जापान का वह खेल जो कमजोर को भी देता है आत्मरक्षा की ताकत, जानिए सारे नियम

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जूडो भारत में काफी प्रचलित है

जूडो (Judo) जापानी खेल है जिसे साल 1992 में बार्सिलोना (Barcelona) में हुए ओलिंपिक में ओलिंपिक खेलों में शामिल किया गया था

नई दिल्ली. जूडो (Judo) एक ऐसा मार्शल आर्ट है जिसे आमतौर पर आत्मरक्षा के लिए सीखा जाता है. इस खेल की शुरुआत जापान (Japan) से हुई हालांकि अब यह खेल ओलिंपिक (Olympic) का भी हिस्सा है. भारत में भी इस खेल को पसंद करने वाले लोगों की संख्या काफी ज्यादा है. आज हम आपको इस खेल के इतिहास औऱ नियमों के बारे में बताने जा रहे हैं.

जूडो का रिंग
जूडो के रिंग को सियाइओ कहा जाता है. यह स्कावयर शेप का प्लेटफॉर्म होता है जो जमीन से थोड़ा उपर होता है. इसकी चौड़ाई आठ मीटर और लंबाई 10 मीटर होती है. ही रिंग के बाहर सात सेंटी मीटर का असुरक्षित घेरा होता है जिसके लाल रंग से दिखाया जाता है.

कैसे खेला जाता है जूडोजूडो खेलने के लिए दोनो खिलाड़ी रिंग में आते हैं और जज और रैफरी का अभिवादन करते हैं. रेफरी के इशारे पर खेल शुरू होता है और दोनों खिलाड़ी अलग-अलग दांव पेंच लगाकर एक-दूसरे को आगे-पीछे धकेलते हैं. खिलाड़ी जब विरोधी की पकड़ से खुद को आजाद नहीं करा पाते हैं तब खिलाड़ी हार मान लेता है. खेल तीन से 20 मिनट के बीच खेला जाता है. यदि स्कोर टाई होते हैं, तो बाउट गोल्डन स्कोर ’या ओवर टाइम में चला जाता है. एक और स्कोर हासिल करने वाला पहला प्रतियोगी को विजेता चुना जाता है.

जूडो में गेम बेल्ट
जूडो खेल में बेल्ट के अनुसार खिलाड़ी का ग्रेड निधारित होता है. वह किस स्तर और कितना मास्टर है यह उसके बेल्ट के रंग से पता चलता है. शुरुआती तौर पर सभी को वाइट बेल्ट दी जाती है. इसके बाद हर एग्जाम के साथ ब्लू बेल्ट, यलो बेल्य, ग्रीन बेल्ट, ब्राउन बेल्ट और ब्लैक बेल्ट दी जाती है. यह सभी क्यू ग्रेड की बेल्ट हैं. इसके बाद टोक्यो 1964 खेलों में जूडो को पुरुषों के लिए एक ओलिंपिक खेल के रूप में पेश किया गया था. यह कार्यक्रम Nippon Budokan में हुं. जूडो टोक्यो 2020 के लिए एक ही स्थल पर वापस आ जाएगा. बार्सिलोना 1992 में ओलंपिक कार्यक्रम में महिलाओं की घटनाओं को जोड़ा गया था.

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जूडो शब्द ‘जुजुत्सू’ से आया है. कहा जाता है कि इसे बौद्ध भिक्षु अपनाया करते थे. जापान से इस खेल की शरुआत हुई. हालांकि यह भारत में कभी प्रचलित है. भारत में जूडो संघ की स्थापना 1964 में हुई और इसके दो साल बाद पहली जूडो चैंपियनशिप आयोजित हुई थी. भारत ने साल 1986 में हुए एशियाड गेम्स में चार ब्रॉन्ज मेडल हासिल किए थे और पहली बार साल 1992 में ओलिंपिक में हिस्सा लिया था.


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