जब एक घूंट पानी ने क्रांतिकारियों में लाया था आजादी का सैलाब, जानें मेरठ के औघड़नाथ मंदिर के कुएं की कहानी

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रिपोर्ट- विशाल भटनागर

मेरठ: यह बात तो हर किसी को पता है कि ब्रिटिश हुकुमत के अत्याचार से देश को मुक्त कराने के लिए पहली चिंगारी मेरठ की धरती से ही धधकी थी. लेकिन क्या आपको पता है कि उस आग को ज्वाला बनाने के लिए मेरठ के एक कुएं के पानी ने घी का काम किया था. जी हां, सही पढ़ रहे हैं आप, क्योंकि इतिहासकार बताते हैं कि जब पहला स्वतंत्रता संग्राम हुआ था. तो उसकी पटकथा मेरठ कैंट स्थित औघड़नाथ मंदिर यानी काली पलटन से लिखी गई थी. जहां एक साधु सिपाहियों को कुंए का पानी पिलाता था.

एक घूंट पानी ने क्रांति का सैलाब बहा दिया
इतिहासकार नवीन गुप्ता बताते हैं कि अंग्रेजों की एक पलटन थी, जिसे काली पलटन कहा जाता था. काली पलटन में काफी संख्या भारतीय सैनिकों की थी. इन सभी सैनिकों को औघड़नाथ मंदिर के साधु कुएं से पानी पिलाते थे. लेकिन एक दिन एक साधु ने भारतीय सैनिकों को कुएं का पानी देने से मना कर दिया. साधु ने कहा कि आप सूअर और गाय की चर्बी से बनी कारतूस को मुंह से खोलते हैं. ऐसे में इस पावन मंदिर के कुएं का पानी मैं आपको नहीं पिला सकता. जिसके बाद धीरे-धीरे यह पूरी पलटन में बात फैल गई कि अंग्रेज कारतूस में सूअर और गाय की चर्बी का इस्तेमाल करते हैं. सैनिकों ने अंग्रेजों की इस नीति के खिलाफ विद्रोह शुरू कर दिया. विद्रोह को दबाने के लिए अंग्रेजी अफसरों ने उन सभी सैनिकों का कोर्ट मार्शल कर जेल भेज दिया. लेकिन क्रांतिकारियों ने जेल पर हमला बोल कर सभी सैनिकों को आजाद करा लिया था. तभी से अंग्रेजों के खिलाफ क्रांति का संग्राम और तेज हो गया

85 सैनिकों ने किया था आजादी का उद्घोष
कहा जाता है कि जिस पलटन ने सबसे पहले इसका विरोध किया था. उस पलटन में सिर्फ 85 सैनिकों की टोली थी, जिन्होंने साधु के कहने पर अंग्रेजी सैनिकों का विद्रोह करते हुए उन को मार गिराया था. यह चिंगारी ऐसी फैली कि फिर धीरे-धीरे आगे बढ़ती ही चली गई. हालांकि, इससे पहले भी कई आंदोलन हुए थे. लेकिन इस चिंगारी का महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है.

कुएं पर बना दिया गया है शहीद स्मारक
वर्तमान की बात करें तो वहां अब एक शहीद स्मारक बना दिया गया है. ऐसे में जो भी श्रद्धालु औघड़नाथ मंदिर में बाबा के दर्शन करने के लिए आते हैं. वे उन सभी शहीदों को भी नमन करते हैं, जिन्होंने क्रांति में अहम योगदान निभाया था. बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल भी मेरठ आए थे. उन्होंने भी शहीद स्मारक पर उन सभी शहीदों को नमन किया था. अगर आप भी उस आजादी के उदगम स्थल का दर्शन करना चाहते हैं. तो इस मैप https://maps.app.goo.gl/EWexaEBSXeFKngM47 के आधार पर आप भी वहां जा सकते हैं.

Tags: Meerut news, Uttar pradesh news



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