जज्‍बा: किस्मत ने आंखों की रोशनी छीनी, रफ्तार नहीं; पैरा ओलंपिक में बनाना चाहते हैं देश का ‘गौरव’

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रिपोर्ट- विशाल भटनागर

मेरठ. अगर कुछ पाने की चाहत हो तो इंसान अंधेरे को भी चीरते हुए आगे बढ़ सकता है. कुछ इसी तरह का नजारा कैलाश प्रकाश स्टेडियम में देखने को मिल रहा है. जहां ब्लाइंड होने के बावजूद भी सिसौली निवासी पैरा एथलीट गौरव रेस और लॉन्ग जंप में देश को गोल्ड दिलाने की चाहत में प्रैक्टिस कर रहे हैं.

सिसौली निवासी गौरव ने News18 Local से खास बातचीत करते हुए बताया कि वर्ष 2008 में मिकी माउस का खेल खेलते समय उनकी आंखों में दिक्कत हो गई थी. इसके बाद इंफेक्शन इतना बढ़ा की उनकी दोनों आंखों की रोशनी चली गई. उन्होंने बताया कि बचपन से ही उनका सपना देश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड मेडल दिलाने का है. इसी सपने को पूरा करने के लिए स्टेडियम में प्रैक्टिस करने के लिए आ रहे हैं.

छोटा भाई बना है वैशाखी
भाइयों के प्रेम की बात की जाए तो यह नजारा भी यहीं देखने को मिलता है.जहां बड़े भाई को प्रैक्टिस कराने के लिए छोटे भाई अभय ने भी खेल को चुना. वह अपने भाई के साथ प्रतिदिन स्टेडियम आते हैं, क्योंकि स्टेडियम में प्रैक्टिस करने के लिए एक सहारे की आवश्यकता है. गौरव का भाई अभय प्रैक्टिस कराने में उनकी मदद करता है.

सफलता की राह में आर्थिक बदहाली बाधा
गौरव के परिवार की बात करें, तो माता-पिता, दो बहन और चार भाई हैं. गौरव के पिता सब्जी बेचते हैं. ऐसे में एक धावक की जो डाइट होनी चाहिए. वह तो नहीं हो पाती है, लेकिन परिवार पूरी कोशिश करता है.

कोच के लिए गौरव एक स्पेशल खिलाड़ी
गौरव के कोच का कहना है कि इस खिलाड़ी के जुनून को देखते हुए अगर कोई इसकी मदद करे, तो यह अपना हर सपना पूरा कर सकता है, क्योंकि ब्लाइंड होने के बावजूद भी स्पेशल खिलाड़ी है. इसका हुनर और हौसला इतना बुलंद है कि अनेक परेशानियों के पश्चात भी यह खिलाड़ी खूब प्रैक्टिस करता है. गौरव का जुनून और मेहनत ही है कि स्टेट लेवल पर आयोजित हुई एक प्रतियोगिता में गौरव ने गोल्ड मेडल हासिल किया है. वहीं, नेशनल प्रतियोगिता में भी प्रतिभाग कर चुका है.

Tags: Meerut news, Paralympic athletes



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