमंत्री नहीं हुआ है. वो चाहते हैं कि 2022 में उत्तर प्रदेश का होने वाला मुख्यमंत्री ब्राह्मण हो. यानी परशुराम की प्रतिमा के अनावरण के मौके पर भी राजनीतिक बाज़ियां खूब खेली गईं. वहीं किसान आंदोलन पर बोलते हुए प्रमोद कृष्णम ने कहा कि किसानों को सरकार पर भरोसा नहीं है.

जेडीयू के नेता केसी त्यागी ने कहा कि वह भगवान परशुराम की मूर्ति का अनावरण करने हस्तिनापुर आए हैं. इस बीच किसान आंदोलन पर बोलते हुए कहा कि किसानों को भी और सरकारों को भी एक बीच का रास्ता निकालना चाहिए, इतनी ठंड में पिछले 50 दिनों से किसान बैठे हुए हैं. इसके अलावा कोरोना वैक्सीन हो रही राजनीति पर उन्होंने कहा कि यह वैज्ञानिकों का और चिकित्सकों का एक अनूठा प्रयास है. बड़ी मुश्किल से मानवता के लिए इसका विकास हुआ है, इसको लेकर के किसी तरह का भ्रम या राजनीति नहीं करनी चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाई कमेटी पर त्‍यागी ने कही यह बात
कृषि कानूनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा जो कमेटी बनाई गई है उस पर जेडीयू नेता केसी त्यागी ने कहा कि जो कमेटी बनी है उसकी क्रिएटिविटी नहीं है. कमेटी में वह लोग हैं, जो कि नई आर्थिक नीति के समर्थक हैं. मैं कई को निजी तौर पर जानता हूं. वह किसानों की मांग के पक्ष में नहीं है.


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