कानपुर से 7 साल में लापता नाबालिगों में 102 का नहीं मिला कोई सुराग, भिखारी गैंग के हत्थे चढ़ने की आशंका

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रिपोर्ट : अखंड प्रताप सिंह

कानपुर. कानपुर महानगर में बीते दिनों भिखारी गैंग से जुड़ा हुआ एक सनसनीखेज मामला सामने आया है. जिसके बाद से लापता बच्चों को लेकर कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं. कानपुर के सुरेश मांझी को भिखारी गैंग द्वारा दिल्ली में बेचा गया था. लेकिन वह किसी तरह उनके चंगुल से निकल भागा और कानपुर पहुंचा. इसके बाद ही इस मामले का खुलासा हुआ है.

इस वारदात के सामने आने के बाद कानपुर में ह्यूमन ट्रैफिकिंग को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं. एक सवाल यह भी है कि कानपुर से जो बच्चे अभी तक लापता हुए हैं, कहीं वे भी भिखारी गैंग के चंगुल में तो नहीं फंसे हैं? हालांकि कानपुर के पुलिस कमिश्नर का कहना है कि गहनता से पूरे मामले की जांच की जा रही है.

7 साल में 102 मासूम लापता

स्पेशल जुवेनाइल पुलिस यूनिट के रिकॉर्ड के मुताबिक, कानपुर में वर्ष 2022 में 179 बच्चे लापता हुए थे. इनमें से 46 बच्चे खुद लौट आए, जबकि कई बच्चों की तलाश पुलिस ने की जिनमें 22 बच्चे अभी भी लापता हैं. ऐसे ही कुछ आंकड़े इससे पहले के वर्षों के भी हैं. 2021 में लापता हुए बच्चों में से अभी तक 13 बच्चों का कोई सुराग नहीं लगा है. 2020 में लापता हुए बच्चों में 21 अभी गायब हैं.2019 में लापता हुए बच्चों में से 20 का अभी तक पता नहीं लगा है. बीते 7 सालों की बात की जाए तो 7 साल में 102 नाबालिग लापता हुए हैं, जिनका कोई पता पुलिस अभी तक नहीं लगा सकी है. इन 102 में 59 बच्चियां हैंस जबकि 43 बच्चे.

यह बोले पुलिस आयुक्त

कानपुर के पुलिस आयुक्त बीपी जोगदंड ने बताया कि कानपुर से लापता बच्चों की बात की जाए तो हर साल कई मामले सामने आते हैं. जिनमें से रिकवरी रेट की बात की जाए तो 90% बच्चे रिकवर कर लिए गए हैं. हालांकि जो बच्चे अभी तक गुम हैं उनके विषय में भी पुलिस जांच कर रही है. वहीं ह्यूमन ट्रैफिकिंग के मामले में उन्होंने कहा कि जितने बच्चे अभी तक रिकवर किए गए हैं उनमें से किसी भी बच्चे ने मानव तस्करी की बात नहीं बताई है या फिर किसी भिखारी गैंग के बारे में नहीं बताया है. फिर भी सुरेश मांझी के मामले को देखते हुए पड़ताल की जा रही है.

Tags: Human trafficking, Kanpur news, UP news



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