छत्तीसगढ़ी- मइके के तिजहा लुगरा बर मरती पाहरो तक आस लगाय रहिथे छत्तीसगढ़हीन 

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ये तिहार मन देव धामी, पति पत्नी,  लोग लइका, गाँव, घर दुवार, गाय गरु, धन सम्पति के बढ़ती ले जुड़े होथे.

इही तीजा मा मइके मा फूफू अउ भतीजीन के भेंट घलो होथे काबर कि दूनो के मइके एके रथे. दूनो के नेरवा इही गाँव मा गड़े हवे. दूनों मन अपन नानपन ला इही भुँइया मा बिताय रथे.

  • News18Hindi

  • Last Updated:
    November 27, 2020, 1:31 PM IST

हमर देश के हर प्रांत ला अपन अपन अलग अलग संस्कृति अउ तीज तिहार ले जाने जाथे. सबो प्रांत मा एक दू ठन अलगेच तीज तिहार मनाय जाथे. ये तिहार मन देव धामी, पति पत्नी, लोग लइका, गाँव, घर दुवार, गाय गरु, धन सम्पति के बढ़ती ले जुड़े होथे. अइसने एक तिहार छत्तीसगढ़ के बिहाता माईलोगिन मन उपास राख के मनाथे. जेन ला तीजा तिहार कहे जाथे. तीजा तीन दिन के तिहार आवय. जौन भादो महिना के दूसर पाख के तीज के दिन मनाय जाथे. दूज , तीज अउ चउथ ये तीन दिन के तिहार के महत्तम आय.तीनो दिन के अलग अलग महत्तम हावय.तीजा के महत्तम अउ ओखर माने के गुन, तरीका हा घलो एला विशेष बनाथे.

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तीजा के सबले पहिली गुन
एला बिहाता माईलोगिन मन मनाथे. फेर एला अपन घर, ससुरार मा नइ मना के, मइके मा जाके मनाय जाथे. तीजा के दूसर गुन आय कि हर बिहाता छत्तीसगढ़िन माईलोगिन के आशा ले बंधाय तिहार आये. मइके अउ ससुरार ले जुड़े रहे के तिहार आय. आठे तिहार मानके अगोरा करत रहिथे कि मइके ले कोनों आही अउ तीजा मनाय बर लेगही. नवा बिहाव होय बेटी ला पहिली तीजा माने बर एक महिना अगाहू लगते असाढ़ मा तीजा लेवा के मइके मा लान लेथे. तीसर गुन आय कि ये बिहाता माइलोगिन ला अपन नेरवा गड़े घर मइके ले बाँधे राखथे. तेकर सेती तीजा ला बिहाता माईलोगिन मन मइके जाके मनाते. चँउथा गुण कि ये कि ये धरम ले जुड़े तिहार आय. छत्तीसगढ़ मा शंकर भगवान के मानता घलाव अबड़ हे अउ तीजा तिहार हा शंकर पारबती ले जुड़े तिहार माने जाथे. पारबती हा शंकर ला पाय बर अपन मइके मैना अउ हिमांचल घर गजबेच तपस्या करिस अउ उपास धास रहिस तब भोला असन पति मिलीस. एखर सेती अपन सोहाग ला अमर राखे बर मरती पाहरो तक माइलोगिन मन मइके जाके उपास राख के तीजा मनाथे.तीजा के सबले बड़का गुन

अइसे तो माइलोगिन मन ललचहिन होथे एला सबो जानथे. कहे जाथे मइके के करिया कुकुर हा घलो उनला मयारु होथे. अइसने मइके के नानकुन चिरहा फरिया चेंदरा हा मयारु होथे अउ ओमा मया अटके रहिथे. तीजा के सबले बड़का गुन इही आय कि ये तिहार मा बिहाता माइलोगिन भलुक वो गरीब होवय कि बड़हर सबो ला ओखर मइके मा मइके डहर ले हर बच्छर नवा लुगरा देय जाथे. जेला पहिर के अपन सोहाग संग अमर नता बने रहे अउ सोहाग के लम्बा उमर रहे के प्रार्थना करथे.

तीजा तीन दिन के तिहार होथे. पहिली दिन संझा करु भात खा के एखर नेग होथे. करु भात ला घलो माइलोगिन मन अकेल्ला नइ खावँय. अरोसी परोसी घर के अवाइया तिजहारिन मन ला बलाथें पाछू उँखरो मन घर जाके खाथें. दूसर दिन भर पूरा निरजला उपास राख के संझा नवालुगरा पहिर के शंकर पारबती के पूजा करथे, भोग लगाथें अउ उही ला परसाद पाथें. कतको मन दिन भर कथा सुनथे, हाथ मा मेंहदी घलो लगाथें.तीसर दिन फरहर होथे. बिहनिया नहा खोर के पूजा पाठ करके अपन माइके वाले के शक्ति भर रोटी पीठा बरा भजिया सोहारी मीठा बनाथे अउ जेन मनला करु भात के दिन बलाय रथे उन ला फेर बलाके सबो झन मिलके फेर घर घर जाके खाथे पीथे.

तीजा के अबड़ महत्तम
तीजा के आखिरी गुन घलो अबड़ महत्तम हे. बेटी मन बिहाव के पहिली अपन जौन जौन संगवारी मन संग खेले कुदे, सुते बइठे , खाय पीये , दुख पीरा ला बाँटे गोठियाय रहिथे, काम बूता सीखे अउ पढ़े लिखे रहिथे अउ बिहाव पाछू अलग अलग गाँव मा ससुरार जाके जिनगी बितावत रहिथे उँखर संग बिहाव के पाछू मिले जुले अउ सुख दुख गोठियाय बताय के इही मउका मिलथे. तीजा मा सबो संगवारी सकलाथे अउ अपन घर गृहस्थी, काम बूता, लोग लइका, सास ससुरार के गोठ बात करथें. इही तीजा मा मइके मा फूफू अउ भतीजीन के भेंट घलो होथे काबर कि दूनो के मइके एके रथे. दूनो के नेरवा इही गाँव मा गड़े हवे. दूनों मन अपन नानपन ला इही भुँइया मा बिताय रथे.दूनो के दाई माई के घर उहीच रहिथे. दूनों के कका काकी, भाई भउजी उहेंच रहिथे.बिहाव के पहिली जेन फूफू के कोरा मा मइके मा खेले खेलाय रहिथे तीजा मा भेंट पाछू मया हा अउ गढ़ाथे. एकरे सेती कहे जाथे तीजा हा माइलोगिन के मइके ले आस बँधाय के तिहार आवय.


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