खुद कोरोना पॉजिटिव हैं लेकिन आइसोलेशन में रहकर 500 लोगों की रोज कर रहे हैं मदद

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सिर्फ सेवा भाव से इस संकट की घड़ी में यह 4 सदस्यीय ग्रुप काम कर रहा है.

Bhopal. प्रशांत पांडे और उनकी टीम 7 दिन से लगातार जरूरतमंद लोगों को फूड पैकेट और दवा उपलब्ध करा रही है. हर रोज 500 से ज्यादा लोगों की मदद का टारगेट रखा गया है.

भोपाल. राजधानी भोपाल में कोरोना (Corona) की चपेट में आए लोगों की लिए लगातार मदद के हाथ उठ रहे हैं. खुद कोरोना पॉजिटिव हैं, लेकिन वह आइसोलेशन में रहकर अपनी टीम की मदद से जरूरतमंदों को रोटी दवाई हर बात का इंतजाम जमीनी स्तर पर कर रहे हैं. हर रोज 500 लोगों की मदद की जा रही है. टीम में 4 लोग शामिल हैं. हर सदस्य कोरोना की लड़ाई जीत कर अब लोगों की मदद में जुटा है. भोपाल में रहने वाले प्रशांत पांडे, अविनाश सिंह चौहान, नीता बाथवा, शांतनु सक्सेना उन लोगों के लिए इसी मसीहा से कम नहीं हैं जिन लोगों को इस संकट की घड़ी में दवा से लेकर खाने तक के लिए मोहताज होना पड़ रहा है. ऐसे लोगों तक रोजाना यह ग्रुप मदद पहुंचा रहा है. खाने के 500 पैकेट रोज सप्लाई प्रशांत पांडे ने बताया कि हमारी टीम रोज 500 लोगों को फूड के पैकेट के साथ जरूरतमंदों को दवाई उपलब्ध कराती है. हम अस्पतालों के अंदर और बाहर जरूरतमंदों को खाना मुहैया कराते हैं. इसके अलावा दवाओं की सप्लाई भी मरीज और उनके परिजनों को की जा रही है। उन्होंने बताया कि फूड के लिए एक कम्युनिटी किचन की शुरुआत की गई है.कोरोना पॉजिटिव होने के बाद भी घर से मदद… प्रशांत पांडे ने बताया कि हमारी टीम में शामिल शांतनु सक्सेना कोरोना पॉजिटिव हैं और होम आइसोलेशन में हैं. लेकिन वो पूरी टीम को घर पर सोशल मीडिया के जरिए और फोन के जरिए लॉजिस्टिक के साथ तमाम मदद पहुंचा रहे हैं. इसके अलावा वह और उनकी टीम के दूसरे सदस्य भी कोरोना पॉजिटिव हुए थे लेकिन अब वह सब ठीक हैं. शांतनु भी जल्द ठीक हो जाएंगे और फील्ड पर हमारी टीम के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करेंगे.

खुद कोरोना पॉजिटिव हैं लेकिन आइसोलेशन में रहकर 500 लोगों की रोज कर रहे हैं मदद

हर रोज 500 से ज्यादा लोगों की मदद… प्रशांत पांडे और उनकी टीम 7 दिन से लगातार जरूरतमंद लोगों को फूड पैकेट और दवा उपलब्ध करा रही है. हर रोज 500 से ज्यादा लोगों की मदद का टारगेट रखा गया है. सरकारी अस्पतालों में कुछ दवा भी लोगों को उनके पर्चे के अनुसार दी जाती है. इसके अलावा सोशल मीडिया पर जारी किए गए खुद के नंबर पर जब फोन आते हैं तो उनकी टीम तत्काल संबंधित मदद को उन तक पहुंचाती है. इस टीम को किसी भी प्रचार-प्रसार की जरूरत नहीं है. इसलिए इन्होंने अपने ग्रुप का कोई भी नाम नहीं दिया है. सिर्फ सेवा भाव से इस संकट की घड़ी में यह 4 सदस्यीय ग्रुप काम कर रहा है.



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