छत्तीसगढ़ी व्यंग्य-पंचायतीराज म महिला आरक्षण अउ पुरूष के सियानी

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का हर गियानी मनखे आय .एक दिन किहिस -छत्तीसगढ़ प्रदेश म पूरा पंचायतीराज हे. पुरूष-नारी के बीच म 50% महिला आरक्षण होय के बाद तराजू के कांटा बरोबर होगे. ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत, नगर पंचायत, नगरपालिका चुनाव म कतको पुरूष सदस्य अपन घरवाली(डौकी)/बहिनी/बेटी ल चुनाव लड़वाथें. चुनाव जीते के बाद उनकर प्रतिनिधि बन जनता सेवा शुरू कर देथें. कुछ अपवाद ल छोड़ के ग्राम पंचायत म महिला पंच-सरपंच के पतिदेव मन जनता-सेवा म सक्रिय हें. एमा कागजी समानता के बड़े खेल हे. अधिकांश पंचायत म कागज म महिला-राज हें. मैंदान म महिला सरपंच के पतिदेव सरपंच के पावर म हें. ज्यादातर महिला सरपंच के बुता कागज म अंगूठा लगाना या हस्ताक्षर करना हे.

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गाँव के आत्मा फ़ाइल म

कका सरलग काहत गिस-महिला पंच हे त ओखर पतिदेव पावर म हे. पतिदेव गाँव के राजनीति ल सम्हाले हे. पंचायत के बैइठका अउ निर्णय म ओखरे चलती हे. पंचायत म हल्ला-गुल्ला, विरोध या शिकायत शहर ल कभू-कभू सुनाथे. साहेबजी मन के दफ्तर म फाइल होथे. ये फ़ाइल बड़ काम के चीज होथे. कतको विरोध ल त ये फ़ाइल ह सम्हाल लेथे. गाँव के आत्मा ये फ़ाइल म दबे-दुबाय, रोवत ,चिखत-चिल्लावत परे रहिथें. ये बाबू अउ वो बाबू फेर साहेब-सुभा मिलके वोखर फ़ाइल ल पुचकार देथें. गाँव के सरकार अइसना रोवत-गावत चलथे. डमी सरपंच के तलवार कट मेंछा म कतको बड़े-बड़े अधिकारी मन बंधा जथे . प्रजातंत्र के पहिली सीढ़िया पंचायत म भ्रष्टाचार ह वाजिब शिष्टाचार आय. इही त आनंद हे. झुक्खा नेतागिरी का काम के ? जनपद/जिला पंचयत, नगर पंचायत. नगरपालिका आदि म कमोबेश इही हाल हे. पंच परमेश्वर वाले जुग अब कहाँ हे ? बघवा, सियार ,लोमड़ी, लकड़बग्घा कस मनखे के चलती हे. कका ह इही ल जंगल-राज कहिथे.

सरपंचजी तोरे चलन दे

डमरू मंडल किहिस -सरपंचजी दिन ल कहि देथे त दिन ह रात हो जथे. अउ रात ह दिन. बहुमत के जादू इही ल कथें. जोंन विरोध करथे तेंन ल अपन बात ल खूब पेले ढकेले बार परथे. जे डाहर पावर ते डाहर गाँव भर. एक्का-दुक्का जेंन अंटियाथे तेंन अंटियाते रही जथे. गाँव म पंचायत माने स्कूल के गुरू मन के रखवार जान. सब के आय-जाय के हिसाब इनकर डायरी नहिं त जबान म चढ़े होथे.

कका किहिस-पटवारी अउ सरपंच के जोड़ी के महा-गठ्बन्धन होथे. चल-अचल संपत्ति के लें-देन म इनकर भूमिका होथे.गाँव म सड़क ,नाली, पानी. बिजली होय ल ओला विकास कहिथें. कतको सरपंचजी मन अपन गाँव ल सुंदर बाँध के रखे रहिथें. गाँव म एका होथे, सियान मन के बात पथरा के लकीर बन जथे. त्रि-स्तरीय पंचायती-राज म गाँव म जीत-हार ह संबंध म गाँठ पार देथे. विचार गांठे गांठ कस हो जथे. बाहरी नेता मन के दखल होथे. विकास के गंगा हर शहर ले गाँव डाहर आथे. कई गाँव म विकास के गंगा बीच म लुप्त हो जथे. जिला पंचायत अउ जनपद पंचायत विकास बर रूपिया के खजाना धरे बइठे रहिथें. नाप-तउल के कदम बढ़ाथें. गाँव इनकर इशारा म दंड बैठक करत दिखथे. जिला अउ जनपद अध्यक्ष/उपाध्यक्ष के जलवा होथे. अब त केंद्र सरकार कतको पइसा त्रि-स्तरीय पंचायती-राज के खाता म दार देथे. बीच के भांजी मरइया मन तिरिया जथें. छंट/बंट जथें.

जब दाई सरपंच बनिस

कका जोशिया के किहिस- डमरू मंडल ,जब बस्ती के दाई सरपंच बनिस तब ओखर पति अपने-अपन सरपंच के पावर म आगे. चार दिन बने-बने चलिस. फेर कतको झन के बीच मतभेद होगे. गाँव म एक जगा सरपंच पति के पंचायती प्रवचन चले, दुसर डाहर ओखर विरोधी मन के बइठका म पंचायत के लंका-काण्ड के पाठ होय. सरपंचिन दाई के पति के खूब धूम-धड़ा होइस . गुप्त रूप से मान-मनौव्वल होबे करिस तब पंचायत के देवता मन चुप होइंन. कई पंचायत म मुँहजोरी म विकास नइ होय.

पंचायतीराज बर कुर्बान होइंन

पंचायतीराज अपन गोड़ म घुँघरू बजावत, दारू तिहार मनावत, नाचत-कूदत अइस. गाँव –गाँव शहर-शहर के अली-गली म दारू के धार बोहाइस. चुपचाप गाँव के कुकरा-कुकरी,बोकरा-बोकरी चुनाव म वोट बर कुर्बान होगें. हर गाँव के इही हाल होइस. कुकरा-कुकरी,बोकरा-बोकरी बिन गाँव सुन्ना होगे तब बायलर मुर्गी-मुर्गा के चिकन सेवा म हाजिर करे गिस. सुंदर मनेजमेंट से वोट खसलथे. जेन चुनाव तिहार के पहिली सिरतोन जनता सेवा करथें तेंन चुनाव म बाजी मार देथे. दाई जनता जानार्दन ल हाथ जोड़ के किहिस ‘दाई-ददा हो तुमन मोला चुने हव माने अपन दमाद ल चुने हव. तुहंर विकास मैं करहूँ या मोर पतिदेवता करही एकेच बात आय. तुम उन ल अपन सुख-दुःख गोठियाव तुंहर बेड़ा ल वुही पार लगाही. सरपंच पत्नी के ये उन्नत विचार के बाद पेट म मुसुवा-जम्प शुरू होगे. सब झन खुशी-खुशी सरपंचिन के बात ल सुन-गुन के खुश होइन अउ गाँव-भंडारा म तृप्त होगें. त्रि-स्तरीय पंचइतीराज के लाव-लस्कर गजब गरू हे. सत्ता के पत्ता खेलना पहिली सीढ़िया ले शुरू होथे. सत्ता के खेलाड़ी इहाँ मजा करथें. ( डिसक्लेमर – लेखक वरिष्ठ साहित्यकार हैं और ये उनका अपना व्यंग्य लेख है. इसमें दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए News18Hindi किसी भी तरह से उत्तरदायी नहीं है)

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