ग्वालियर हाईकोर्ट का DGP को आदेश-थानों में अच्छी क्वालिटी के CCTV कैमरे लगवाएं-Gwalior High Court’s order to DGP

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ग्वालियर.  मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर पीठ ने एमपी के डीजीपी (DGP) को प्रदेश के थानों में अच्छी क्वालिटी और ज्यादा मेमोरी वाले CCTV कैमरे लगवाने का अहम आदेश दिया है. आदेश के साथ ही हाईकोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा है कि- “CCTV कैमरे का उद्देश्य अपराध की जांच में मदद करना है, महज़ आभूषण बनकर रह जाना नहीं”. एक याचिका की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने ये आदेश दिया.

मुरैना के प्रदीप जैन की याचिका के दौरान पुलिस ने थाने के सीसीटीवी खराब होने का जवाब पेश किया था. इसी से नाराज होकर हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए ये अहम आदेश दिया है.

थाने में फरियादी से छीने 50 हजार रुपए, बंद थे सीसीटीवी कैमरे

ग्वालियर हाईकोर्ट ने मुरैना के प्रदीप जैन की याचिका पर सुनवाई की. जैन के भतीजे को मुरैना पुलिस ने हवालात में बंद कर दिया था. जानकारी मिलने पर प्रदीप और उनके बड़े भाई थाने पहुंचे थे. यहां पुलिस से उनकी बहस हुई. इस दौरान पुलिस वालों ने प्रदीप जैन से पचास हजार रुपए छीन लिए. साथ ही प्रदीप और उनके भाई पर शासकीय कार्य में बाधा का मामला दर्ज किया था. इस प्रकरण को लेकर प्रदीप ने ग्वालियर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी. उन्होंने याचिका में पुलिस द्वारा थाने में उनसे 50 हजार रुपए छीनने और गलत प्रकरण दर्ज करने का उल्लेख करते हुए, कोर्ट से घटना की सत्यता के लिए थाने में लगे सीसीटीवी जब्त कर मामले की निष्पक्ष जांच करवाने की गुहार लगाई थी. कोर्ट ने जब इस मामले में मुरैना पुलिस से थाने के सीसीटीवी फुटेज के आधार पर सक्षम अधिकारी से जांच कराने के लिए जवाब तलब किया. सुनवाई के दौरान मुरैना पुलिस ने थाने में लगे सभी सीसीटीवी खराब होने का जवाब पेश किया था.

 हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी
हाईकोर्ट में जस्टिस शील नागू की डिवीजन बेंच ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए डीजीपी को प्रदेश के पुलिस थानों में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज को एक साल तक सहेजकर रखने के आदेश दिए हैं. हाईकोर्ट ने कहा- मप्र के डीजीपी पुलिस थानों में अच्छी क्वालिटी और ज्यादा क्षमता वाली मेमोरी के कैमरे लगवाएं. यदि यह संभव नहीं है तो ऐसा हार्डवेयर इंस्टाल करें जिसमें सीसीटीवी फुटेज काफी समय तक सहेज कर रखा जा सके. साथ ही कोर्ट ने पुलिस थानों में लगे सीसीटीवी कैमरों की स्थिति को देखते हुए आदेश के साथ ही टिप्पणी करते हुए कहा है- जिस उद्देश्य के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, वह पूरा नहीं हो पा रहा है. ये लगाने का उद्देश्य अपराध की जांच में मदद करना है, महज आभूषण बनकर रह जाना नहीं. कोर्ट ने कहा है अपराध की जांच में समय लगता है. ऐसी स्थिति में सीसीटीवी कैमरों की स्टोरेज मेमोरी छह माह की होनी चाहिए. साथ ही उन फुटेज को और छह माह तक सहेजने के लिए बैकअप उपकरण की भी व्यवस्था होना चाहिए.

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