काया-माया के नइहे ठिकाना!– News18 Hindi

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बिहनिया ले का चांटी चाब दिस, तेकर गम नइ पायेंव. अब्बड़ बिछियावत रिहिस हे, जीव करलागे. कोन जनि तेलासी हे के अउ कोनो दुसर, एती ओती देखेंव नजर नइ अइस. अब नान चीन चांटी, थोर-बहुत बड़ेक जनिक होतिस तब देखउन देतिस. अब का करबे, करलावत ले रहिगे जीव हा.

बात बिहनिया के हे, तब ए बेरा मं कुछु असगुन हो जथे न, तब मन मं खटका हो जथे, कइसन-कइसन बिचार उठे ले धर लेथे? कइसे गुजरही आज के दिन हा, कांही आन-तान तो नइ हो जाही? मन बइरी हे, बइमान हे, एक तीर कभू थिर-थार नइ रहय. कतको बरजबे, चेताबे फेर जब करही तब ओहर अपन मन के. अब दोगला परे हे ओहर, तउन ला कोन का कर सकत हे.

बने बिहनिया चाहा पानी पी के बारी कोती साग-सब्जी नइहे घर मं आज, थोकन खेड़हा ला उखान देथौं, काल के कुम्हड़ा बाचे हे तेकर संग मं बने जोंग दिही. अतके बेर कोन कोती ले मोर कान मं गजब सुघ्घर जुन्ना गाना टकरागे. गीत-संगीत के महूँ हा नान-पन के लहरिया हौं, ओ गाना ला सुन के मन अइसे बहियागे जइसे कोनो सोलह बछर के पुतरी असन चक चक ले सुन्दर छोकरी ला देखके टूरा मन मंद पिए असन मात जथे.

ए गीत के मुड़ी पूछी तो धरउन नइ देवत हे फेर जतके पकड़ मं आवत हे तेला लोरमियावत हौं-‘काया माया के नइ हे ठिकाना लहर गंगा ले लेतेन जोड़ी’. अब अतेक सुघ्घर गाना जेकर कान भीतर जाही तब रसिक मन कइसे नइ मातही. बने ओ गीत ला गन-गुनावत, मस्ती मं झुमरे ले धरत रेहेंव ततके बेर चांटी अपन खेल ला देखा दिस. खेड़हा ला बने ढंग ले उखाने नइ पाय रेहेंव, चुरमुरावत ले रहिगेंव. ओला जइसने पायेंव तइसने गारी गुफतार लगायेंव. एकर ले जादा ओकर कुछु नइ बिगाड़ सकेंव.

जतके उखाने रेहेंव ततका खेड़हा ला गोसइन करा ला के पटक देंव. ओहर कहिथे-कस हो, अरे उखाने हस तब थोकन बने जादा नइ उखाने रहितेस, साग के पूरती अतके कन हा का होही? गोसइन के बात ला सुन के मइनता भड़कगे, एक तो चांटी चाबे रिहिस हे तेकर सेती चेत-बिचेत होवत रिहिस हे. ओला टेर्राहा बोली मं केहेंव-तोला उखाने के परे हे, जा बारी मं जतके उखानना हे उखान ले खेड़हा ला. चांटी चाब दे हे जीव करलावत हे अउ तोला उखाने के परे हे. मोर ठेठ भाखा ला सुनिस तहां ले ओकर बोलती बंद हो गे.

राम राम के बेरा मं जइसन नइ सोचे रहिबे तइसन अलकरहा होय ले धरथे न तहां ले सबो काम-बुता गड़बड़ाय ले धर लेथे. कतेक जुन्ना गीत अउ कइसन दिन मं भाग जाने असन मोला आज सुने ले मिले रिहिस हे तउन सब रंग मं भंग होगे.

‘काया-माया के नइ हे ठिकाना’ – अहा…हा..हा..हा, कइसन सुघ्घर गाना हे तोला का बतावंव रे चांटी, आजे तहूँ ला झपाना रिहिस हे कोरोना बरोबर. सत्यानाश होय तोर अउ ओ बइरी कोरोना के. कतेक झन दाई, बेटी, बहिनी, भउजी, काकी, मामी, भाई अउ संगवारी मन के जान के दुश्मन बनगे. पूरा देश ला स्वाहा करे के परन लेके आय हे तइसे लागथे. देश बिदेश के लाखो करोड़ो मनखे ला भख डरे, रे बइमान तैंहर. का तोर मन मं समाय हे, तैं कोन हस, शैतान, भूत-परेत, बैताल, यक्ष, राक्छस? कहाँ ले तैं आय हस, कहाँ तोर ठउर-ठिकाना हे, बड़े बड़े देश के राष्ट्रपति, प्रधान मंत्री, रक्षा मंत्री अउ सेनापति मन तक ला तैंहर गच्चा देके कोन मेर बइठ के चैन के बंसी बजावत हस. तोर रंग-रूप कइसना हे ते तैं निरगुन भगवान सही ‘कर बिनु करम करय बिधि नाना’ असन खेल खेलत हस. पूरा संसार पुजरत हे.

का बिचार हे तोर, का चाहत हस तैं, ककरो कांही समझ नइ परत हे? चेत बिचेत होगे हे. सोचथे आन अउ हो जथे आन. सरकार अउ जनता के हौसड़ा गरम कर दे हस. जवान-जवान बेटा, बेटी, दाई, ददा, झोरफा के झोरफा बटोर के लेगत हस रे बइमान. हजारों अनाथ होगे, ओकर आगू पीछु कोनों देखइया, संभलइया नइ रहिगे. कतको के चीज-बस, पूंजी-पसरा, खेती-खार, घर-दूआर, कल-कारखाना के देखइया नइ बाचे हे. बैंक मं बटोर बटोर के धन जमा करे हे, ओला कोन खाहीं, काकर काम आही?

‘काया-माया के नइ हे ठिकाना’, ए गीत के एक एक अक्षर, शब्द ला गुनत हौं, मोर रुआ ठाढ़ होवत जात हे. कुछु नइ रखे हे ए जिनगानी. मोर मोर काहत हन, कमा कमा के, पर के गर ला रेत रेत के धन बटोरत हन, बइमानी, भ्रष्टाचार, लूट-खसोट कर-कर के काकर बर जमा करत हौं. कोरोना देखा दिस, बता दिस. कतको अइसे माल धनी निकलगे, कोरोना देखा दिस उपर कोती के रसता. ओकर मन के उमर नइ होय रिहिस अभी जाय के फेर ओकर आघू मं ककरो नइ चलत हे? ये काया माया, कउड़ी काम के नइहे. चार दिन के जिनगानी हे. इही पाके ए दिन जीना हे तब हंसी-खुशी जी लौ. का फालतू ककरो संग बैर करना. परेम से लहर गंगा मं डूबकी लगाय बरोबर चुभुक-चुभुक नहां धो लौ रे भाई. का भरोसा ओ बइमान कोरोना के, के कतका बेर, कोन मेर कहाँ सपड़ा लिही अउ मुरकेट दिही टोटा ला चियां बरोबर ते कोनों गम नइ पाहौ.

जउन गीत ला मैं सुन के बउरागे रेहेंव तेकर बोल ए दइसन हे. बड़ मजेदार गीत हे-

ये दे जिनगी के नइहे ठिकाना, लहर गंगा ले लेतेन जोड़ी.

काया माया के नइहे ठिकाना लहर-गंगा ले लेतेन जोड़ी..

(डिस्क्लेमर : ये लेखक के विचार हैं)

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