केंद्र सरकार के रुख से बिहार को लगा झटका, जानें क्या है पूरा मामला central minster nityanand rai denied demand of caste based census in loksabha bramk– News18 Hindi

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पटना. जातिगत जनगणना के मामले को लेकर बिहार को बड़ा झटका लगा है. खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जातीय जनगणना (Caste Based Census) को लेकर पक्ष में बयान देते रहे हैं. लालू प्रसाद यादव भी जातीय जनगणना की मांग बराबर करते रहे हैं. इधर हाल के महीनों में तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) ने भी जातीय जनगणना के मुद्दे को प्रमुखता के साथ उछाला है लेकिन केंद्र सरकार ने इस मामले को लेकर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है. ऐसे में सरकार के फैसले से बिहार के सक्रिय राजनीतिक दलों को गहरा झटका लग सकता है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) ने कहा था कि जातीय आंकड़े की जनगणना इसलिए जरूरी है क्योंकि इससे हर तबके की तरक्की के लिए सही स्थिति स्पष्ट होगी.

राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने इसे लंबे अरसे तक मुद्दा बनाकर रखा था. बिहार  की लगभग सभी सियासी पार्टियों ने यह मांग अपने स्तर पर बराबर जारी रखी. हाल के दिनों में तेजस्वी यादव इस मामले को लेकर काफी मुखर रहे हैं लेकिन लोकसभा में एक सवाल में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने यह बताया कि 2021 की जनगणना के साथ केंद्र सरकार केवल एससी-एसटी वर्ग के लोगों की गिनती कराने के पक्ष में है. केंद्र सरकार का यह फैसला राजद-जदयू समेत बिहार के लगभग सभी राजनीतिक दलों की भावनाओं के उलट है.

दरअसल बिहार विधान मंडल के दोनों सदनों द्वारा जाति आधारित जनगणना कराने के पक्ष में 2–2 बार सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजा गया है. पहली बार 2019 में और फिर अगले साल 2020 में दोनों सदनों द्वारा इस तरह का प्रस्ताव भेजा गया है. यही नहीं दोनों सदनों में भाजपा के सदस्यों ने भी जातिगत जनगणना कराए जाने के पक्ष में अपना समर्थन दिया था लेकिन केंद्र के इस रूप के बाद निश्चित तौर पर बिहार में सियासत भी होगी.

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