छत्तीसगढ़ी में पढ़ें – बुद्धि के कसरत करवाथे छत्तीसगढी जनउला

0
17


छत्तीसगढ़ म छत्तीसगढ़ी भाखा के‘जनउला’ के चलन बहुत पुरातन हे. जनउला दिमागी कसरत करवाथे. कल्पना-शक्ति ल बढ़ाथे. जिज्ञासा-भाव जगाथे. एमा छत्तीसगढ़ी भाखा के सुन्दरता घूरे हे. जनउला म प्रश्न होथे. एखर ले कल्पना-शक्ति के संगे-संग सोचे,समझे के कला घलो विकसित होथे. उत्तर जाने बर अटकल (अंदाजा) लगाय जथे. शब्द के इशारा अउ तुरत दिमागी सूझ एखर बर जरूरी हे. इहाँ लालबुझक्कड़, खबरीलाल, गोबरदास अउ शेखचिल्ली जनउला के मजा लेवत हें.

ये भी पढ़ें: छत्तीसगढ़िया व्यंग्य : उल्टा-पुल्टा होय संसार, नाउ के मुड़ ल मुड़े लोहा

आवव पढ़व ,गुनव.. अइंठे गोइंठे पार म बइठे
लालबुझक्कड़ के घर ओखर सबे संगवारी मन बइठे हें.सब अपन-अपन मुहूँ म मास्क लगाय हें.घर म घला सामाजिक दूरी के पालन करत हें.खबरीलाल किहिस-‘आज राजनीति के बात ल छोड़ के हम छत्तीसगढी भाखा के‘जनउला’ल बूझे के कोशिश करबो .एकक कर के‘जनउला’ प्रस्तुत करव.’ लालबुझक्कड़ किहिस-‘पहिली जनउला मोर रही.अउ पूछ बइठिस- ‘अइंठे गोइंठे पार म बइठे’ ये का ये? बने सोच बिचार के उत्तर देव.झट गोबरदास किहिस-येखर उत्तर हे–पगड़ी या पागा.सबो झन खलखला के हाँसिन.लालबुझक्कड़ किहिस-‘पागा’ह मुड़े-मुड़ाय, अइंठे-गोंइठे रहिथे.मुड़ उपर माड़थे तिही ल पार जानो.अब मोर पारी हे-फूले-फूले रिंगी चिंगी,फर फरे लमडोरा.’ये का ये?गोबरदास किहिस-में बतावत हंव.मुनगा के पेड़ म नान-नान फूल लगथे.अउ ओखर फर हर लबडेना बरोबर लम्हरी-लम्हरी(लंबा-लंबा)होथे.येखर उत्तर हे मुनगा(सहजन).’तरी बटलोही,उपर डंडा,नइ जानही तेला परही डंडा

अब गोबरदास पूछिस- ‘तरी बटलोही,उपर डंडा,नइ जानही तेला परही डंडा.’ बताव का ये? लालबुझक्कड़ उत्तर दि- ‘जिमीकदा’ जेला हिन्दी म जमींकंद केहे जथे.भूइंया के भीतरी म जिमीकांदा के तना होथे.एखर जर ह भूइंया के भीतरी डाहर फूल के बटलोही बरोबर हो जथे.पोंगा ह बाहिर निकलथे ओमा पाना होथे. जिमीकाँदा ल भूइंया ले खन के बाहिर निकाले जथे.एखर साग बड़ सुवादिष्ट होथे. सुख-दुःख के कार्यक्रम म इहाँ जिमीकंदा के साग रांधना जरूरी माने जथे. जिमीकाँदा के चटनी घलो डारे जथे.छत्तीसगढ़ म कइ जगा येखर खेती होथे.गाँव गँवइ के प्राय;सबे झन मन अपन घर के बखरी म जिमीकाँदा बोथें .’

दिखे म गोल-गोल,रंग ओखर लाल-लाल अउ लूगरा पहिने सौ पचास
खबरीलाल पूछिस-‘दिखे म गोल-गोल,रंग ओखर लाल-लाल अउ लूगरा पहिने सौ पचास.जानो का ये? ’लालबुझक्कड़ झट किहिस‘गोंदली(प्याज) ताय.अउ सब ताली बजा के उत्तर के सुवागत करिन. लालबुझक्कड़ खुदे किहिस- ‘गोंदली आम जरूवत के चीज आय.गोल-गोल होथे. रंग लाल ,प्याज के कई परत होथे.’ टेड़गा बेड़गा रस्ता, बीच म कुआं’ये जनउला ल पूछिस गोबरदास. उत्तर दिस शेखचिल्ली.ओहा बतइस के एमा ‘कान‘ के संकेत हे.खबरीलाल पूछिस- ‘नानचुन बियारा म खीरा बीजा. ये ’का ये ?’ एखर उत्तर आय-दांत.अब कइसे सुनो-मुंहूँ ह बियारा के प्रतीक आय अउ खीरा बीजा दांत के प्रतीक आय.’

