दिव्यांग किसान के 9 बेटियां, कोई राष्ट्रीय तो कोई अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी, BSF और CRPF में हैं तैनात Rajasthan- Churu- 9 daughters of Divyang farmer,- national or international player-Posted in BSF and CRPF

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किसान नत्थूराम और उनकी पत्नी सावित्री देवी ने बताया कि उनकी बेटियों ने न केवल राष्ट्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनका नाम रोशन किया है. बेटियों ने कभी भी बेटे की कमी महसूस नहीं होने दी.

Amazing: चूरू के एक किसान परिवार की बेटियों (Daughters) ने खेलों में धूम मचा रखी है. इस किसान के 9 बेटियां हैं. सभी बेटियां किसी न किसी खेल (Sports) से जुड़ी हुई हैं. यही वजह की इस किसान के घर में मेडल्स (Medals) का ढेर लगा हुआ है.

चूरू. जिले के गागड़वास गांव ने खिलाड़ियों (Players) के रूप में देश को कई रत्न दिए हैं. यहां के प्राय: हर घर में राष्ट्रीय खिलाड़ी तो है ही. इसके साथ ही यहां बड़ी संख्या में अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी भी हैं. अन्य किसी भी क्षेत्र के एक गांव में इतनी बड़ी संख्या में खिलाड़ी मिलना मुश्किल है. एथलेटिक्स गेम्स (Athletics games) में जहां गांव के युवकों ने राज्य, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया. वहीं इस गांव की बहू और बेटियां (Daughters) भी कम नहीं है. गागड़वास की बेटियां भी अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परचम फहरा रही है. इसी गांव में नत्थूराम पूनिया का एक ऐसा परिवार है जिसने ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ उन्हें आगे बढ़ाओ’ का जीवंत उदाहरण लोगों के सामने प्रस्तुत किया है. एक हाथ से विकलांग किसान नत्थूराम पूनिया के 9 बेटियां हैं. बेटा नहीं है, लेकिन बेटियों ने कभी भी बेटे कमी महसूस ही नहीं होने दी. हालांकि नत्थूराम ज्यादा पढ़े लिखे नहीं हैं और उनका कभी किसी खेल से कोई नाता भी नहीं रहा. लेकिन उन्होंने अपनी 9 बेटियों को खेल के मैदान पर ना केवल उतारा बल्कि उन्हें खूब प्रोत्साहित भी किया. नतीजतन आज एक बेटी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचकर चार मेडल जीत चुकी है. अलवर: BJP नेता ने दी चुनौती, लाठी लेकर जवाब देने पहुंचे बहरोड़ विधायक बलजीत यादव अच्छी शिक्षा की बदौलत यह संभव हुआवहीं दूसरी बेटी ने राष्ट्रीय स्तर पर करीब एक दर्जन से अधिक गोल्ड मेडल जीते हैं. तीसरी बेटी ने राज्य स्तर पर कई मेडल जीते है और राष्ट्रीय स्तर पर कई प्रतियोगिताओं में भाग लिया है. नत्थूराम की दो बेटियां सीआरपीएफ और बीएसएफ में तैनात होकर देश सेवा कर रही है. अच्छी शिक्षा की बदौलत नत्थूराम की चार बेटियां सरकारी नौकरियों में कार्यरत हैं. बेटियों को बोझ नहीं समझे, बल्कि उन्हे अच्छा पढ़ायें और आगे बढ़ायें नत्थूराम और उनकी पत्नी सावित्री देवी ने बताया कि उनकी बेटियों ने न केवल राष्ट्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनका नाम रोशन किया है. बेटियों ने कभी भी बेटे की कमी महसूस नहीं होने दी. पढ़ाई और खेल की प्रैक्टिस के अलावा वे खेत और घर के कामकाज में भी खूब सहयोग करती हैं. नत्थूराम ने बताया कि नौ बेटियां पैदा होने पर परिवार के लोग कहते थे कि आज के जमाने में इतनी बेटियां है कैसे पार पड़ेगी ? बकौल नत्थूराम मैं कहता था कि मुझे परमात्मा पर विश्वास है. बेटी प्रवीण ने जब राष्ट्रीय स्तर पर मेडल जीता तो हमारी खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा. हम माता-पिताओं से कहना चाहेंगे कि बेटियों को बोझ नहीं समझे, बल्कि उन्हे अच्छा पढ़ायें और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें.

दिव्यांग किसान के 9 बेटियां, कोई राष्ट्रीय तो कोई अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी, BSF और CRPF में हैं तैनात Rajasthan- Churu- 9 daughters of Divyang farmer,- national or international player-Posted in BSF and CRPF

प्रवीण ने राष्ट्रीय स्तर पर 13 गोल्ड मेडल जीते हैं नत्थूराम की नौ बेटियों में से छठे नंबर की बेटी प्रवीण ने बीए तक शिक्षा हासिल की है. गांव के ही खेल मैदान में प्रैक्टिस कर डिस्कस थ्रो की राष्ट्रीय खिलाड़ी बनी. प्रवीण ने राष्ट्रीय स्तर पर 13 गोल्ड मेडल जीते हैं और इससे नीचे के मेडलों की कोई गिनती नहीं है. वह फिल्हाल बीएसएनएल जयपुर में एसएसए के पद पर कार्यरत है. पांच वर्ष पूर्व उसकी शादी हो चुकी है. प्रवीण से छोटी अनिता ने एमए तक शिक्षा हासिल की है. वह फिलहाल सीआरपीएफ में कार्यरत है. अनिता ने हैमर थ्रो में राष्ट्रीय के सीनियर व जूनियर वर्ग में छह गोल्ड मेडल जीते हैं. कजाकिस्तान में हुई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल जीता वहीं चीन के चेंगदू में हुई वर्ल्ड पुलिस एथलेटिक्स मीट में भाग लेकर हैमर थ्रो में प्रथम, जैवलिन थ्रो में द्वितीय और डिस्कस थ्रो में तृतीय स्थान पर रहते हुए तीन मेडल जीते हैं. इससे पूर्व गत 6 से 7 जुलाई तक कजाकिस्तान में हुई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया था. अनिता भी शादीशुदा है. अनिता से छोटी मोनिका बीएसएफ जोधपुर में कार्यरत है. मोनिका ने भी खेलों के दम पर आगे बढ़ते हुए यह मुकाम हासिल किया है.



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