गाजियाबाद में दिखेगा गुजरात का रंग, नवरात्र को और स्पेशल बनाने के लिए महिलाएं कर रहीं खास तैयारी

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रिपोर्ट: विशाल झा

गाजियाबाद. कोविड काल के एक लंबे समय के बाद अब त्योहारों में पहले जैसी रौनक दिखने लगी है. बाजार सजने लगे हैं और ग्राहक घरों से बाहर निकलकर खरीदारी भी करने लगे हैं. त्योहारों के इस सीजन में अगला त्योहार नवरात्र है. जिले में नवरात्र के लिए एक ओर रामलीला मंचन की तैयारियां जोरशोर से चल रही हैं, तो वहीं दूसरी तरफ जिले की महिलाएं नवरात्र के अपने उत्सव में चार चांद लगाने के लिए गरबा और डांडिया सीख रहे हैं. रामप्रस्थ ग्रीन सोसाइटी में रहनेवाली महिलाएं गरबा और डांडिया का प्रशिक्षण ले रही हैं.

डांडिया और बजने वाली धुन से कॉन्बिनेशन बनाकर महिलाएं प्रैक्टिस कर रही हैं. गाजियाबाद के अमित श्रीवास्तव महिलाओं की कोरियोग्राफ कर रहे हैं. अमित जी का कहना है कि महिलाएं काफी ज्यादा एडाप्टिव नेचर की हैं और डांडिया के स्टेप्स काफी आसानी से सीख रही हैं. ऐसा लगता है कि यह टीम परफॉर्मेंस के लिए तैयार है.

गरबा-डांडिया को लेकर महिलाओं में उत्साह

News18 Local को गरबा-डांडिया नृत्य सीखने वाली जया श्रीवास्तव ने बताया कि काफी ज्यादा अच्छा लग रहा है. स्टेप्स को सीखने में हम एक-दूसरे की मदद कर रहे हैं. इस बार नवरात्र के उत्सव को धूमधाम से मनाने के लिए हम तैयार हैं.

जानिए गरबा और डांडिया का धार्मिक महत्त्व

मान्यता है कि गरबा और डांडिया दोनों ही नृत्य मां दुर्गा से सीधे जुड़े हुए हैं. गरबा नृत्य मां दुर्गा की प्रतिमा या उनके लिए जलाई गई ज्योत के आसपास किया जाता है. कहते हैं कि यह नृत्य मां के गर्भ में जीवन का प्रदर्शन करने वाली लौ का प्रतीक है. साथ ही गरबा नृत्य के दौरान बना गोला जीवनचक्र को दर्शाता है. वहीं, डांडिया नृत्य के जरिए मां दुर्गा और महिषासुर के बीच हुए युद्ध को दर्शाया जाता है. नृत्य में डांडिया की रंगीन छड़ी को मां दुर्गा की तलवार के तौर पर भी देखा जाता है. सिर्फ इसके लिए ही इसको तलवार नृत्य या डांस ऑफ स्वॉर्ड भी कहा जाता है.

गरबा-डांडिया में फर्क

एक बड़ी संख्या में लोग गरबा डांडिया नृत्य को एक ही समझते हैं. जबकि नृत्य के दोनों रूपों में काफी फर्क है. गरबा नृत्य की शुरुआत गुजरात से हुई थी. इस नृत्य में हाथों का इस्तेमाल होता है. कई जगहों पर हाथों में ज्योति लेकर लोग गरबा खेलते हैं. गरबा नृत्य मां दुर्गा की पूजा से पहले किया जाता है. वहीं, डांडिया की शुरुआत वृंदावन से हुई थी. डांडिया नृत्य में रंगीन छड़ी का इस्तेमाल होता है और इस छड़ी को हाथ में लेकर खेला जाता है. डांडिया नृत्य मां के पूजन के बाद किया जाता है.

Tags: Ghaziabad News, Navratri Celebration, UP news



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