दिल में प्रधान बनने की चाहत, मुंबई छोड़कर गांव की डगर घूम रहे फिल्म निर्माता uttar pradesh panchayat election 2021 film director have come to jaunpur from mumbai to contest election nodmk8

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जौनपुर जनपद की करियांव ग्राम पंचायत से प्रधान पद के लिए भोजपुरी फिल्म निर्माता पिंटू सिंह और प्रधान पद की प्रत्याशी किन्नर आशा ने रविवार को अपना पर्चा दाखिल किया

जौनपुर (Jaunpur) जिले से 50 किलोमीटर दूर मीरगंज थाना क्षेत्र के करियाव गांव में किन्नर और एक फिल्म निर्माता के बीच प्रधान पद प्रत्याशी के रूप में गांव का हीरो बनने की आजमाइश है. वो लगातार गांव की सड़कों और गलियों में प्रचार करते दिख रहे हैं जिसकी इलाके में जोर-शोर से चर्चा है

जौनपुर. इस महीने होने वाले उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव (UP Panchayat Election 2021) में जौनपुर (Jaunpur) जिले में 15 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. त्रिस्तरीय पंचायत चुनावी मेले को लेकर गांवों में एक से बढ़कर एक तस्वीर देखने को मिल रही है. मायानगरी मुंबई (Mumbai) की चकाचौंध छोड़ कर अब फिल्मों से जुड़े निर्माता गांव के मुखिया बनने का सपना देख रहे हैं. गांव की डगर और गलियां में किन्नर और फिल्म निर्माता घर-घर घूमकर प्रचार कर वोट मांग रहे हैं, और विकास करने की बात कर रहे हैं.

जौनपुर जिले से 50 किलोमीटर दूर मीरगंज थाना क्षेत्र के करियाव गांव में किन्नर और एक फिल्म निर्माता के बीच प्रधान पद प्रत्याशी के रूप में गांव का हीरो बनने की आजमाइश है. वो लगातार गांव की सड़कों और गलियों में प्रचार करते दिख रहे हैं जिसकी इलाके में जोर-शोर से चर्चा है.

जनपद के मीरगंज क्षेत्र की करियांव ग्राम पंचायत इस समय पूरी तरह चर्चा में है. इस ग्राम पंचायत से प्रधान पद के लिए भोजपुरी फिल्म निर्माता पिंटू सिंह और प्रधान पद की प्रत्याशी किन्नर आशा ने रविवार को अपना पर्चा दाखिल किया. दोनों के नामांकन करने के बाद गांव में चुनावी सरगर्मी तेज हो गई है.
15 वर्षों से मुंबई में रहकर भोजपुरी फिल्मों के निर्माता के रूप में काम कर रहे करियांव गांव निवासी पिंटू सिंह ने गइल भैंसिया पानी में, बजरंग, पागल दिलवा, गांव की गंगा और पायल जैसी भोजपुरी फिल्में बनाई हैं. उनके नामांकन के बाद गांव के चुनाव में कलाकारों के भी पहुंचने की चर्चा है.वहीं, इसी ग्राम पंचायत से प्रधान पद के लिए किन्नर आशा ने भी नामांकन किया है. वो पिछले चुनाव में दूसरे नंबर पर रही थीं. उनका कहना है कि गांव का विकास जब महिला या पुरुष नहीं कर पा रहे हैं तो फिर उन्हें ही इसके लिए मैदान में उतरना पड़ा है.



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