किसानों के समर्थन में उतरे पूर्व विधायक भरत सिंह छोकर ने BJP छोड़ा, बोले- किसानों के साथ मजाक कर रही है सरकार

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पत्रकार वार्ता में बीजेपी छोड़ने के बारे में जानकारी देते पूर्व विधायक (बीच में) भरत सिंह छोकर.

किसानों (Farmers) के समर्थन में उतरे समालखा के पूर्व विधायक (Ex MLA) भरत सिंह छोकर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बीजेपी (BJP) छोड़ने का ऐलान कर दिया है. छोकर ने कहा कि आंदोलनकारी किसानों (Farmers) की सरकार बात नहीं सुन रही है. इसलिए उन्होंने बीजेपी छोड़ दिया है.

पानीपत. नए कृषि कानून (Agricultural law) का विरोध करने वाले किसानों (Farmer) के समथर्न में उतरे समालखा से पूर्व विधायक भरत सिंह छोकर (Bharat Singh Chokhar) ने बीजेपी (BJP) छोड़ दी है. उन्होंने घर में पत्रकार वार्ता कर बीजेपी छोड़ने की घोषणा की है. पूर्व विधायक और बीजेपी नेता भरत सिंह छोकर ने कहा कि दिल्ली (Delhi) की सीमाओं भीषण ठंड में डटे किसान आंदोलन कर रहे हैं. लेकिन सरकार उनकी बात नहीं सुन रही है, जिसके कारण वो बीजेपी छोड़ रहे हैं.

बेमौसम बारिश और कड़के की ठंड से 40 से ज्यादा किसानों की जान जा चुकी है, लेकिन मोदी सरकार किसानों की मांग पर ध्यान नहीं दे रही है. इसी के चलते किसानों के समर्थन में वह भारताय जनता पार्टी(BJP) को छोड़ रहे हैं. पूर्व विधायक ने कहा कि बीजेपी सरकार ने किसानों के ऊपर तीन काले कानून थोपकर बेहद ही गलत काम किया है, जिसकी मैं कड़ी निंदा करता हूं.

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दूसरी और किसान शांतिपूर्ण तरीके से लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं उसके बावजूद भी सरकार उनकी बात सुनने को तैयार नहीं है. उन्होंने कहा कि सरकार किसानों के साथ मजाक कर रही है और काले कानूनों को उन पर थोपा जा रहा है. सरकार बड़े-बड़े व्यापारियों का समर्थन कर रही है और जो भंडारण की नीति दी गयी इससे खुलेआम कालाबाजारी करने का मौका दिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि वह हमेशा किसानों के साथ है.बता दें कि भरत सिंह छोक्कर कांग्रेस पार्टी से साल 2004 में समालखा से विधायक चुने गए थे. साल 2009 में कांग्रेस ने यहां पर संजय छोक्कर को टिकट दे दिया था, जिससे वो नाराज हो गए और उन्होंने पार्टी छोड़ दी थी. इसके बाद हजकां में भी उन्होंने राजनीति की. उन्होंने अपना राजनीतिक करियर बसपा से शुरू किया था. पिछले चुनाव में भाजपा का दाम थाम लिया था. हालांकि इससे पहले भी वह भाजपा में रह चुके हैं. इस बार उन्हें उम्मीद थी कि पार्टी उन्हें टिकट देगी पर ऐसा नहीं हुआ. फिर भी पार्टी में बने रहे, लेकिन अब किसान आंदोलन का समर्एथन करने के बहाने भाजपा को अलविदा कह दिया.


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