किसान के बेटे ने जीता गोल्ड, टोक्यो पर टिकीं ऐश्यर्व की निगाहें

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एश्वर्य 50 मीटर थ्री पोजिशन में भारत का प्रतिनिधित्व करते हैं.

मध्य प्रदेश के खरगौन जिले में एक छोटा सा गांव है रतनपुर. इसी छोटे से गांव से ताल्लुक रखते हैं ऐश्वर्य. देश को ओलंपिक का कोटा दिलाने वाले ऐश्वर्य प्रताप सिंह तोमर ने अपने खेल से सभी को आश्चर्यचकित किया है. ISSF में शानदार प्रदर्शन के बाद उनकी निगाहें टोक्यो ओलिंपिक (Tokyo Olympics 2021) पर टिकी हैं.

नई दिल्ली: देश की राजधानी नई दिल्ली में इन दिनों ISSF शूटिंग वर्ल्ड कप का आयोजन हो रहा है. भारत के शूटर्स ने इस टूर्नामेंट में अपने प्रदर्शन से सबको सम्मोहित कर दिया है. ऐसे ही शूटर हैं एश्वर्या प्रताप सिंह. युवा भारतीय निशानेबाज ऐश्वर्य प्रताप सिंह तोमर ने बुधवार को दिल्ली आईएसएसएफ विश्व कप की पुरुषों की 50 मीटर राइफल थ्री पोजिशन इवेंट में गोल्ड मेडल अपने नाम किया और मेजबान देश का शीर्ष पर स्थान मजबूत किया. अब उनकी निगाहें टोक्यो ओलिंपिक पर हैं. ऐश्वर्य टोक्यो ओलंपिक के लिए कोटा हासिल कर चुके हैं. उन्होंने 2019 एशियाई निशानेबाजी चैम्पियनशिप की 50 मीटर राइफल थ्री पोजिशन इवेंट में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर भारत के लिए ओलंपिक कोटा हासिल किया था. उनके साथ देश को उम्मीद है कि वह इस बार ओलिंपिक में देश का प्रतिनिधित्व करेंगे और देश को कामयाबी दिलाएंगे.

NEWS18 से बातचीत में ऐश्वर्य अपनी इस कामयाबी पर काफी खुश हैं. वह कहते हैं कि इसके बाद जिम्मेदारी और बढ गई है. इसलिए अपनी तैयारी को फोकस तरीके से करना हैं. मध्य प्रदेश के खरगौन जिले से ताल्लुक रखने वाले ऐश्वर्या का सफर इतना आसान नहीं रहा. इसमें कुछ कुछ नाकामी है, ढेर सारा संघर्ष है. इसके बाद वह इस मुकाम पर हैं कि देश उनसे बडी कामयाबी की उम्मीद कर रहा है. आइए जानते हैं उनका सफर…..

मध्य प्रदेश के खरगौन जिले में एक छोटा सा गांव है रतनपुर. इसी छोटे से गांव से ताल्लुक रखते हैं ऐश्वर्य. देश को ओलंपिक का कोटा दिलाने वाले ऐश्वर्य प्रताप सिंह तोमर ने अपने खेल से सभी को आश्चर्यचकित किया है. आज ऐश्वर्य देश के आइकान हैं, उन्होंने यह मुकाम अपनी मेहनत से हासिल किया है. एक समय ऐसा भी था तब जब उनके भविष्य को लेकर उनके परिवार वाले बहुत चिंतित थे. ऐश्वर्य का जन्म 3 फरवरी 2001 में खरगोन जिले की झिरनिया तहसील के छोटे गांव रतनपुर में हुआ था. पिता बहादुर सिंह तोमर पेशे से कृषक हैं और माता श्रीमती हेमा तोमर गृहणी हैं. उनकी दो बड़ी बहने हैं. बहादुर सिंह भी अपने समय के अच्छे कबड्डी खिलाड़ी रहे हैं.

किसान के बेटे ने जीता गोल्ड, टोक्यो पर टिकीं ऐश्यर्व की निगाहें

एश्वर्य प्रताप सिंह.

ऐश्वर्य को शूटिंग की तरफ मोडने में उनके चचेरे भाई का हाथ रहा. उन दिनों उनके चचेरे भाई नवदीप सिंह राठौड़ जो म.प्र. शूटिंग अकादमी में थे, उन्होंने अपने छोटे भाई एश्वर्य की मदद कर उन्हें खेलों से जोड़ने का प्रयास किया. वर्ष 2014 में अकादमी में प्रवेश के पहले प्रयास में ऐश्वर्य सफल नहीं हो सके, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और फिर से मेहनत कर 2015 में फिर ट्रायल दिया और सफल हुए. इसके बाद उन्होंने पीछे मुडकर नहीं देखा. अकादमी में उन्हें सहीं राह मिली, यहां अंतर्राष्ट्रीय सुविधाओं के साथ अंतर्राष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षकों का मार्गदर्शन मिला और सफलता का दौर प्रारंभ हो गया. ऐश्वर्य ने 2014 में अपने पहली स्टेट चैंपियनशिप इंदौर में स्वर्ण पदक जीतकर अपने विजयी अभियान की शुरूआत की. इसी वर्ष केरल में राष्ट्रीय चैंपियनशिप में भी उन्होंने स्वर्ण पदक जीतकर अपने चयन को सही साबित किया.

ऐश्वर्य को कैरियर का सबसे अहम मुकाम जर्मनी के शूल में आयोजित आईएसएसएफ में 50 मीटर थ्री पोजीशन राइफल इवेंट में मिला, जहां उन्होंने वर्ल्ड रिकार्ड के साथ रजत पदक जीता. उनके इस प्रदर्शन के बाद सभी की निगाहें उनके हर इवेंट पर पर रखी जाने लगी. ऐश्वर्य ने दोहा एशियन शूटिंग चैंपियनशिप में सभी को चकित करते हुए 1168 अंक हासिल कर फाइनल में प्रवेश किया और भारत को टोक्यो ओलंपिक का कोटा दिलाया.



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