छत्तीसगढ़ी लेख -आ गे तीजा-पोरा मया के तिहार

0
17


हरेली (हरियाली) राखी, अउ खमरछठ (हल-षष्ठी) के बाद छत्तीसगढ़ म हिन्दू मन के प्रमुख तिहार तीजा-पोरा आगे, भादों महीना के कृष्ण पक्ष के अमावस्या म पहिली पोरा के तिहार आथे.एसो 06 सितम्बर के (2021)पोरा तिहार हे. ओखर बाद तीजा (हरितालिका-व्रत) तिहार 09 सितम्बर के हे. छत्तीसगढ़ भारत के एक कृषि-परधान राज्य आय. इहाँ के तिहार प्रकृति से जुड़े हे. प्रकृति उन ल जोड़े हे. पोरा तिहार म माटी के बइला (नांदिया बइला) पोरा-जांता (चक्की), अउ तरह-तरह के माटी के खेलौना के पूजा करे जथे. बइला भरोसा खेती होवत आत हे.माटी के बइला, माटी के जांता, माटी के कइ प्रकार के खेलौना के उपयोग होय ले कुम्हार के रोजी-रोटी जुड़े हे. खेती मशीन के सहयोग शुरू होगे हे. पोरा तिहार म लइका-सियान सब बइला, जांता के पूजा करथें. नरियर चढ़ाथें. खुरमी, ठेठरी, आदि के भोग लगाथें. माटी के बइला के अलावा लकड़ी के बइला बजार से खरीदे जथे.

दउड़ रे! मोर माटी के बइला

पूजा के बाद लइका मन अपन-अपन माटी/लकड़ी के बइला जोंन कमचिल म बंधाय चार चक्का के डोरी (रस्सी) भरोसा होथे, दउड़ाना शुरू करथें. लइका मन खूब मजा लेथें .घर के बइला मन ल किसान बने सजा-सूजी के गाँव/शहर म बइला-दउड़ के जगा म लानथें. भारी भीड़ होथे. बइला दउड़ के रद्दा निश्चित रहिथे. बइला दउड़ के खूब आनंद लेथें. सुंदर सजे-संवरे बइला के गला म बंधाय घाँघरा के आवाज मन मोह लेथे. पहला, दूसरा, तीसरा आय बइला पुरस्कृत करे जथे. छत्तीसगढ़ के गाँव-गंवई म खेल के मैदान म खेलकूद के आयोजन होथे. गाँव भर के महिला, पुरूष, लइका एमा भाग लेथें. तिजहारिन मन पोरा (पोला) के रद्दा ल देखत रहिथें. कब पोरा होय अउ भइया ससुरार ले मइके लेगे बर आय. तिहारिन मन के मइके जाय के सिलसिला ये तिहार से शुरू हो जथे.

छत्तीसगढ़ म तीजा-पोरा तिहार मुख्य तिहार के गनती म हे . तीजा-तिहार (हरितालिका) भादों महीना के शुक्ल पक्ष के त्रयोदसी (तीज) के मनाय जथे.एसो 09 सितम्बर 2021 के ये तिहार हे. प्रदेश के तिजहारिन मन ल मइके जाय के मउका मिलथे.प्राय: हर ब्याहता स्त्री तीजा बर अनिवार्य रूप से मइके जाथें.

निर्जला कठोर तीजा उपास

तीजा उपास निर्जला (पानी के बिना) रेहे जथे. मान्यता हे के माता पार्वती भगवान बोलेनाथ ल पति के रूप म पाय बर बारह साल तक भूख-प्यास तियाग के कठोर तपस्या करिस. भादों महीना के अंजोरी पाख के तृतीया हस्त नक्षत्र म माता पार्वती ह रेती के शिवलिंग बना के भोलेनाथ के आराधना म मगन होइस. रात जागरन करिस. भगवान भोलेनाथ माता पार्वती के कठिन तपस्या से प्रसन्न होइस. पति-पत्नी के रूप म शिव-पार्वती के पुनर्मिलन होइस. उही समय ले तीजा या हरितालिका व्रत के प्रथा शुरू होय हे. छत्तीसगढ़ म सुहागिन स्त्री मन अपन पति के दीर्घायु बर श्रद्धा, भक्ति अउ निष्ठा ले ये कठिन व्रत के नियम पालन करत तीजा के व्रत ल पूरा करथें. महिला मन पूरा रात जागरन करथें. पूजा म माता पार्वती ल सिंगार के सब जिनिस चढ़ाय जथे. सुहागिन मन भक्ति-भाव से तीज के कहानी सुनथें-सुनाथें. मइके म माता-पिता या भाई अपन पुत्री/बहन मन ल अपन सामर्थ्य के अनुसार लुगरा अउ सिंगार के सामान देथे.लइका मन बर घलो नवा कपड़ा आदि ले जथे. लइका मन मगन होथें. उन नाना-नानी/ममा-मामी के पियार पाथें. हर साल तीजा म बहिन, बुआ ल उनकर ससुरार ले मइके लाय के परम्परा से परस्पर संबंध अउ प्रेम-भाव मजबूत होथे.

इहाँ तिहार-बार के भरे-पूरे परंपरा हे. ये तिहार जावत हे, त ओ तिहार आवत हे. साल भर कोनो न कोनो तिहार के आना जाना बने रहिथे. तिहार खुशी देथे. जिनगानी ल ताजगी से भर देथे. फेर कोरोना अउ महंगाई के रोना त कोनो नवा बात नइ रहिगे हे. सरकार कखरो होय देश के उपर आबादी के दबाव बाढ़े ले खुशी घलो असली-नकली होय कस लगत हे.

पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.



Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here