पतंगबाजों के लिए अच्छी खबर, जयपुर में दोपहर तक तेज चलने लगेंगी हवायें

0
40


जयपुर में मकर संक्रांति पर लोग अलसुबह ही परिवार और रिश्तेदारों के साथ छतों पर चढ़ जाते हैं. दिनभर कानफोडू संगीत के बीच तिल के लड्डू और पकौड़ों तथा अन्य स्वादिष्ट व्यंजनों के खान-पान के साथ पंतगबाजी करते हैं.

Makar Sankranti: पतंगबाजों के लिये मौसम विभाग से खुशखबरी आई है. मौसम विभाग के अनुसार दोपहर तक जयपुर शहर में तेज हवाओं (Winds) का दौर शुरू होने की संभावना है.

जयपुर. गुलाबी नगरी के बेहद पसंदीदा त्योहार मकर संक्रांति (Makar Sankranti) पर पंतगबाजों के लिये खुशखबरी है. मौसम विभाग के अनुसार दोपहर तक शहर में तेज हवाओं (Winds) का दौर शुरू हो जायेगा. फिलहाल 1 किलोमीटर प्रतिघंटा की स्पीड से हवायें चल रही हैं. लेकिन दोपहर तक इनके रफ्तार पकड़ने की संभावाये हैं. इससे पंतगबाज आराम से पंतगबाजी का आनंद ले पायेंगे. सुबह-सुबह आसमान में बादल छाये रहे, जिससे सर्दी का अहसास बना रहा. लेकिन दिन चढ़ने के साथ ही धूप खिलने से पंतगबाजों की बांछे खिल गई हैं. मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार अगर हवायें चल गई तो पतंगबाजों की बल्ले बल्ले होगी.

दरअसल यूं तो मंकर संक्रांति पर देशभर में पंतगें उड़ाई जाती हैं. लेकिन जयपुर में इसका जबर्दस्त क्रेज है. देश के प्रमुख पर्यटन स्थल गुलाबी नगरी को पंतगबाजी के लिये भी जाना जाता है. जयपुर में पंतगबाजी के माहौल को देखने के लिये इस पर्व पर बाहर से भी लोग आते हैं. देसी-विदेशी पर्यटक भी इस मौके पर पंतगबाजी का लुफ्त उठाते हैं. यहां तक कि पर्यटन विभाग पंतग महोत्सव का आयोजन भी करता है. इसमें विदेशी पर्यटक अलग-अलग तरह की विशेष पंतगें उड़ाकर इस आयोजन को यादगार बनाते हैं.

दिनभर छतों पर ‘वो काटा, वो मारा’ का शोर मचता रहता है
मकर संक्रांति पर लोग अलसुबह ही परिवार और रिश्तेदारों के साथ छतों पर चढ़ जाते हैं. दिनभर कानफोडू संगीत के बीच तिल के लड्डू और पकौड़ों तथा अन्य स्वादिष्ट व्यंजनों के खान-पान के साथ पंतगबाजी करते हैं. इस दौरान दिनभर छतों पर ‘वो काटा, वो मारा’ का शोर मचता रहता है. वहीं समूहों में भी लोग छतों पर डांस करते भी देखे जा सकते हैं. लगभग पूरा शहर छतों पर ही नजर आता है. पंतगबाजी के शौकिन लोग सभी जरुरी काम भी छोड़कर इसकाआनंद लेने से नहीं चूकते हैं.करोड़ों रुपयों का होता है पतंगों का कारोबार

जयपुर में पंतगों का कारोबार भी करोड़ों रुपयों का होता है. शहर का हांडीपुरा इलाका तो पंतग बनानी की बड़ी फैक्ट्री में तब्दील हो चुका है. यहां हजारों लोग पतंग बनाने का काम करते हैं. हर बार नये-नये ट्रेंड की पतंगें बनाई जाती है. इस बार कोरोना की छाया भी इस उद्योग पर दिखाई दे रही है. कोरोना से जागरुक करने वाले संदेशों के साथ ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से लेकर देश की तमाम पार्टियों के बड़े नेताओं के चित्र वाली पतंगें आसमान में एक दूसरे से भिड़ रही हैं.


<!–

–>

<!–

–>


! function(f, b, e, v, n, t, s) {
if (f.fbq) return;
n = f.fbq = function() {
n.callMethod ? n.callMethod.apply(n, arguments) : n.queue.push(arguments)
};
if (!f._fbq) f._fbq = n;
n.push = n;
n.loaded = !0;
n.version = ‘2.0’;
n.queue = [];
t = b.createElement(e);
t.async = !0;
t.src = v;
s = b.getElementsByTagName(e)[0];
s.parentNode.insertBefore(t, s)
}(window, document, ‘script’, ‘https://connect.facebook.net/en_US/fbevents.js’);
fbq(‘init’, ‘482038382136514’);
fbq(‘track’, ‘PageView’);



Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here