धर्मशाला में मैक्लोडगंज बस अड्डे का विवादित ढांचा 2 हफ़्तों में गिराने के आदेश

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सुप्रीम कोर्ट. (FILE PHOTO)

एनजीटी ने 2016 में इस सम्बंध में आदेश जारी किया था, जिस पर अब सुप्रीम कोर्ट ने भी मुहर लगा दी है.

धर्मशाला. सुर्खियों में रहे पर्यटन नगरी मैक्लोडगंज के बस अड्डे का विवादित ढांचा गिराया जाएगा. सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों के बैंच ने बस अड्डे के स्थान पर बनाए गए होटल व रेस्टोरेंट के ढांचे को 2 हफ्ते के भीतर गिराने के आदेश जारी किए हैं. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के निर्देशों को बरकरार रहते हुए अपना फैसला सुनाया है. इस सुप्रीम फैसले के बाद निर्माणाधीन कंपनी सहित तत्कालीन अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ जाएंगी.

याचिकाकर्ता ने बड़ी जीत करार दी

याचिकाकर्ता अतुल भारद्वाज ने इस फैसले को न्याय की बड़ी जीत करार दिया है. उन्होंने बताया कि मंगलवार को सुप्रीमकोर्ट के तीन न्यायाधीशों न्यायमूर्ति डा. धनंजय वाई चन्द्रचूड़, इंदू मल्होत्रा व इंदिरा बेनर्जी की बैंच ने सिविल अपील पर यह फैसला सुनाया. देश के शीर्ष कोर्ट के निर्देश पर ही जिला एवं सत्र न्यायाधीश कांगड़ा को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया था. उन्होंने 2018 में मामले की जांच रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंप दी थी. इसमें गैरकानूनी निर्माण के लिए कई विभागों, संस्थानों के अधिकारियों व कर्मचारियों को जिम्मेवार ठहराया गया था. इन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की सिफारिश की गई थी, लेकिन सरकार ने इसके आधार पर कार्रवाई नहीं की.

एनजीटी ने लगाई थी रोकउन्होंने बताया कि एनजीटी ने बस अड्डे के स्थान पर बनाये होटल कम रेस्टोरेंट के निर्माण पर न केवल रोक लगाई थी, बल्कि गैर कानूनी निर्माण को गिराने के आदेश जारी कर इसके लिए कमेटी गठित भी की थी. कमेटी ने अपनी सिफारिशों में कई अफसरों को दोषी माना था. गौर रहे कि बस अड्डे और व्यावसायिक कांप्लेक्स का निर्माण पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड पर किया गया था. आरोप था कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार निर्माण करने वाली कंपनी पर पूरी तरह से मेहरबान रही. लेकिन पूर्व कांग्रेस सरकार ने न तो अधिकारियों पर कार्रवाई की और न ही विवादित ढांचा गिराया. इससे सरकार को राजस्व का भी नुकसान हुआ. एनजीटी के फैसले के खिलाफ पूर्व सरकार सुप्रीम कोर्ट गई, लेकिन कोई राहत नहीं मिली थी. एनजीटी ने 2016 में इस सम्बंध में आदेश जारी किया था, जिस पर अब सुप्रीम कोर्ट ने भी मुहर लगा दी है.

क्या बोले मंत्री

शहरी विकास, नगर एवं नियोजन मंत्री सुरेश भारद्वाज, उद्योग और परिवहन मंत्री बिक्रम सिंह तथा वन मंत्री राकेश पठानिया ने सर्वोच्च न्यायालय के फैसले की सराहना की है. मंत्रियों ने कहा कि इस निर्णय ने पिछली सरकार के कार्यकाल के दौरान किए गए अवैध कार्य फिर सामने आए हैं. उन्होंने कहा कि होटल का निर्माण एक निजी निवेशक ने तत्कालीन वरिष्ठ कांग्रेस के नेताओं की मिलीभगत से किया था. इस दौरान सभी मानदण्डों की उल्लंघना कर राजनीतिक संरक्षण के तहत अवैध निर्माण किया गया था. सक्षम अधिकारी से अनुमति लिए बिना भूमि उपयोग में बदलाव किए गए. उन्होंने कहा कि होटल का निर्माण ऐसी जगह पर किया गया, जहां बस अड्डा निर्मित किया जाना था. दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय तत्कालीन कांग्रेस सरकार एनजीटी के निर्णय के विरूद्ध सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष गई.


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