दुमका उपचुनाव के लिए मैदान में उतरे CM हेमंत, 3 दिन तक बनाएंगे रणनीति

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सीएम हेमंत सोरेन अगले 3 दिन तक दुमका में रहेंगे और उपचुनाव को लेकर आगे की रणनीति बनाएंगे. (फाइल फोटो)

झारखंड में दुमका और बेरमो सीट पर उपचुनाव (By election) होना है. इनमें से दुमका सीट जेएमएम और बीजेपी दोनों के लिए प्रतिष्ठा की सीट है. लिहाजा सीएम हेमंत सोरेन (Hemant Soren) खुद जीत की रणनीति बनाने मैदान में उतर गये हैं.

रांची. निर्वाचन आयोग ने भले ही अभी झारखंड की दो विधानसभा सीटों, दुमका और बेरमो के लिए उपचुनाव (By election) की घोषणा न की हो, पर राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं. सत्ताधारी दल झामुमो (JMM) के लिए दुमका प्रतिष्ठा की सीट है. लिहाजा जीत की रणनीति बनाने के लिए मुख्यमंत्री खुद मैदान में उतर गये हैं. सीएम हेमंत सोरेन (Hemant Soren) 14 से 16 सितंबर तक दुमका में रहेंगे.

इसलिए झामुमो के लिए महत्वपूर्ण है दुमका सीट

दुमका और पूरा संथाल झामुमो अध्यक्ष शिबू सोरेन की कर्मभूमि माना जाता रहा है. 2019 के लोकसभा चुनाव में दुमका लोकसभा सीट से शिबू सोरेन की हार के बाद पार्टी को गहरा धक्का लगा था. जिसके बाद विधानसभा चुनाव में जहां तत्कालीन रघुवर दास के नेतृत्व वाली सरकार आक्रामक हो गयी थी तो कार्यकारी अध्यक्ष होने के नाते हेमन्त सोरेन ने भी पूरा जोर लगा दिया था. नतीजा यह रहा कि जो भाजपा संथाल में बढ़त का सपना देख रही थी, वह न सिर्फ संथाल में पिछड़ गयी, बल्कि सत्ता से भी बाहर हो गयी.

हेमंत सोरेन ने छोड़ दी दुमका सीट, इसलिए उपचुनावसूबे में पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष हेमन्त सोरेन दो विधानसभा सीट बरहेट और दुमका से चुनाव लड़े थे. दोनों सीट पर उन्हें जीत हासिल हुई थी. 13 हजार से ज्यादा मतों से दुमका सीट पर तत्कालीन मंत्री लुइस मरांडी को हरा मिली थी. विधानसभा चुनाव में मिली जीत के बाद हेमन्त सोरेन राज्य के मुख्यमंत्री बने. उन्हें दुमका और बरहेट में से किसी एक सीट को छोड़ना था. उन्होंने दुमका सीट छोड़ दी. इसलिए दुमका सीट पर उपचुनाव होना है.

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भाजपा के लिए भी प्रतिष्ठा की सीट दुमका

विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद से अब तक झारखंड भाजपा में काफी बदलाव हुए हैं. लक्ष्मण गिलुआ की जगह कमान अब प्रदेश इकाई की कमान दीपक प्रकाश के हाथों में आ गई है. पूर्व सीएम बाबूलाल मरांडी की भी भाजपा में वापसी हो गयी है. ऐसे में जिस तरह हेमन्त सोरेन सरकार की लोकप्रियता के लिए दुमका उपचुनाव लिटमस टेस्ट साबित होगा, उसी तरह भाजपा के नए नेतृत्व के लिए भी यह नेतृत्व क्षमता और संथाल में बाबूलाल मरांडी की लोकप्रियता का भी पैमाना होगा.

छोटे भाई पर दांव खेल सकते हैं हेमंत

दुमका विधानसभा उपचुनाव में झामुमो की ओर से मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के भाई और युवा मोर्चा के अध्यक्ष बसंत सोरेन के उम्मीदवार बनने की संभावना सबसे ज्यादा है. 2019 के विधानसभा चुनाव में दुमका सीट का पूरा मैनेजमेंट हेमन्त सोरेन ने अपने छोटे भाई के कंधे पर ही डाल दिया था. और खुद पूरे राज्य में प्रचार अभियान के लिए निकल गए थे. तब से अब तक दुमका में जिस तरह से बसंत सोरेन एक्टिव हैं, उससे साफ है कि सोरेन परिवार की इस परंपरागत सीट पर शिबू सोरेन परिवार का ही कोई सदस्य चुनाव मैदान में होगा.



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