जानें, कोंकण रेलवे को ही क्यों मिला दुनिया का सबसे ऊंचा चिनाब रेलवे ब्रिज बनाने का जिम्मा?

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नई दिल्ली. भारतीय रेलवे (Indian Railways) की ओर से उधमपुर-श्रीनगर-बनिहाल रेल लाइन (Udhampur-Srinagar-Banihal Rail Line) राष्ट्रीय परियोजना को पूरा करने के लिए तेजी से काम किया जा रहा है. रेलवे इस पूरे प्रोजेक्ट को वर्ष 2023 के आखिर तक पूरा करने की पुरजोर कोशिश में जुटा हुआ है.

इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद जहां कश्मीर से कन्याकुमारी तक रेल आवागमन का साधन सीधा हो जाएगा. वहीं, भारतीय इतिहास में इस चुनौतीपूर्ण प्रोजेक्ट को पूरा करने में अहम भूमिका निभाने वाली कोंकण रेलवे (Konkan Railway) के नाम एक और रिकॉर्ड जुड़ जाएगा.

ऐसा कहने के पीछे बड़ी वजह उसकी पूर्व में हासिल की गई उपलब्धियां हैं. कोंकण रेलवे (Konkan Railway) ही अकेला ऐसा रेलवे है जोकि पूरे भारत में चुनौतीपूर्ण प्रोजेक्ट्स को पूरा करने में महारत हासिल किए हुए हैं. इसकी बानगी चिनाब नदी (Chenab River) पर बनाया जा रहा चिनाब ब्रिज (Chenab Bridge) है.

इतना ही नहीं इस पुल के निर्माण का जिम्मा कोंकण रेलवे को उसकी इस क्षेत्र में महारत और दक्षता  हासिल होने के चलते ही सौंपा गया है. इस बात को स्वयं कोंकण रेलवे कॉरपोरेशन लिमिटेड (KRCL) की ओर से बनाए जा रहे चिनाब पुल में जुटे वरिष्ठ अधिकारी कह रहे हैं.ये भी पढ़े: दुनिया के सबसे ऊंचे रेलवे ब्रिज के आर्क का काम हुआ पूरा, जल्‍द कन्‍याकुमारी से पहुंच पाएंगे श्रीनगर

बताते चलें कि कटरा-बनिहाल रेलवे ट्रैक के कुल 111 किमी रूट पर कोंकण रेलवे की ओर से चिनाब नदी पर दुनिया का सबसे ऊंचा 359 मीटर चिनाब ब्रिज बन रहा है जिसके आर्क पर आखरी सेगमेंट (मेटल पीस) रखकर आर्क का काम पूरा कर लिया गया है.  कोंकण रेलवे इसके रखे जाने के बाद अब बाकी बचे कार्यों को अंजाम देना शुरू करेगा. इस कार्य के अगले  एक से डेढ़ सालों के भीतर पूरा होने की संभावना जताई गई है.

आर्क का काम पूरा भले ही हो गया हो लेकिन कोंकण रेलवे का मानना है कि अब इस आर्क में कंक्रीट और सीमेंट का 66,000 मीट्रिक टन से ज्यादा मेटेरियल को भरने का काम किया जाएगा. सीनियर अधिकारियों का मानना है कि यह आर्क भारी भरकम स्टील के बक्सों वाला होता है.

इस आर्क के बंद होने के बाद अब स्टे केबल को हटाने, स्वयं कंपैक्टिंग कंक्रीट के साथ कंक्रीट आर्क को भरने, ट्रैस्टल्स के निर्माण, वृद्धिशील लॉन्चिंग द्वारा मुख्य आर्क पर डेक लॉन्चिंग करने जैसी अन्य गतिविधियां शुरू की जाएंगी.

