झांसी: गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल है ‘बढ़ई की मस्जिद’ वाली ताजिया, रानी लक्ष्मीबाई से है कनेक्शन

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रिपोर्ट: शाश्वत सिंह

झांसी: मुहर्रम के पवित्र महीने में झांसी में गंगा जमुनी तहजीब का एक अनूठा उदाहरण देखने को मिलता है. मुहर्रम के दिन निकलने वाले जुलूस का नेतृत्व एक हिंदू परिवार द्वारा बनाया गया ताजिया करता है. बढ़ई की मस्जिद के नाम से मशहूर यह ताजिया एक हिंदू परिवार द्वारा बनाया जाता है. इस ताजिया को बल्देव बढ़ई का परिवार बनाता है. लगभग 100 सालों से अधिक समय से यह ताजिया बनता आ रहा है. इस ताजिया को सबसे आगे चलने का अधिकार महारानी लक्ष्मीबाई ने दिया था.

महारानी लक्ष्मीबाई ने दिया था अधिकार
महारानी लक्ष्मीबाई और महाराज गंगाधर राव ने अपने पुत्र की मृत्यु के बाद एक दत्तक पुत्र को गोद लिया था. इस दत्तक पुत्र का नाम भी दामोदर राव रखा गया था. उस समय बल्देव बढ़ई ने चंदन की लकड़ी से बना एक सुंदर पालना महारानी को तोहफे में दिया था.1855 में जब कुछ मुसलमान पक्षों में विवाद हुआ कि मुहर्रम के जुलूस में सबसे आगे कौन सा ताजिया चलेगा, तब महारानी लक्ष्मीबाई ने यह फैसला लिया कि सबसे आगे बल्देव बढ़ई द्वारा बनाया गया ताजिया चलेगा.

गंगा जमुनी तहजीब का है उदाहरण
वर्तमान समय में इस ताजिया को बनाने वाले संजीव ने बताया कि बल्देव बढ़ई के निधन के बाद उनके वंशज लल्ला उस्ताद, धर्मदास, दयाराम ने इस ताजिया को बनाने का क्रम जारी रखा. आज उनकी पांचवीं पीढ़ी प्रदीप शर्मा के नेतृत्व में इस जिम्मेदारी को निभा रही है. संजीव ने बताया कि हिंदू और मुसलमान दोनों ही बड़ी संख्या में यहां आते हैं. साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि ताजिया के डिजाइन में आज तक कोई भी बदलाव नहीं किया गया है. जैसा ताजिया महारानी लक्ष्मीबाई के समय में बनता था ठीक उसी तरह का ताजिया हम आज तक बनाते हैं. महारानी लक्ष्मीबाई ने जिस परम्परा को शुरू किया था वह आज तक चली आ रही है.

Tags: Jhansi news, Uttar pradesh news



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