तोला सुरता मा घलो पदोथंव वो

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छत्तीसगढ़ विशेष.

चिल्हर चाल्हर अउ रुपिया सवल्ली के खनन-खनन मा दिन चलत-चलत संझउती अमा के. चौक चवराहा के तीर मा धरत सकेलत फेर चिंतन मा सपड़त बूढ़ी काया.

  • News18Hindi

  • Last Updated:
    February 22, 2021, 5:49 PM IST

कुछु नइये ओखर मेरन सिवाय दू कुरिया के घर के. घर के राहत ले सुते दसना मा महतारी के सुरता मा आंसू ढरकइया कतको होही हे संसार मा. मिरतू लोक मा सबो झन ला भोगे ला परथे अइसे केहे गे हावय तेन सिरतोन मा होथे. कोनो कहिनी बरोबर ए जिनगी के गाड़ी हा रेंगत-रेंगत को जानी आज कोन डहर जाही. भुरसुधहा होगे हे. सबो के सेती अपने अपन गोठियावत पतियावत चलना हे ते चलव अउ जानव.

केरा बेचइया के मुड़ मा बोझा

आज कोन उतारही मोर केरा के चातर झउंहा ला कोन जानी. ईश्वर के लीला घलो बीच बजार मा देखे ला मिल जाथे. थके जांगर अउ लचके कन्हिया के का भरोसा तभो ले चलथे. काकर से चलना हे तेला भगवान घलो जानत होही तभो ले मोरेच परछो काबर लेवत होही कइथंव. जाने सुने के दिन मा सजियान लईका ला संगति हा बिगाड़ के धर दिस. संगति धरइया घलो ककरो संगति मा परे रिहिस होही. को जानी ए संसार मा अइसन संगति वाला कतका झन होहीं. सबो बेचागें बीच बजार मा कोन हे लेवनहार. कतको झन के सइता हरागे टोर दिन के करार. झारे फूंके बर नइ लागय ए संगति के डेरा ला परोसी कस झगरा माते रइथे अउ दिन पहावत पहावत रहिगे फेर कोनो नइ जानिन का होही ए काया के.

खनन-खनन बाजय कोचनिन थईलीचिल्हर चाल्हर अउ रुपिया सवल्ली के खनन-खनन मा दिन चलत-चलत संझउती अमा के. चौक चवराहा के तीर मा धरत सकेलत फेर चिंतन मा सपड़त बूढ़ी काया. को जानी आज का होही भगवान सरी दिन टंगाए टंगाए मुंह कान घलो छोही असन सुखाए ला धर लेथे. बासी भात घलो कतका दिन ला सहत साग अउ दार ला समोए बर धीर धरत होही जाने नइ पाइंव अउ रेंगे के पारी आगे. गनती के रुपिया अउ बनती के काम ला सदा दिन सुरता मा राखना चाही. लछमी के पूजा मा घलो घर दुवारी के चिकनाई अबड़ सुवाथे अवइया जवइया के मन ठनकय झन लछनी दाई थोकन हमरो सुरता राखहू. लुका-लुका के पोरा ला गड़ियाय तेन दिन के बाते बात मा सुरता अवई घलव अलहन बरोबर लागथे. बने-बने राहय तेनो मा का बने-बने.

जवानी के दिन नसा झन पोटारव

एके झन लइका तेनो बिन बाप के. मया अउ माया दूनो डाहर ले फंदाए हे मोर जिनगी. चलही ते बल परही अइसे कहिके रेंगे-रेंगे नानमुन बुता काम मा घर संसार ला चलाना हे. लउठी असन लइका के सहारा मिलही कहिके खटावत-खटावत कनिहा घलो नवे ला धर लिस तेकरे सेती सहर डहर मा चलना हे कहिके सोंच बनाएन तेन आज के दिन मा उल्टा परगे. रोजीना सहर के रद्दा नपई मा गांव के गुड़ी चंवरा मा का होवत हे नइ जाने पावेंव अउ एदे रद्दा नसा के नास ला धर लिस. पढ़ई लिखई के चार अक्षर हा कतका साथ दिही मे नइ जानव फेर कांही हुनर नइ पाए ते का काम के. कोनो हुनर ला सीखना अउ सीखोना आज ला जरूरी हे. बने धरे रद्दा ला चतवारत चलत रहना हे तभे सुखी अउ दुखी मन हा अपन चालत जिनगी ला जीही. आन डाहर के चलई मा जवानी लथरे ला धर लेथे.

मां तोर बूढ़ी काया स्वर्ग सिधार लिस

टेसन के रद्दा. मोटर गाड़ी, आटो के आना जाना मेला मड़ई कस बारो महिना रेलम पेल. गांव के रद्दा छूटगे भरे जवानी मा माता ला कहां खोजंव. चलत-चलत जेन मिल जाए तेनला हाथ लमावंव. रुपिया-दुरुपिया बर आंसू ढारंव. रात-दिन एके बरोबर. नींद परगे ते सुतेरा नइतो जागना तो किसमत मा लिखे हे.

नसा नास के जर हरय आज पाव आधा पाव घलो सपना होगे काबर के महतारी दाई के लुकाए रुपिया घलो सिरागे ते कोन पूछही. परे डरे बिड़ी माखुर ला सकेलत धरत अउ सिपचावत सुरता मा अपन दाई ला पदोवत ओकर बेसहारा जिनगी के अब कोनो सहारा नइये.चिंतन के सेती चिता के आगी घलो कोन देही. इकरे सेती आज के जुग मा नसा के नास होही तभे हमन जी पाबो नइते परिवार के का होथे जान डरव. अपन सेती अपने ला भोगे बर परथे.






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