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कोंकण रेलवे अधिकारियों की मानें तो यह प्रोजेक्ट बहुत ही कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में पूरा किया जा रहा है. यह रेल ब्रिज इंजीनियरों के लिए एक बड़ी चुनौती से कम नहीं है. कोंकण रेलवे के पास चिनाब नदी पर बन रहे चिनाब ब्रिज के साथ-साथ अंजी खाद ब्रिज  (Anji Khad Bridge) का भी निर्माण कार्य पूरा करने का जिम्मा मिला हुआ है.

चिनाब ब्रिज के साथ अंजी ब्रिज का प्रोजेक्ट भी कोंकण रेलवे को ही मिला
पहले अंजी खाद ब्रिज के निर्माण का कार्य इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड (IRCON International Limited) को सौंपा गया था लेकिन कोंकण रेलवे के पुराने ऐतिहासिक कार्यों के चलते चिनाब ब्रिज के साथ-साथ अंजी ब्रिज का प्रोजेक्ट कार्य भी कोंकण रेलवे को ही सौंप दिया गया. जम्मू-कश्मीर में माता वैष्णो देवी के आधार शिविर कटरा और रियासी के बीच अंजी ब्रिज का निर्माण किया जा रहा है.

अधिकारियों की माने तो यूएसबीआरएल प्रोजेक्ट में कटरा से बनिहाल तक कुल 111 किलोमीटर लंबा रेल रूट है. इसके लिए रेलवे की ओर से 27,949 करोड रुपए का अनुमानित राशि निर्धारित की हुई है. लेकिन कटरा से बनिहाल के 111 किलोमीटर रूट में से 53- 53 किलोमीटर के दो अलग-अलग हिस्सों पर काम किया जा रहा है जिसमें चिनाब नदी पर बन रहा चिनाब ब्रिज भी है.

चिनाब ब्रिज से जुड़े अधिकारी का कहना है कि इस कटरा बनिहाल रूट पर करीब 90 से 92 फीसदी काम पूरा किया जा चुका है. प्रोजेक्ट के चुनौतीपूर्ण कार्यों  पर सफलता हासिल कर ली गई है. अंजी खाद ब्रिज के निर्माण पर जहां 512 करोड रुपए खर्च होने हैं. वहींं, चिनाब ब्रिज की लागत 1380 करोड़ रुपए निर्धारित की गई है. अधिकारी मानते हैं कि कोंकण रेलवे अपनी कौशल रणनीति के आधार पर ही इस प्रोजेक्ट को पूरा करने का काम कर रही है.

मुंबई-केरल के बीच के रेल सफर को 10 घंटे कम किया
कोंकण रेलवे को इस प्रोजेक्ट के मिलने के पीछे एक बड़ा कारण यह भी है कि एक समय में जब रेल मार्ग से मुंबई-केरल (Mumbai-Kerala) के बीच के सफर को तय करने में लोगों को करीब 46 घंटों से ज्यादा का समय सफर में लगता था. कोंकण रेलवे की ओर से तैयार किए गए रूट पर मात्र 36 घंटे लगते हैं. घाटी में रेल प्रोजेक्ट को पूरा करने के मिले कार्य के पीछे एक बड़ी वजह अधिकारी इस उपलब्धि को भी मानते हैं.

1998 में तत्कालीन पीएम वाजपेयी ने की थी कोंकण रेलवे की शुरुआत
बताते चलें कि कोंकण रेलवे की शुरुआत वर्ष 1998 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी (Atal Bihari Vajpayee) की ओर से की गई थी. कोंकण रेलवे ने कई नदियों, पहाड़ों और अरब सागर से गुजरते हुए असंभव लगने वाले रेलवे ट्रैकों का निर्माण कर चुकी है. कोंकण रेल लाईन के एक तरफ जहां अरब सागर और दूसरी तरफ पश्चिमी घाट है. कोंकण रेलवे अब करीब 741 किलोमीटर से ज्यादा लंबे रूट पर करीब 91 टनल और 2,000 से ज्यादा छोटे पुल तैयार कर चुका है. जिससे हर मौसम में करीब 51 से ज्यादा ट्रेन बिना किसी मौसम से प्रभावित हुये संचालित हो रही हैं.





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