पहली बार UP विधानसभा में ली गई बुंदेली भाषा में शपथ, MLA जवाहर राजपूत बोले- ये माटी की भाषा का सम्मान

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लखनऊ. उत्तर प्रदेश विधानसभा सदन में शपथ ग्रहण के दौरान बुंदेलखंडी भाषा (Bundelkhandi language) की गूंज सुनाई दी है. इतिहास में पहली बार यहां किसी विधायक ने बुंदेली भाषा में शपथ ली है. यहां अधिकांश विधायकों ने हिंदी और संस्कृत में पद और गोपनीयता की शपथ ग्रहण की तो वहीं झांसी की गरौठा विधानसभा के विधायक जवाहर लाल राजपूत (MLA Jawahar Lal Rajput) ने बुंदेली में शपथ लेने के बाद इसे अपनी मात्र भाषा का सम्मान बताया है.

सोमवार को उत्तर प्रदेश विधानसभा के सदन में सभी विधायकों का शपथ ग्रहण कार्यक्रम सम्पन्न हुआ. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में सदन के नेता के रूप में शपथ ली. साथ ही नेता प्रतिपक्ष अखिलेश यादव ने विधानसभा में सदन के विधायक पद की शपथ ली. इसके बाद एक एक कर विभिन्न जिलों के विधायकों ने भी विधानसभा में पद की शपथ ली. ज्यादातर विधायकों ने हिंदी में शपथ ली है और कुछ विधायकों ने संस्कृत में भी शपथ ली. वहीं, बुंदेलखंड के विधायक जवाहर लाल राजपूत ने बुंदेलखंडी भाषा में शपथ ग्रहण कर सभी को चौंका दिया.

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विधानसभा में पहली बार ली गई बुंदेली में शपथ
उत्तर प्रदेश विधानसभा के इतिहास में यह पहली बार है जब किसी विधायक ने किसी सीमित क्षेत्रीय भाषा में शपथ ग्रहण की. झांसी जिले के विधायकों का नाम आने के बाद गरौठा विधानसभा क्षेत्र के विधायक जवाहर लाल राजपूत ने मात्र भाषा में शपथ लेनी शुरू की तो मौजूद विधायक भी चौंक गए. बुंदेली में शपथ ग्रहण के बाद विधायक जवाहर राजपूत ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर लिखा,’आज मैंने उत्तर प्रदेश विधानसभा में विधायक पद की शपथ ग्रहण के लिए अपनी मात्र भाषा को चुना. बुंदेलखंडी भाषा को चुना. हिंदी, संस्कृत के साथ हमें अपनी बुंदेली माटी की भाषा पर भी गर्व है!जय बुंदेलखंड. जय हिंद!’

कौन हैं जवाहर लाल राजपूत?
जवाहर लाल राजपूत को किसान पृष्ठभूमि वाले बुंदेलखंड के जमीनी नेताओं में गिना जाता है. वह पिछली विधानसभा के कार्यकाल में सबसे ज्यादा सवाल उठाने वाले विधायक भी रहे हैं. किसानों के मुद्दों पर उन्हें अक्सर बोलते हुए सुना जाता रहा है. वह भाजपा के सबसे पुराने कार्यकर्ताओं में से एक हैं जिन्होंने कभी पार्टी से बगावत नहीं की. वह लोध समाज के नेता हैं और कल्याण सिंह के पार्टी छोड़ने के बाद जवाहर राजपूत ने भाजपा को नहीं छोड़ा था. वह स्थानीय मुद्दों के साथ किसानों और स्थानीय भाषा संस्कृति के लिए अक्सर बोलते रहते हैं. वह दूसरी बार गरौठा से विधायक बने हैं.

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