पीएम मोदी के आत्मनिर्भर आह्वान से जुड़ रहे हैं सार्थक शर्मा जैसे युवा, शुरू किया अपना स्टार्टअप

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ऑटो फॉर स्योर के संस्थापक-सीईओ होने के नाते, वह इस क्षेत्र के सभी व्यवसायों को देखते हैं और उनका विश्लेषण करते हुए अपने आगे बढ़ रहे हैं और अपने प्लेटफॉर्म को ओर बढ़ा रहे हैं.

ऑटो फॉर स्योर के संस्थापक-सीईओ होने के नाते, वह इस क्षेत्र के सभी व्यवसायों को देखते हैं और उनका विश्लेषण करते हुए अपने आगे बढ़ रहे हैं और अपने प्लेटफॉर्म को ओर बढ़ा रहे हैं.

  • News18Hindi

  • Last Updated:
    January 13, 2021, 1:42 PM IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वकांक्षी आह्वान मेड इन इंडिया मेक इन इंडिया यानी आत्मनिर्भर भारत देश के युवाओं को रास आ रहा है. जीवन में कुछ करने की चाहने वाले युवा एक कदम आगे बढ़ाकर अपना स्टार्टअप शुरू कर रहे हैं. इसी तरह के एक युवा हैं सार्थक शर्मा. इन्होंने ऑटो फॉर स्योर (AutoForSure) प्लेटफ़ॉर्म शुरू किया है. ऑटो और टैक्सी राइड-शेयरिंग से काफी आसान हुआ है. कोरोनाकाल में गाड़ियों के कम चलते ने लोगों को आवाजाही में काफी परेशनी का सामना करना पड़ रहा है. ऐसे में अगर उनके पास ये प्लेटफॉर्म रहेगा तो आसानी से न केवल किसी राहगीर की मदद कर सकेंगे, बल्कि अपने कुछ पैसे भी कमा सकेंगे.

दिल्ली के रहने वाले सार्थक अभी महज 20 साल के हैं. वे एक सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग छात्र हैं जिन्होंने व्यावसायिक क्षेत्र में कदम रख दिया है. वे बताते हैं कि उन्हें अपना बिजनेस खड़ा करने का जुनून है. उनका कहना है कि नौकरी से ज्यादा उन्हें बिजनेस अपनी ओर खींचता है. क्योंकि इसमें उन्हें अपने मनमाफिक काम करने की आजादी मिलती है.

ऑटो फॉर स्योर के संस्थापक-सीईओ होने के नाते, वह इस क्षेत्र के सभी व्यवसायों को देखते हैं और उनका विश्लेषण करते हुए अपने आगे बढ़ रहे हैं और अपने प्लेटफॉर्म को ओर बढ़ा रहे हैं. बताते हैं कि पढ़ाई के साथ वह अपने सहकर्मियों के साथ सलाह-मशविरा करने और मार्गदर्शन करने, व्यावसायिक रणनीति बनाने और रोजमर्रा की चुनौतियों के लिए समाधान खोजने का काम करते हैं. बताते हैं कि इसके लिए उन्हें अप टू डेट रहना होता है.

इसमें उनकी मदद आजकल दुनियाभर के अलग-अलग क्षेत्रों से शुरू हुए पॉडकॉस्ट करते हैं. इन दिनों अगर आपमें जिज्ञासा है तो ज्ञान इंटरनेट पर तैर रहा है. इसमें से अपने मतलब की चीजें ढूंढनी होती है. अन्यथा इंटरनेट जाल भी है, इसमें आप फंस भी सकते हैं. काम के साथ वो पर्सनल लाइफ के साथ संतुलन बनाने को भी कहते हैं. वे बताते हैं उन्हें गैजेट्स अपनी ओर खींचते हैं.


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