तमिलनाडु में पोंगल के दिन जल्लीकट्टू के दौरान 18 साल के युवक की मौत, 80 लोग घायल

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Tamil Nadu Jallikattu: तमिलनाडु में जल्लीकट्टू उत्सव (Jallikattu Festival) के दौरान एक 18 साल के युवक की मौत हो गई. मदुरै (Madurai) में जल्लीकट्टू प्रतियोगिता के दौरान भड़के बैल ने 18 साल के दर्शक को सींग से मार डाला. पोंगल के दौरान बैल को कंट्रोल करने के इस लोकप्रिय खेल में प्रतियोगियों और बैल मालिकों समेत करीब 80 लोग जख्मी हो गए. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक एक स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि तमिलनाडु के मदुरै के अवनियापुरम इलाके में जल्लीकट्टू प्रतियोगिता के वक्त कम से कम 80 लोग जख्मी हो गए वहीं एक युवक की जान चली गई. जल्लकट्टू शुक्रवार (14 जनवरी) को मनाया गया था.  

जल्लीकट्टू प्रतियोगिता के दौरान एक की मौत, 80 घायल

जानकारी के मुताबिक घायलों में 24 बैल मालिक शामिल हैं. वही इस प्रतियोगिता के दौरान 38 बैल टैमर और 18 दर्शक भी घायल हुए हैं. पुलिस के मुताबिक बैल ने अपने सींग के जरिए युवक बालमुरूगन (Balamurugan) के सीने पर वार किया. जिसके बाद बुरी तरह से जख्मी बालमुरूगन को अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. यह एक दिवसीय पारंपरिक खेल प्रतियोगिता शाम करीब 5 बजकर 10 मिनट पर खत्म हुई. 24 बैलों को कंट्रोल करके अवनिपुरम के कार्तिक (Karthik) पहले नंबर पर रहे. इस सीजन में प्रतियोगिता में विजेता बने कार्तिक को ट्रॉफी प्रदान की गई. उसने कार भी जीती. पिछले साल जल्लीकट्टू प्रतियोगिता के दौरान कार्तिक ने 16 बैलों को कंट्रोल किया था.

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बैलों और इंसानों की लड़ाई 

मुरूगन ने 19 बैलों को कंट्रोल में करके दूसरा पुरस्कार हासिल किया. जबकि भरत कुमार 11 बैलों को नियंत्रित करके तीसरे स्थान पर रहे. जल्लीकट्टू खेल के दौरान बैलों को भी पुरस्कार दिया गया. मनप्पराई के देवासगयाम (Devasagayam) के बैल को सर्वश्रेष्ठ बैल का खिताब दिया गया. इस बैल को कोई भी काबू में नहीं कर सका. मदुरै में जल्लीकट्टू प्रतियोगिता के दौरान करीब 641 बैल शामिल हुए थे. जल्लीकट्टू खेल के दौरान सांडों और बैलों के सिंगों में पैसों का थैला फंसाकर भीड़ में छोड़ दिया जाता है और प्रतियोगिता में शामिल लोगों को उन पर काबू करना होता है. जल्लीकट्टू प्रतियोगिता तमिलनाडु में पोंगल के त्योहार पर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में आयोजित की जाती है. इस खेल को हजारों साल पुराना बताया जाता है.

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