झांसी:-मुगलों से अपनी अस्मत बचाने के लिए दो बहनों ने दे दी थी जान,उनकी याद में बनें इस मंदिर में आते हैं हजारों श्रद्?

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(रिपोर्ट – शाश्वत सिंह)

झांसी.
झांसी में एक ऐसा मंदिर है जिसके निर्माण के पीछे कारण है खूबसूरत दो सगी बहनों द्वारा की गई आत्महत्या.जी हां, मुगलों से अपनी अस्मत बचाने के लिए दो बहनों ने झांसी की दो पहाड़ियों से कूद कर जान दे दी थी.इन बहनों का नाम था कैमासन और मैमासन. झांसी के कोछाभंवर की रहने वाली इन दोनों बहनों की खूबसूरती के चर्चे हर ओर थे.जब मुगल शासक तक यह बात पहुंची तो उन्होंने इन दोनों बहनों को अपनी वासना का शिकार बनाना चाहा.जब मुगल सैनिक कैमासन और मैमासन को पकड़ने के लिए आए तो दोनों बहनें अपनी जान बचाने के लिए पहाड़ी की तरफ़ दौड़ी.बड़ी बहन कैमासन ने एक पहाड़ी से कूद कर अपनी जान दे दी.तो छोटी बहन मैमासन ने भी उससे थोड़ी दूरी पर स्थित पहाड़ी से कूद कर अपने प्राण त्याग दिए.

बुन्देली राजा ने करवाया था मन्दिर का निर्माण
दोनों बहनों के इस बलिदान को झांसी के लोग कभी नहीं भूले.उनके इस पराक्रम और बलिदान को याद करते हुए बुंदेली राजा वीर सिंह ने सन् 1120 के आस पास इस मंदिर का निर्माण करवाया था.उन्होंने इस मंदिर में मां कामाख्या देवी की मूर्ति की स्थापना कराई थी.उस समय का यह छोटा सा मंदिर आज भव्य रूप ले चुका है.ये दोनों ही पहाड़ झांसी के सबसे उंचे पहाडों में से एक हैं.एक पहाड़ में छावनी क्षेत्र में आता है,तो वहीं दूसरा बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के पीछे स्थित है.झांसी और विश्वविद्यालय के विकास के साथ इस मंदिर का भी विकास होता रहा.

164 सीढियां चढ़ने के बाद होते हैं मां के दर्शन
कैमासन मंदिर जहां भक्तों के लिए साल भर खुला रहता है तो वहीं छावनी में स्थित में मैमासन मंदिर कुछ विशेष दिनों पर ही खुलता है. कैमासन मंदिर तक पहुंचने के लिए भक्तों को 164 सीढियां चढ़नी पड़ती हैं.इतनी कठिनाई के बावजूद भी भक्त बड़ी संख्या में यहां आते हैं.मंदिर के पुजारी के अनुसार नवरात्रि में रोज लगभग 2 हजार भक्त माता के दर्शन के लिए आते हैं.लोग यहां पुत्र प्राप्ति की आस लेकर भी आते हैं.जिन श्रद्धालुओं की मनोकामना पूर्ण हो जाती वह भक्त यहां पालना चढ़ाते है और भंडारा भी करवाते हैं.

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