कोरोना संकट के बीच बच्चों को घर-घर जाकर पढ़ा रही हैं ये टीचर, सोशल डिस्टेसिंग का रखती हैं ख्याल

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बच्चों को पढ़ाई करातीं शिक्षिका.

छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के मुंगेली (Mungeli) जिले में कुछ शिक्षक बच्चों के बेहतर शिक्षा के लिये प्रयास में जुटे हुए हैं.

मुंगेली. कोरोना वायरस (Corona Virus) के संक्रमण के खतरे को देखते हुए पिछले पांच महीनों से स्कूल (School) बंद हैं. ऐसे में छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के मुंगेली (Mungeli) जिले में कुछ शिक्षक बच्चों के बेहतर शिक्षा के लिये प्रयास में जुटे हुए हैं. कोरोना काल में मुंगेली शिक्षा विभाग ने पढ़ाई तुमर द्वार योजना की शुरूआत की थी, जिससे बच्चों की पढाई प्रभावित न हो. ऑनलाइन क्लास, गली मोहल्ला क्लास की तरह ही एक शिक्षिका सृष्टि शर्मा ने भी नई पहल की है, जिसमें घर-घर जाबो लइका ल पढ़ाबो स्लोगन के साथ बच्चों को एकत्र कर पढ़ाई कराई जा रही है.

शिक्षिका सृष्टि शर्मा के अनुसार जिस मोहल्ले से बच्चों का कॉल आता है, वहां जाकर बच्चों के ही आंगन, बरामदे या छत पर बच्चों की क्लास ली जाती है और बच्चों की समस्याओं का हल किया जाता है. इन मोहल्ला क्लासों में सभी स्कूलों के छात्र-छात्राएं शिक्षा ग्रहण करते हैं. अलग अलग जगहों पर 4-5 क्लास ये शिक्षिका लेती हैं, जिसमें सोशल डिस्टेंसिंग मास्क औऱ कोविड के प्रोटोकॉल का पालन करते कुल 50-60 बच्चो को ये पढ़ा रही हैं.

नि:शुल्क मिल रही शिक्षा
शिक्षिका के इस अनोखे प्रयास से बच्चों को बेहतर शिक्षा निशुल्क मुहैय्या कराया जा रहा है. एक तरफ जहां लोग ड्यूटी से भागने, अवकाश पर अवकाश लेने या मोटी ट्यूशन फीस वसूलने के आरोप शिक्षकों पर लगते हैं. वहीं दूसरी ओर इस शिक्षिका के काम को हर ओर सराहना मिल रही है. शिक्षा के लिये कार्य करने वाले मुंगेली जिले के ऐसे शिक्षकों की जिला शिक्षाधिकारी जीपी भारद्धाज भी तारीफ कर रहे हैं. कलेक्टर भारद्वाज का कहना है कि कोरोना संक्रमण में भी सुरक्षा मापदंडो के अनुरूप बच्चों को आॅनलाइन के साथ साथ उनके घर गांव गली मोहल्ले में जाकर पढाई पूरी करा रहे हैं, ऐसे शिक्षक एक तरह से समाज में मिसाल हैं.

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