पार्टी लाइन से बाहर जाने वाले नेताओं पर क्या गिरेगी गाज! कांग्रेस अनुशासन समिति की बैठक में होगा फैसला 

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PCC चीफ होने के नाते आखिरी फैसला कमलनाथ के हाथ में है.

चुनाव (Election) में लगातार हार से निराश कांग्रेस (Congress) नेताओं में असंतोष उभर रहा है. पार्टी नेता पार्टी लाइन से अलग जाकर लगातार बयानबाज़ी कर रहे हैं.

भोपाल. अनुशासन के मामलों में कांग्रेस (Congress) अब सख्त हो गई है. नई अनुशासन समिति की पहली बैठक आज भोपाल में हो रही है. इसमें हाल ही में हुए विधानसभा उपचुनाव (Assembly by election) के मामलों के साथ ही नेताओं की पार्टी लाइन से इतर दिए गए बयानों पर भी चर्चा होगी. बैठक में करीब दस मामलों पर विचार होगा.

कांग्रेस हाईकमान की ओर से हाल ही में अनुशासन समिति का गठन किया गया है. आज हो रही इस बैठक में  दो पूर्व मंत्रियों डॉ गोविंद सिंह और लाखन सिंह यादव से जुड़े मामले भी रखे जा सकते हैं. डॉ गोविंद सिंह पर भिंड जिले के जिला अध्यक्ष श्रीराम बघेल ने आरोप लगाया था कि उन्होंने मेहगांव सीट से कांग्रेस उम्मीदवार हेमंत कटारे को हराने में अपनी ताकत लगायी. हालांकि गोविंन्द सिंह खुद इस बात की वकालत करते हैं कि पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल लोगों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए.

वायरल हुआ था लाखन सिंह का बयान
वहीं कांग्रेस के एक और दिग्गज नेता लाखन सिंह यादव ने कमलनाथ के खिलाफ बयान दिया था. नगरीय निकाय चुनाव के लिए हुई बैठक में उन्होंने कहा था कि कमलनाथ के सर्वे धरे के धरे रह गए. वे कह रहे थे कि सभी सीटें जीतेंगे. लाखन सिंह का ये वीडियो वायरल हो गया और जानकारी संगठन तक पहुंच गई. हालांकि इस मामले की शिकायत नहीं की गई है लेकिन अनुशासन समिति इस पर भी विचार कर सकती है.

पार्टी लाइन से बाहर जाने वाले नेताओं पर क्या गिरेगी गाज! कांग्रेस अनुशासन समिति की बैठक में होगा फैसला 

फैसला कमलनाथ के हाथ
अनुशासन समिति की बैठक में कांग्रेस नेता हरपाल सिंह ठाकुर और ब्रजभूषण नाथ के सोशल मीडिया के जरिए कमलनाथ पर उठाए गए सवालों  के मामले पर भी सुनवाई हो सकती है.इसके अलावा कई और नेताओं के सोशल मीडिया पर कमेंट आए थे, इस बारे में फिलहाल तय नहीं है कि उन्हें इस बैठक के ऐजेंडे में शामिल किया गया या नहीं. अनुशासन समिति इन मामलों में संबंधित नेताओं का पक्ष भी जानेगी. दोनों पक्षों के स्पष्टीकरण के बाद समिति अपना फैसला करेगी. समिति अपनी ओर से अनुशंसा कर इन मामलों को प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ के पास भेजेगी. कमलनाथ ही उस पर अपना अंतिम फैसला सुनाएंगे.


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