धर्म-कर्म: वो पूजा जिसे करने से बढ़ जाती है संतान की उम्र, लेकिन जरूर सुनें ये कथाएं, नहीं तो… 

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अभिषेक जायसवाल/ वाराणसी. धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक जीवित्पुत्रिका या जितिया व्रत के साथ कथा सुनने का भी विधान है. ऐसा कहा जाता है कि पूजन और व्रत के दौरान जो महिलाएं कथा नहीं सुनती ऐसे में उनकी पूजा अधूरी मानी जाती है और उन्हें इस व्रत का पुण्य नहीं मिलता. उत्तर प्रदेश के वाराणसी के ज्योतिषाचार्य स्वामी कन्हैया महाराज ने बताया कि इस दिन गंधर्व राजकुमार जीमूतवाहन की पूजा अर्चना और कथा सुनने का विधान है. इस पूजा के दौरान व्रती महिलाओं को दो कथाएं जरूर सुननी चाहिए. बिना इन दोनों कथाओं के इस पूजा को अधूरा माना जाता है.

ये है पहली कथा
जीवित्पुत्रिका व्रत के दौरान पहली कथा गरुड़ और लोमड़ी से जुड़ी है. पौराणिक कथा के अनुसार एक लोमड़ी और एक गरुड़ जंगल में रहा करते थे.दोनों ने एक बार कुछ महिलाओं को गंधर्व जीमूतवाहन की पूजा और व्रत करते देखा.जिसे देख दोनों ने व्रत करने को सोचा और इसका संकल्प लिया.गरुड़ ने पूरे दिन उपवास रखा लेकिन लोमड़ी ने लालच में आकर चुपके से भोजन कर लिया.जिसके कारण लोमड़ी के जन्मे सभी बच्चों की कुछ दिन बाद मौत हो गई लेकिन गरुड़ की संतान को लंबी आयु को प्राप्त हुई.

महाभारत से जुड़ी है कथा
दूसरी कथा महाभारत काल से जुड़ी है.महाभारत के युद्ध के समय अश्वत्थामा के पिता के मृत्यु के बाद उन्होंने पांडवों से बदला लेने का संकल्प लिया था.जिसके बाद अश्वत्थामा ने पांडवों के शिविर में जाकर पांडवों के भ्रम में उन्होंने द्रौपदी के पांच पुत्रो को हत्या कर दी.ये सब देख अर्जुन ने अश्वत्थामा की दिव्य मणि को छीन लिया था.जिसका बदला अश्वत्थामा ने अभिमन्यु की पत्नी उत्‍तरा के गर्भ में पल रहे संतान पर ब्रह्मास्त्र चलाकर लिया.जिससे उत्‍तरा का गर्भ नष्ट हो गया है.लेकिन उस बच्चे का जन्म लेना जरूरी था इसलिए भगवान श्री कृष्ण ने उत्‍तरा के गर्भ में उस संतान को फिर से जीवित कर दिया.जिसके कारण उसका नाम जीवित्पुत्रिका पड़ा बस तभी से संतान की लंबी आयु की कामना के लिए इस व्रत को रखा जाने लगा.

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FIRST PUBLISHED : September 16, 2022, 19:46 IST



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