जोधपुर डिस्कॉम के कनिष्ठ अभियंता का एजेंट बीस हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार

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जोधपुर डिस्कॉम (Jodhpur Discom) के जेईएन रिश्वत (Bribe) लेकर अवैध बिजली जलवाले का कार्य करते थे. इसके लिए उन्होंने एक बिचौलिया लगा रखा था, जो लेगों से पैसे बसूलता था. इसी की भनक पर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (Anti Corruption Bureau) की टीम ने बिचौलिये को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया.

जोधपुर डिस्कॉम (Jodhpur Discom) के जेईएन रिश्वत (Bribe) लेकर अवैध बिजली जलवाले का कार्य करते थे. इसके लिए उन्होंने एक बिचौलिया लगा रखा था, जो लेगों से पैसे बसूलता था. इसी की भनक पर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (Anti Corruption Bureau) की टीम ने बिचौलिये को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया.

  • News18Hindi

  • Last Updated:
    January 12, 2021, 8:26 PM IST

जोधपुर. एन्टी करप्शन ब्यूरो (ACB)ने जोधपुर डिस्कॉम (Jodhpur Discom) के एक कनिष्ठ अभियंता (JEN) के बिचौलिए (Middleman) को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया है. मामला जोधपुर डिस्कॉम के बाड़मेर के पादरू गांव का है. यहां जेईएन के लिए रिश्वत राशि एक बिचौलिये द्वारा जुटाई जाने की सूचना थी. इसी को लेकर एसीबी ने कार्रवाई करते हुए उसे पकड़ा है. इधर घटना की जानकारी मिलते ही जेईएन और एईएन गायब हैं, जिनकी एन्टी करप्शन ब्यूरो की टीम तलाश कर रही है.

भ्रष्टाचार निरारेधक ब्यूरो को बाड़मेर के पादरू गांव में रिश्वत लेने की सूचना दी गई थी. इसी को लेकर उसने जाल बिछाया था. जोधपुर की स्पेशल टीम के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. दुर्गा सिंह राजपुरोहित ने बताया कि परिवादी गणपत सिंह ने शिकायत दर्ज कराई थी उसका एक कृषि फार्म पादरू में स्थित है. उस पर पिता रघुनाथ सिंह के नाम से बिजली कनेक्शन लिया हुआ है. डिस्कॉम के कनिष्ठ अभियन्ता जितेन्द्र सैनी 2 जनवरी को उसके फार्म पर आए और बकाया बिजली बिल भरने के साथ ही कहा कि उसके खिलाफ बूस्टर लगा बिजली चोरी करने का मामला बनाएंगे, जबकि उसके यहां बूस्टर लगा हुआ नहीं था.

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फरियादी के आरोप के अनुसार जितेन्द्र सैनी ने मामला नहीं बनाने के एवज में बीस हजार रुपए की रिश्वत मांगी. साथ ही आश्वासन दिया कि वह इसके बाद बूस्टर लगाकर आराम से बिजली ले सकता है. एसीबी ने 6 जनवरी को शिकायत का सत्यापन कराया. इसमें सैनी के बीस हजार रुपए मांगने की पुष्टि हो गई.पुलिस के अनुसार मंगलवार सवेरे गणपत सिंह को सैनी के फोन करने पर उसने रिश्वत की राशि अपने बिचौलिए स्थानीय निवासी नारायण सिंह के फार्म हाउस पर पहुंचाने की बात कही. गणपत सिंह ने वहां जाकर नारायण सिंह को बीस हजार रुपए दे दिए. इस दौरान वहां पहले से तैयार एसीबी की टीम ने उसे दबोच लिया. उसे गिरफ्तार करने के बाद भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की टीम डिस्कॉम कार्यालय पहुंची, तब तक ट्रैप की भनक लगने पर कनिष्ठ अभियन्ता जितेन्द्र सैनी वहां से फरार हो गया. उसे गिरफ्तार करने के लिए एसीबी बाड़मेर व बालोतरा पुलिस की मदद ली जा रही है. इस घटना के बाद भ्रष्टाचार से जुड़े अधिकारियों में हडकंप है.


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