छत्तीसगढ़ी विशेष -“नियाव होही, जा हांका पारदे गुड़ी चंवरा मा सकलाहीं”

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आज समिलहा परिवार मा रेहे बसे बर तरसगिन हे का करबे जीवन के गाड़ी एके जगा नइ राहय.

कोनो गांव मा जावव पहिली ले सबो नियम मा गांव वाला मन बंधाए रथें. आजकाल का होहे हे सबो कोती के तरक्की हा दुनिया ला एकमई कर दे हे.

  • News18Hindi

  • Last Updated:
    November 30, 2020, 3:01 PM IST

आज अउ अभी ताते-तात नियाव चाही त गांव भर ला ग्राम सभा मा सकलाए ला परही एकरे सेती कोटवार ला बला मुनादी करही. समस्या चाही कइसनो राहय चार झन ला सकेले के बुता पहली होना चाही. कोनो नइ जानय काली का होही तभो ले बिसवास मा जिनगी चलथे. गांव बसती शहर डहर सबो कोती आज जिवका चलाए के चिंता सकलावत जावत हे. दिनों दिन का होही कइसे होही कहिके मनखे दुबरावत जावत हैं. कतको दिन होगे पुरोती चले ला परही तेला जानतेच हावय तभो ले का करबे अपन आदत के लचारी ला.सुकाल साल मा घलो मौसम के मार ला झेलत-झेलत जिव करलावत हे.आने कहिबे ते ताने होवत हे. थोर-थोर बात मा बात बिगड़गे अउ पारा मोहल्ला मा झगरा मात गे. झगरा मुड़ फुटवल्ल होगे. थाना डाहर के रद्दा नापने वाला खुश होवत होही अइसे सुन के गांव के सियान हा अपन डाहर ले पंचइती सकलावव कहिके जोंगे हावय.

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आज कोन डाहर ले सुरुज नरायन निकले होही अइसे कहिके नोखियाए असन अपन मितान ला सोरियाव ओखर घर कोती रेंगे- रेंगे जाय ला परगे. कहिथे न अलहन का कहिके नइ आवय तेन बात हा आज सिरतोन होगे. हबकले कोन डाहर ले मोटर गाड़ी वाला आइस अउ एदे सड़क तिर के दुकान मा खुसर के धन तो कोनो जन हानि नइ होइस फेर नकसान तो होगे. मोटर वाला के का गलती हरय हम नइ जानेन अउ रटरटउटन चले लागिस मार पड़ापड़. मनखे मन कतका सहय अल्लर खाके गिर परिस देखो-देखो होगे.सब अपन-अपन ले तिरियाए ला धर दिन ओतके बेरा ला सोंचबे त कभू-कभू बने मनखे के समझाई हा काम ला बनाथे. गांव के नांव झन बिगड़य कहिके मालिक मकान अउ गाड़ी मालिक सो समझौता होइस अउ अलहन टर गे.

कोनो गांव मा जावव पहिली ले सबो नियम मा गांव वाला मन बंधाए रथें. आजकाल का होहे हे सबो कोती के तरक्की हा दुनिया ला एकमई कर दे हे. दिनभरहा काम बुता करके गांव भर सुरतावंय कांही मनोरंजन लीला मंडली के जतन होवय. बाजा गाना के सोर रतिहा मा सुनावय. थके मांदे मन ला बने लागय अउ सबो जगा खुशहाली बगरय. जवनहा लइका सियान सबो अपन अपन जगा मा नाम कमावंय बने गिनहा के सेती मेती ला सबो जानय. बहिनी माई दाई भाई सबो के मान गऊन ला समझे जावय.साल के साल गांव ला बनाए बर बइगा ला जोंगे जाए. बइगा के बताए रद्दा ला सबो मानय.सुख दुख सबो बसेरा भाई मन अपन सदस्य राखे राहय.पता नइ चलय काम कतका बेर बुलकगे. अभी थोकन देखन देख सुन के रेंगे ला परथे काबर के कोन काय करत हे, कहां रइथे जानबा नइ होए पाए अउ ओतके मा कइठन गलती हो जथे. सबो कोती अपने अपन मा रेहे लागिन परोसी कोनो जाने बर नइ पाबे ते कइसे बनही. बेटी परानी के सेती कतको परिवार मा बेटी बचाव बेटी पढ़ाव के गुन ला गाने वाला मिल जाही इकरे सेती बदलती जमाना मा थोकिन देख ताक के रेंगे ला परतहे. ठग जग उतर गेहें सबो अपन मन ला टमर के देखे नइ जानिन अउ ठगा गिन. मिठ लबरा के जमाना आगे हे. करु बोलइया ला कोनो नइ भावय.चल तो थोकन रेंगे असन जाबो कहिके जाना आजकाल बने नोहय. जुन्ना सियान दिन बुड़ती लहुट आबे काहय. आज दिन अउ रात के चिन्हारी नइये चौबीसो घंटा काम बुता मा आदमी खटावत हावंय. मावा लोग अउ माई लोगन अपन अपन कमाई मा घर परिवार ला सजावत हावें,बने बात हे सबो झन कमाही ते चार पइसा बांचही घर मा सुख के छइंहा परही अउ चिंता के रद्दा दुरिहाही. छोटे परिवार मा अपन जिवका के साधन खोजइया कभू एती कभू वोती, कोनो इहां कोनो उंहा अइसे कहिके परिवार बगर गे. साल पाछू तिहार बार मा आथें त मन गमकत रइथे दू चार दिन बाद फेर ऊही. अकेल्ला के सेती कतको घर आज आने ताने मा माते मिलहिच. इही आने ताने मा आए दिन सुनाए मा आथे के कइसे होगे आए नइ पाइस अउ फेर ओदे ओरझे लागिस. काम हावयं फेर रूची नइ राहय किंजर के रहिगे फेर का कहिबे संगत के असर ला.

सबो दिन एक बरोबर नइ राहय सुख दुख जिनगी मा लागे रइथे इही ला समझ के रहना हे कहिके नियाव पंचाइत करे बर सकलाए जाथे.नियाव मा रेहे के शिक्षा आज जरूरी हे.बनाए मा का नइ बनय घूम फिर के सियानी रद्दा काम आथे.


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