जानिए क्या है फाइब्रोमायल्जिया बीमारी, क्‍या हैं इसके लक्षण और बचाव का तरीका

0
3


फाइब्रोमायल्जिया (Fibromyalgia) या फाइब्रोमायल्जिया सिंड्रोम एक ऐसी स्थिति है, जो पूरे शरीर में दर्द (Body Pain) का कारण बनती है. फाइब्रोमायल्जिया वाले लोग अक्सर अन्य लक्षणों का अनुभव करते हैं, जैसे अत्यधिक थकान या नींद, मूड या याद्दाश्त संबंधी समस्याएं. पुरुषों की तुलना में फाइब्रोमाइल्जिया महिलाओं को अधिक प्रभावित करता है. इसके कारण होने वाला दर्द, अत्यधिक थकान और नींद की कमी दैनिक कार्यों के करने की क्षमता को प्रभावित कर सकती है.

फाइब्रोमायल्जिया से ग्रस्त लोग अक्सर सोने के बाद भी थके हुए जागते हैं, भले ही वे लंबे समय से सो रहे हों. इसमें नींद अक्सर बाधित होती है और इससे ग्रस्त कई रोगियों को अन्य नींद के विकार जैसे स्लीप एप्निया और रेस्टलेस लेग्स सिंड्रोम होते हैं.

ये भी पढ़ें – कोरोना वायरस से पड़ रहा पुरुषों के सेक्स हॉर्मोन्स पर असर, जानिएमस्तिष्क में नसों और दर्द संकेतों की समस्या के कारण फाइब्रोमायल्जिया हो सकता है. फाइब्रोमायल्जिया की तुलना गठिया से की गई है. गठिया की तरह फाइब्रोमायल्जिया दर्द और थकान का कारण बनता है, लेकिन गठिया के विपरीत फाइब्रोमायल्जिया लालिमा और सूजन या जोड़ों को नुकसान नहीं पहुंचाता है. यह बीमारी नींद की कमी का कारण भी बन सकती है. इस समस्या से निपटने की निराशा से डिप्रेशन और चिंता हो सकती है.

myUpchar के अनुसार डॉक्टर और शोधकर्ता अभी इसके होने का कारण पता नहीं कर पाएं हैं. हालांकि कुछ कारकों को फाइब्रोमायल्जिया की वजह माना जाता है. माना जाता है कि पहले की बीमारियों से फाइब्रोमायल्जिया हो सकता है या इसके लक्षण बिगड़ सकते हैं. यह अक्सर आनुवंशिक होता है. हालांकि शोधकर्ता अभी तक जीन की पहचान नहीं कर पाए हैं. इसके अलावा अन्य कारकों में शारीरक या भावनात्मक आघात भी शामिल हैं. इस स्थिति को पोस्ट ट्रॉमैटिक स्ट्रेस सिंड्रोम से भी जोड़ा गया है.

ये भी पढ़े  जानें रक्तदान से जुड़े मिथ और उनकी सच्चाई

फाइब्रोमायल्जिया से पीड़ित कई महिलाओं को गर्भवती होने में कोई परेशानी नहीं होती है और कुछ महिलाओं ने गर्भावस्था के दौरान लक्षणों में सुधार की बात भी कही है, लेकिन कुछ महिलाओं में गर्भावस्था के दौरान समस्याएं भी हो सकती है. उनके लक्षण गर्भावस्था के पहले शुरुआती महीनों में बिगड़ सकते हैं. कुछ सामान्य गर्भावस्था में थकान, तनाव, मूड स्विंग्स की शिकायतें होती है जो कि हार्मोन के बदलाव के कारण होती है, लेकिन फाइब्रोमायल्जिया वाली महिलाओं में ये चीजें ज्यादा बिगड़ सकती हैं.

फाइब्रोमायल्जिया के निदान के लिए डॉक्टर सीबीसी, एरिथ्रासाइट सेडीमेंटेशन रेट टेस्ट, साइक्लिक सिट्रुलिनेटेड पेप्टाइड टेस्ट, गठिया कारक टेस्ट और थायराइड फंक्शन टेस्ट करवा सकते हैं. इस रोग के उपचार के लिए डॉक्टर का लक्ष्य पहले दर्द से राहत पहुंचाना होता है. वे दर्द निवारक दवाएं, एंटीडिप्रेसेंट्स, एंटीसीजर ड्रग्स दे सकते हैं. इसके अलावा वैकल्पिक उपचार में थेरेपी, एक्यूपंचर, योग, मेडिटेशन, नियमित व्यायाम, मसाज, रात में पर्याप्त नींद आदि शामिल हैं.

ये भी पढ़ें – मर्दों के स्पर्म काउंट को कम कर सकती है शराब, जानें विज्ञान क्या कहता है

इसके अलावा धूम्रपान से दूरी बना लें. वहीं ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन करें जो कि शरीर में सूजन कम करें. ऐसे खाद्य पदार्थों से बचें जो कि दर्द बढ़ाते हैं. यूं तो कई मामलों में क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम और फाइब्रोमायल्जिया एक जैसे हैं. myUpchar से जुड़े एम्स के डॉ. नबी वली का कहना है कि क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम एक जटिल विकार है, जिसमें बहुत ज्यादा थकान और दर्द रहता है जो कि फाइब्रोमायल्जिया में भी होता है.

ये भी पढ़े  7 फूड जिन्हें शामिल कर सकते हैं इको-फ्रेंडली डाइट में

अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल, फाइब्रोमायल्जिया क्या है, इसके लक्षण, कारण, बचाव, इलाज, जोखिम और दवा पढ़ें।

न्यूज18 पर स्वास्थ्य संबंधी लेख myUpchar.com द्वारा लिखे जाते हैं। सत्यापित स्वास्थ्य संबंधी खबरों के लिए myUpchar देश का सबसे पहला और बड़ा स्त्रोत है। myUpchar में शोधकर्ता और पत्रकार, डॉक्टरों के साथ मिलकर आपके लिए स्वास्थ्य से जुड़ी सभी जानकारियां लेकर आते हैं।



Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here