झांसी:-जब शादी की रस्मों को बीच में रोक कर दुल्हन को एग्जाम दिलाने पहुंचा दूल्हा…

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(रिपोर्ट – शाश्वत सिंह)

महात्मा गांधी ने कहा था कि अगर किसी को आत्मनिर्भर बनाना है तो उसे शिक्षित कर दीजिए.महिलाओं के मामले में यह बात और भी मुनासिब हो जाती है.शिक्षा कितनी जरूरी है इसका उदाहरण एक बार फिर झांसी में देखने को मिला.वीरांगना लक्ष्मीबाई की धरती झांसी के सुल्तानपुरा गांव में रहने वाली पूजा ने यह साबित कर दिखाया कि शिक्षा से महत्वपूर्ण कुछ भी नहीं. शादी की रस्में भी नहीं. जी हां, पूजा ने अपनी शादी की रस्मों को बीच में रोककर परीक्षा देने को प्राथमिकता दी.उनके साल भर की मेहनत को तय करने वाली यह परीक्षा उनके लिए कितनी महत्वपूर्ण थी यह उन्होंने बता दिया.

परीक्षा देने के लिए रोक दी शादी की रस्में

दरअसल झांसी जिले के सुल्तानपुरा गांव की निवासी पूजा साहू बीए द्वितीय वर्ष की छात्रा हैं.वह चिरगांव स्थित राष्ट्रकवि मैथिली शरण गुप्त महाविद्यालय में पढ़ाई करती हैं.पढ़ाई के दौरान ही घर वालों ने शादी तय कर दी थी.यहां तक सब कुछ ठीक था.मुश्किल तो तब खड़ी हुई जब परीक्षा की तिथि घोषित हुई.जिस दिन पूजा की विदाई होनी थी उसी दिन उनकी परीक्षा भी थी.हिंदू रीति रिवाज के अनुसार शादी की रस्में एक बार शुरू हो जाती हैं तो उन्हें विदाई तक रोका नहीं जाता.अगर विदाई तक का इंतजार करते तो परीक्षा छूट जाती. पूजा यह बात भली भांति जानती थी.उन्होंने तय किया कि वह पहले परीक्षा देंगी.इसके लिए अपने होने वाले पति पंकज और ससुराल वालों से बात की.

जब तक चलती रही परीक्षा, दूल्हे राजा करते रहे इंतजार

दूल्हा और दुल्हन पक्ष ने इस पर चर्चा की और तय हुआ की दुल्हन परीक्षा देने जाएंगी.खास बात यह रही की दूल्हे राजा खुद दुल्हन को परीक्षा दिलवाने के लिए परीक्षा केंद्र तक ले गए.कॉलेज में मौजूद शिक्षकों और परीक्षा देने आए बाकी विद्यार्थियों के लिए भी है हैरान कर देने वाला नजारा था.जब तक परीक्षा चलती रही दूल्हा अंकुश बाहर इंतजार करते रहे.परीक्षा पूरी होने के बाद ही दूल्हा और दुल्हन बाकी रस्मों के लिए अपने गांव रवाना हो गए.

आत्मनिर्भर बनने के लिए शिक्षा ही एकमात्र साधन है

परीक्षा देने के बाद पूजा ने जो बात कही वह पूरे समाज के लिए प्रेरित करने वाली है.उन्होंने कहा कि शिक्षा से बढ़कर कुछ भी नहीं है. शादी हो जाने के बाद भी पढ़ाई नहीं छोड़नी चाहिए.शिक्षा के सहारे ही लड़कियां अपने पैरों पर खड़ी हो कर कुछ बन सकती हैं.उन्होंने अपनी सहेलियों से कहा कि वो खूब पढ़े लिखे और कुछ बनने की कोशिश करें.दूसरों पर निर्भर होने के बजाय आत्मनिर्भर बनें.पूजा के ससुराल के लोगों ने भी यह कहा कि वह उसे आगे भी पढ़ाएंगे.

शिक्षा का महत्व समझाने के लिए सर्वश्रेष्ठ उदाहरण

राष्ट्रकवि मैथिली शरण गुप्त महाविद्यालय के प्राचार्य ने कहा कि महाविद्यालय के इतिहास में यह पहला अवसर था यहां एक दुल्हन परीक्षा देने पहुंची थी.आने वाले समय में यह कहानी हर छात्रा को सुनाई जाएगी.शिक्षा का महत्व क्या होता है यह समझाने के लिए यह मामला सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है.



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