लोहा कस पेड़ म ,सोना कस फूल ,चांदी कस फर म ,पथरा कस झूल

अब गोबरदास से नइ रहे गिस. ओहा पूछिस-‘लोहा कस पेड़ म ,सोना कस फूल ,चांदी कस फर म ,पथरा कस झूल.’ सब दिमाग लगइंन फेर उत्तर कोनो नइ दे पइंन. गोबरदास खुदे बतइस-बंबरी रूख(बबूल) एखर उत्तर बंबरी आय.बंबरी के रूख हर मजबूत होथे.ओखर फूल पिंवरा होथे अउ फर ह पथरा बरोबर कड़ा लालबुझक्कड़ किहिस- ‘अब मैं एकदम सरल जनउला पूछत हंव-एक फूल फुले, सौ फर फरे.बताओ उत्तर .’ गोबरदास जवाब दिस-‘एक ठन फूल के सौ फर !बड़ा बिचित्र बात हे, ..हाँ ..हाँ सुरता अइस केरा (केला)’ ’लालबुझक्कड़ किहिस-‘वाह वाह गोबरदास तें ह त आज खटाखट उत्तर देत हस .’कटोरा उपर कटोरा बेटा बाप से भी गोरा .’ये का ये ?’ झट गोबरदास उत्तर दिस-‘नरियर(नारियल) नरियर के उपर बूच होथे .बूच ल निकालबे तहाँ ले खोल्टी मिलथे.खोल्टी के बाद मीठ खुरहोरी भेला होथे .ओखर भीतरी म सफेद चमक दिखथे .’

पानी के तीर-तीर चर बोकरा,पानी अटागे मर बोकरा
‘हरियर भाजी,साग म न भात म ,खाय बर सुवाद म.’ये ह शेखचिल्ली के जनउला रिहिस .’लालबुझक्कड़ किहिस बता दे गोबर भाई.गोबरदास किहिस-‘अइसन का भाजी आय जेन साग-भात म खाय के काम नइ आय सुवाद म काम आथे?सोचिस त मन म उत्तर अइस’-पान’ सही उत्तर होही.’ लालबुझक्कड़ ओला शाबासी दिस.’पानी के तीर-तीर चर बोकरा,पानी अटागे मर बोकरा. ये जनउला खबरीलाल ह पूछिस .झट गोबरदास किहिस-‘दीया’येखर उत्तर आय.कइसे सुनो-दीया म तेल के राहत ले बाती जलथे. तेल ख़तम त बाती जल जथे.बाती तेल भरोसा हे.तेल सिराय ले दीया बुता जथे. तहाँ दीया के घलो कदर नइ होय.

एक निसेनी के बार बारा पक्ती
‘छुए म नरम,ओढ़े म गरम, अउ धरे म शरम.’ये जनउला के उत्तर का ये ?’ शेखचिल्ली पूछिस. कोनो नइ बता पइन तब शेखचिल्ली खुद बतइस‘कथरी’.कथरी छुए म नरम होथे अउ ओढ़े ले गरम फेर एला रखे म शरम के अनुभव होथे.’ अब गोबरदास पूछिस-‘एक निसेनी के बार बारा पक्ती.’ उत्तर बताव. लालबुझक्कड़ तुरत उत्तर दिस-‘छाता’.एमा बारा कांड़ी होथे .

लाल मुहूँ के छोकरी,हरियर फीता गंथाय….
लालबुझक्कड़ खूब मजा लेवत पूछिस- ‘नानकन लईका दु कौर खाय, बोडरी ल दबाय ले रस्ता देखाय.’ ये काये ? गोबरदास उत्तर दिस ‘टार्च ताय’ टार्च म दु सेल लगथे, ओखर बटन ल दबाय ले टार्च के रोशनी म रस्ता दिखथे.लालबुझक्कड़ फेर पूछिस –‘लाल मुहूँ के छोकरी,हरियर फीता गंथाय.निकले कहूं बजार म त हाथों हाथ बेचाय.’ गोबरदास उत्तर दिस ‘पताल’ या बंगाला (टमाटर).वो किहिस ये जनउला के संभावना एखर इशारा ल समझे बर परही के पताल ह लाल होथे.ओखर उपर हरियर संरचना होथे,बजार म ये ह तुरत बेचा जथे.’

पर्रा भर लाई गने न सिराई
शेखचिल्ली पूछिस‘पर्रा भर लाई गने न सिराई.ये का ये ?’इहाँ पर्रा हर अगास (आकाश)के अउ लाई ह चंदैनी के प्रतीक आय.उत्तर चंदैन (चांदनी).’ छत्तीसगढी भाखा म अइसन जाउला के भरमार हे .ये ह कल्पना शक्ति के विकास करथे अउ भाखा गियान ल बढ़े म सहायक हे.



Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here