…जब माफिया मुख्तार अंसारी को पहली बार योगी आदित्यनाथ से मिली थी चुनौती

0
82


गोरखपुर. उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में जब माफिया मुख्तार अंसारी (Mafia Mukhtar Ansari) का खौफ लोगों पर छाया हुआ था, सरकारें मौन थीं, तब गोरक्षपीठ (Gorakshpeeth) के एक सन्यासी ने उसके खिलाफ आवाज उठानी शुरू की. वो सन्यासी कोई और नहीं गोरक्षपीठाधीश्वर और मौजूदा सीएम योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) हैं. उन्होंने उस समय सांसद होते हुए इस माफिया के साम्राज्य में चुनौती दी थी, पेश है स्पेशल रिपोर्ट-

मऊ (Mau) में लोगों को आज भी याद है, जब माफिया मुख्तार अंसारी का काफिला सड़क से गुजरता था तो किसी की क्या मजाल जो उनके काफिले के बीच आ जाए. एक लाइन से 786 नंबर की 20 से 30 एसयूवी गुजरती थीं. मुख्‍तार अंसारी जब चलता तो बॉडीगार्ड और अपने गैंग के बीच सबसे लंबा दिख जाता था. लेकिन वक्त ने ऐसी करवट ली कि अब वह व्‍हीलचेयर पर आ चुका है और अब बांदा में सलाखों के पीछे है. मऊ, गाजीपुर, वाराणसी, आजमगढ़ सहित कई जिलों में मुख्तार का आतंक था. योगी आदित्यनाथ उसके खिलाफ आवाज बुलंद करते रहे.

2005 के मऊ दंगे में पीड़ितों को इंसाफ दिलाने की ली थी कसम

पहली बार दोनों आमने-सामने तब हुआ, जब 2005 में मऊ में भीषण दंगा हो गया. मुख्तार अंसारी वहां पर हथियारों को लहराते हुए खुली जीप में घूम रहा था. जब वहां पर दंगा पीड़ितों को न्याय नहीं मिला तो उस समय सांसद योगी आदित्यनाथ ने मुख्तार अंसारी को चुनौती दी थी और कहा था कि वह मऊ दंगे के पीड़ितों को इंसाफ दिला के रहेंगे.योगी का काफिला मऊ बॉर्डर पर रोका गया

वह 2006 में गोरखक्षनाथ मंदिर से मऊ के लिए 10 से 12 गाड़ियों के काफिले के साथ निकल पड़े. गोरखपुर से 30 किलोमीटर तक योगी आदित्यनाथ के पहुंचते-पहुंचते गाड़ियों का काफिला 150 के करीब हो गया. वो धीरे धीरे मऊ की तरफ बढ़े. तब न तो यूपी में बीजेपी की सरकार थी और न ही कोई पैठ, तो योगी आदित्‍यनाथ को गोरखपुर और मऊ के बार्डर दोहरीघाट में ही रोक दिया गया था. जिसके बाद योगी आदित्यनाथ वापस आ गये. आरोप लगे कि ये सब सरकारों के संरक्षण में मुख्तार तुष्टिकरण का खेल खेल रहा था.

2008 में आजमगढ़ में हुआ योगी के काफिले पर हमला

मऊ दंगों के तीन साल बाद यानी वर्ष 2008 में योगी आदित्‍यनाथ ने मुख्‍तार अंसारी को फिर ललकारा. योगी आदित्‍यनाथ ने हिंदू युवा वाहिनी के नेतृत्व में ऐलान किया कि वह आजमगढ़ में आतंकवाद के खिलाफ रैली निकालेंगे. तय तारीख के अनुसार सात सितंबर, 2008 को डीएवी डिग्री कॉलेज के मैदान में रैली का आयोजन किया गया. इसमें मुख्‍य वक्‍ता योगी आदित्‍यनाथ थे. रैली की सुबह, गोरखनाथ मंदिर से योगी का काफिला निकला, जो आजमगढ़ पहुंचते-पहुंचते 200 से अधिक वाहनों में तब्दील हो गया.

योगी आदित्यनाथ का काफिला जब निकला तो सैकड़ों गाड़ियां पीछे थीं. कई सौ मोटरसाइकिलें भी योगी-योगी के नारे लगा रहे थे. योगी आदित्यनाथ काफिले में सातवें नंबर की लाल एसयूवी में बैठे थे. तभी एक पत्थर उनकी गाड़ी पर आकर लगा. योगी के काफिले पर हमला हो चुका था. हमला सुनियोजित था. उस वक्‍त योगी ने ये संकेत दे दिया कि हमला मुख्‍तार अंसारी ने करवाया है. योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि काफिले पर लगातार एक पक्ष से गोलियां चल रही थीं, गाड़ियों को तोड़ा जा रहा था पुलिस मौन बनी रही.

तुष्टीकरण के खिलाफ हमेशा खड़े रहे योगी: वरिष्ठ पत्रकार

वरिष्ठ पत्रकार महेन्द्र सिंह कहते हैं कि योगी आदित्यनाथ हमेशा तुष्टीकरण के खिलाफ खड़े रहे. मुख्तार जैसे लोग तुष्टीकरण की पैदाइश हैं. मऊ दंगों के समय मुख्तार को तत्कालीन सरकार का सरंक्षण प्राप्त था. कानून में विश्वास के कारण ही सरकार के संरक्षण के बाद भी मुख्तार को योगी आदित्यनाथ ने चुनौती दी थी.

अन्याय के खिलाफ गोरक्षपीठ हमेशा आवाज उठाती रही है, इसके पीठाधीश्वरों ने हमेसा समाज के कल्याण का काम किया है. इस पीठ के पीठाधीश्वरों ने अंग्रेजों से लोहा लिया है तो राममंदिर निर्माण के लिए जेल की सैर की है. पर न्याय के लिए कभी डिगे नहीं. और उसी परम्परा को योगी आदित्यनाथ ने भी आगे बढ़ाया. जब वो सांसद थे, तब भी झुके नहीं और आज जब वो मुख्यमंत्री हैं तब भी माफियाओं को कानून का ही पाठ पढ़ा रहे हैं.



Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here