ट्रक से टक्कर के बाद काटना पड़ा था पैर, फिर भी बनी वर्ल्ड चैंपियन-Para World Badminton Championship gold medalist manasi joshi story

0
19


मानसी जोशी हैं वर्ल्ड चैंपियनशिप गोल्ड मेडलिस्ट

राजकोट की मानसी जोशी (Manasi Joshi) हैं वर्ल्ड चैंपियन शटलर, पैरा बैडमिंटन चैंपियनशिप में जीता हा गोल्ड मेडल

  • News18Hindi

  • Last Updated:
    October 9, 2020, 10:31 PM IST

नई दिल्ली. लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती कोशिश करने वालों की हार नहीं होती, ये कहावत पैरा बैडमिंटन वर्ल्ड चैंपियन मानसी जोशी (Manasi Joshi) पर एकदम सटीक बैठती है. मानसी जोशी के जीवन में एक ऐसा हादसा हुआ था जो अगर किसी आम आदमी के साथ होता तो वो टूट जाता लेकिन इस चैंपियन शटलर ने हार नहीं मानी और अपनी मेहनत-लगन से वर्ल्ड चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया. मानसी जोशी की कहानी उन लोगों के लिए एक प्रेरणा है जो कठिन हालातों से डरकर हार मान लेते हैं. कैसे विषम परिस्थितियों का सामना कर चैंपियन बना जाता है, इसके लिए मानसी जोशी का वो दर्दनाक किस्सा जानना जरूरी है. मानसी जोशी…एक चैंपियन मानसी जोशी साल 2019 में चर्चा में आईं जब उन्होंने स्विट्जरलैंड में हुई वर्ल्ड चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता. (Para World Badminton Championship) हालांकि मानसी जोशी की चैंपियन बनने की कहानी में एक ऐसा दर्द छिपा है जिसे बहुत कम लोग जानते हैं. बात साल 2011 की है जब मानसी एक सड़क हादसे का शिकार हुई. वो अपनी स्कूटी से कहीं जा रही थीं और इसी दौरान वो ट्रक की चपेट में आ गई. हादसे में मानसी ने अपना पांव गंवा दिया. महज 9 साल की उम्र से बैडमिंटन खेल रही मानसी का पूरा करियर दांव पर लग गया. हालांकि मानसी ने हार नहीं मानी. ये खिलाड़ी 50 दिनों तक अस्पताल में रहीं और उन्होंने हिम्मत दिखाते हुए दोबारा खेलना शुरू किया. मानसी ने अपने सपनों को जिंदा रखने का फैसला किया और फिर वो हैदराबाद स्थित पुलेला गोपीचंद की एकेडमी में ट्रेनिंग लेने लगीं. मानसी ने एक इंटरव्यू में बताया कि उस समय केवल यही सोच रही थीं कि एक पैर ही गंवाया है, अगर दौड़ लायक नहीं रही, तो भी कोई बात नहीं. 4 महीने बाद वे कृत्रिम पैर लगाकर फिर मैदान में उतर गई. प्रोफेशनल खिलाड़ी बनते ही मानसी ने लहराया जीत का परचममानसी साल 2014 में प्रोफेशनल खिलाड़ी बनीं और अगले ही साल उन्होंने इंग्लैंड में हुई पैरा वर्ल्ड चैंपियनशिप में मिक्‍स्ड बल्स का रजत पदक हासिल किया. ये उनका पहला बड़ा पदक था. इसके बाद मानसी ने अपने करियर का सबसे बड़ा मुकाम 2019 में वर्ल्ड चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीत हासिल किया. मानसी ने बताया कि कैसे वो गोल्ड मेडल जीतने के लिए मेहनत करती थीं. मानसी का एक पैर नहीं था लेकिन इसके बावजूद वो दिन में तीन प्रैक्टिस सेशन में हिस्सा लेती थीं. मानसी ने अपनी फिटनेस पर काम किया. कठिन परिश्रम से मानसी की मसल्स मजबूत हुई और हफ्ते में 6 जिम सेशन ने उन्हें एक चैंपियन खिलाड़ी बना दिया.



<!–

–>

<!–

–>




Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here